07/03/2022
"Garibi लाचारी।
साम का वक्त था मैं और मेरा मित्र रोज की तरह अपने काम से घर की ओर आ रहे थे।
फिर हमने विचार किया की आज वाइन पियेंगे। क्यों आज संडे भी है दिन भी ठीक है,और समय भी बेहतर हैं तो क्यों न आज थोड़ा मस्ती किया जाए।
फिर क्या था,हम वापस मदिरा भवन की ओर जाने लगे ।
करीब १९ मिनट के बाद पहुंचे।
और करीब ३० मिनट तक हमर इंजॉय चलता रहा।
उसके पश्चात हम घर के लिए रवाना हुवे ।
और करीब ७ बजे तक घर आ गए ,अभी घर पहुंचे थे उसके पूर्व मैं एक दुकान पर खड़ा हुवा।
सोचा क्यों न स्मेल को पान के जरिए कम या दबा दिया जाए ताकि घर किसी को पता न चले।
।
मै जिस दुकान पर खड़ा था वहा कोई दुकानदार नही था ।
फिर मैं एक आवाज लगाया ।कोई है क्या दुकान के अंदर ।
तभी भीतर से एक आवाज आती है।
हा, वो अभी आ रहे है। सायद वो उनकी पत्नी थी ।
और मैं थोड़ी देर वही खड़ा रहा ,तभी एक बूढ़ा व्यक्ति आया और बोला।बोलो भाई क्या चाहिए ,
मै बोला एक पान लगा दीजिए मेरे लिए ,और वो फिर अपने काम में लग गया और मेरे लिए पान दिया ।
जितने समय तक मैं वहा खड़ा रहा उतने समय में मैं देखा ।
की एक ६ बाई ४ का दुकान और दुकान से ठीक पीछे भी इतना ही जगह होगा सयाद मैं सही हु तो।
तभी पीछे से एक बूढ़ी महिला आती है मैं उसे देख दंग रह गया।
क्योंकि पहली बात तो ये की वो व्हील चेयर पर थी ।
मै व्हील चेयर पर उनके होने का कारण पूछा
फिर वो बूढ़ा आदमी जो बताया मै दंग रह गया ।
वो बोला की एक बीमारी में एक पैर का ऑपरेशन में पैर कटना पड़ा ।तब से ये समस्या बनी हुई है।
जब पैर का सुना तो बहुत बुरा लगा
बात आगे बढ़ते हुए मैने बोला की ।
आप के घर में कोन कोन है,वो बूढ़ा वक्ति बोला हम दो ही सिर्फ है इस घर में ।
ये सुन कर थोड़ा और झटका लगा क्योंकि एक तो अकेला ऊपर से गरीबी इसी बीच वो बूढ़ा वक्ती बोला हमारे बच्चे भी नही है और जिंदगी की नाव हम चला रहे है भगवान हमें कोई सहारा भी नही दिया
इतना कह कर वो बूढ़ा आदमी भावुक हो चुका था और साथ ही साथ महिला भी
अब मैं अपने आप को कोस रहा था।
मै क्यों यहां आया मेरी वजह से इनका दबा हुआ दर्द आज ये बया कर के मायूस हो गए
और मैं भी भावुक हो चुका इसी बिच मैं उनसे इजाजत मांगी और बोला चिंता न करे भगवान सब अच्छा कर देंगे
और मैं चला गया
फिर जब मैं वहा से गुजरता तो एक पान जरूर खाता हु ।