03/08/2024
परमश्रद्धेय स्वामी रामसुखदासजी महाराज ने कहा है कि ‘‘श्रीमद्भगवद्गीता’’ के प्रत्येक शब्द के अर्थ, भावार्थ, व्याख्या को पूरी तरह से समझने के लिए उनके द्वारा रचित दोनो ग्रंथ ‘‘साधक-संजीवनी’’ एवं ‘‘गीता-दर्पण’’ का अध्ययन करना अतिआवश्यक हो जाता है क्योंकि-
‘‘किसी-किसी भाव का स्पष्टीकरण जैसा ‘गीता-दर्पण’ में हुआ है, वैसा साधक-संजीवनी में नहीं हुआ है; और किसी-किसी भाव का स्पष्टीकरण जैसा साधक-संजीवनी में हुआ है, वैसा गीता-दर्पण में नहीं हुआ है। अतः ‘‘साधक-संजीवनी’’ और ‘‘गीता-दर्पण’’ दोनों ग्रंथों का अध्ययन करें।’’
‘‘साधक-संजीवनी’’ और ‘‘गीता-दर्पण’’ ग्रंथों के साथ स्वामी श्रीरामसुखदास जी महाराज के प्रवचनों की सभी पुस्तकें एवं ग्रंथ प्राप्त करने का एकमात्र स्थान-
‘‘श्री नारायण पुस्तक भण्डार’’
जोधपुर में तीन स्थानों पर उपलब्ध-
1.न्यू कोहिनूर सिनेमा के पास, जोधपुर।
2.बस स्टेशन, जोधपुर।
3.रेलवे स्टेशन, जोधपुर।
स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज द्वारा लिखित ग्रंथ/अनुवाद/प्रवचन/वाणी/पुस्तकों संबंधी जानकारी हेतु संपर्क करें-79874-52805