09/07/2026
“सत्ता चली गई, लेकिन जनता के दिलों में आज भी ज़िंदा हैं चंद्रशेखर!”
भारत की राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो केवल पद से नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों और व्यक्तित्व से अमर हो जाते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर जी ऐसा ही एक नाम हैं।
1983 में उन्होंने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसकी कल्पना आज की राजनीति में शायद ही कोई कर सके। उन्होंने सत्ता के गलियारों से निकलकर भारत को पैदल नापने का संकल्प लिया। कन्याकुमारी से दिल्ली तक लगभग 4,200 किलोमीटर की ‘भारत यात्रा’ केवल एक पदयात्रा नहीं थी, बल्कि भारत की आत्मा को समझने का प्रयास थी।
वे बड़े-बड़े मंचों से नहीं, बल्कि गांव की चौपालों, खेतों की मेड़ों, मजदूरों की बस्तियों और गरीबों की झोपड़ियों में बैठकर लोगों का दर्द सुनते थे। वे कहते थे कि “देश को समझना है तो उसके लोगों के बीच जाना होगा।”
प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनकी सादगी नहीं बदली। सत्ता उनके लिए लक्ष्य नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम थी। जब उन्हें लगा कि सिद्धांतों से समझौता करना पड़ेगा, तो उन्होंने कुर्सी छोड़ना स्वीकार किया, लेकिन अपने विचारों से समझौता नहीं किया।
आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए एहसास होता है कि राजनीति में पद तो कई लोगों को मिलता है, लेकिन सम्मान, विश्वास और इतिहास में अमर स्थान केवल उन्हीं को मिलता है, जो जनता के लिए जीते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर समाजवादी चिंतक एवं जननायक स्वर्गीय श्री चंद्रशेखर जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
“व्यक्ति चला जाता है, लेकिन उसके विचार और आदर्श पीढ़ियों को राह दिखाते रहते हैं।”
शत्-शत् नमन।