12/07/2021
🐟 #मछली हलाल क्यूँ है जबकि वह ज़िबह नहीं की जाती ? 🤔
🇸🇦 इस्लाम ने हलाल खाने का हुक्म देते हुए हराम खाने से मना किया है, और ऐसे जानवर का गोश्त का उपयोग करने के लिए हुक्म दिया है जिसे इस्लामी तरीके से ज़िबह किया गया हो।
( झटके से मारे गए जानवर का गोश्त इस्लाम में हराम है।)
♦️ कई लोग इस हुक्म के मुताल्लिक मछली के बारे मे सवाल करते हैं कि उसे ज़िबह नहीं किया जाता तो यह कैसे हलाल हो गई ??
🏅लेकिन अब विज्ञान ने इस सवाल का जवाब दे दिया है और ऐसा आश्चर्यजनक खुलासा किया है! अल्लाह ने दुनिया में मौजूद हर शै को सही तरीके से बनाया है और ऐसा ही मामला मछली के साथ भी है वो जैसे ही पानी से बाहर आती है तो उसके शरीर में मौजूद सभी रक्त तुरंत अपना रास्ता बदल लेता है और मछली के मुंह में इकठ्ठा होकर " एपीगलोटस" में जमा होना शुरू हो जाता है।
🦈 मछली के पानी से निकलने के कुछ ही देर बाद उसके शरीर में मौजूद रक्त एक एक बूंद एपीगलोटस में जमा हो जाता है और उसका गोश्त पाक और हलाल रहता है और यही कारण है कि मछली ज़िबह करने की जरूरत ही पेश नहीं आती और जिस दौरान मछली का गोश्त बनाया जाता है तो " एपीगलोटस"को बाहर निकाल दिया जाता है।
🫀 यही नहीं विज्ञान ने इस्लाम में हलाल भोजन के हुक्म के पीछे छिपे तथ्य को भी प्रकट किया है। जिससे लोग आजभी हक्का-बक्का रह गए हैं। क्योंकि जब किसी जानवर को ज़िबह किया जाता है तो उसके दिल और दिमाग का संपर्क समाप्त नहीं होता और दिल जानवर की वाहिकाओं और धमनियों में मौजूद सभी रक्त बाहर निकलने तक धड़कता रहता है और इस तरह उसका गोश्त खून से पाक और हलाल हो जाता है।
🐐दूसरी ओर जब किसी जानवर को गैर इस्लामी तरीके से यानी "झटके" से मार दिया जाता है तो उसका दिल भी तुरंत धड़कन बंद कर देता है और इस प्रकार शरीर से खून निकल ही नहीं पाता। वैज्ञानिकों का मानना है कि विभिन्न प्रकार के गंभीर रोग पैदा करने वाले जरासीमों और बैक्टरियाज़ के प्रजनन के लिए रक्त बहुत अच्छा माध्यम है और जब जानवर के शरीर से खून निकल ही नहीं पाता तो यह गोश्त ही खराब कर देता है और जब इंसान उसे खाता हैं तो कई बीमारियों से पीड़ित हो जाता हैं।
याद रखिये ज़िबह किये हुए गोश्त की फ्रिज लाइफ झटके के गोश्त से कहीं ज़्यादा होती है। इसीलिए कहा जाता है के इस्लाम 100 परसेंट एक प्राकृतिक तथा वैज्ञानिक धर्म है।