21/09/2026
जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति या मोक्ष को भारतीय दार्शनिक परंपरा में मानव जीवन का सर्वोच्च पुरुषार्थ माना गया है।इसी का चिंतन उपनिषदों का मुख्य विषय है।यह एक गुह्य ज्ञान है जो प्राचीन भारत के गुरुकुलों में तत्त्वज्ञानी गुरुओं द्वारा कुछ चुने हुए शिष्यों को दिया जाता था।”उपनिषद्” शब्द का अर्थ भी यही है अर्थात् वह ज्ञान जो शिष्य गुरु के समीप श्रद्धापूर्वक बैठ कर प्राप्त करता है।
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