12/06/2022
भाइयों ध्यान रखिए। हर *मंगलवार* को आप मंदिर में पहुंचने की आदत डालें।
जिस तरह ईसाई रविवार को चर्च जरूर जाता है, और मुसलमान शुक्रवार को मस्जिद जरूर जाता है, हमें भी मंगलवार का दिन तय करना पड़ेगा बल और बुद्धि का दिवस शक्ति का दिवस हनुमान जी का दिवस।
आप सभी को शिकायत होती है कि हिंदू कभी हिंदू के लिए खड़ा नहीं होता। कैसे होगा? क्या आपने ऐसा कोई नियम बना रखा है जिसमें आप कम से कम सप्ताह में एक बार एक दूसरे से मिलें? मिलने से ही आपसी सद्भाव व प्रेम बढ़ता है।
आइए हम अपने वीरान पड़े मंदिरों को शक्ति और संगठन स्थल के रूप में विकसित करें।
हर मंगलवार शाम को 7:00 से 7:30 के बीच आप चाहे कहीं भी है मंदिर अवश्य पहुँचें। हनुमान चालीसा एवं आरती का समय यही होता है। आप अपने घर पर हैं तो घर के पास के मंदिर में पहुँचें, दुकान पर हैं तो दुकान के पास के मंदिर में, ऑफिस में हैं तो ऑफिस के पास किसी मंदिर में। अगर आप यात्रा पर भी हैं तो आप जहां भी हैं वहां पर आसपास किसी भी मंदिर में हर मंगलवार 7:00 से 7:30 के बीच जरूर पहुँचें।
कल्पना कीजिए भारतवर्ष में लाखों लाखों मंदिर हैं, अगर हर मंदिर में सिर्फ 50 से 100 लोग भी पहुँचेंगे और एक साथ मंदिर के घंटों की, शंख की और आरती की आवाजें गूंज आएगी तो एक मिश्रित संगीत जब पूरे भारतवर्ष में हर मंगलवार ठीक 7:00 से 7:30 के बीच में गूंजेगा तो यह आवाज पूरी दुनिया में जाएगी और इसका असर बहुत ही दूरगामी होगा।
विश्वास कीजिए आज की सभी समस्याएँ कपूर की तरह उड़ जाएँगी। इतनी बड़ी संख्या में जब हिंदू अपने मंदिरों में पहुंचेगा, वह भी हर सप्ताह, तो किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं होगी कि हिंदू को छेड़ सके।
हो सके तो अपने साथ अपने बीवी बच्चों को लेकर मंदिर जाएँ। जब आप इस तरह से नियमित रूप से हर मंगलवार मंदिर पहुंचेंगे तो वहाँ आपके आस पड़ोस में जो लोग हैं, वह भी आपसे मिलेंगे, आपकी जान पहचान बढ़ेगी, आपस में संबंध बढ़ेंगे और फिर आप एक दूसरे के सुख दुख में भी शामिल होंगे। इसी तरह से हम सभी एकता के सूत्र में बंध जाएंगे।
अगर संदेश पसंद आया है तो इसे सभी ग्रुपों में प्रसारित करें। और आज ही प्रण करें चाहे हम कुछ भी कर रहे हैं हर मंगलवार 7:00 से 7:30 के बीच हम मंदिर जरूर पहुंचेंगे, अपने लिए नहीं, अपने समाज और अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए।
ध्यान रहे अब यह आवश्यक हो चुका है। अगर आप इसे अभी भी टालते रहे तो बहुत बड़े खतरे में आप पड़ने वाले हैं। जितना शीघ्र आप इसे शुरू करेंगे इतनी जल्दी आप एक दूसरे से एकता के सूत्र में बंध जाएंगे।