21/05/2026
🚨 ाल_बाद_भाखड़ा_नहर_से_निकला_मौत_का_राज 😢
शादी से लौटे थे 4 लोग… फिर कभी घर नहीं पहुंचे, अब नहर से मिली ओमनी कार और इंसानी कंकाल
पंजाब के रोपड़ जिले की भाखड़ा नहर ने आखिरकार 26 साल बाद अपने अंदर दफ्न वह खौफनाक राज उगल दिया, जिसने तीन परिवारों की पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी थी। रविवार को जब 32 फीट गहरी नहर की तलहटी से जंग खाई मारुति ओमनी कार बाहर निकाली गई, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप उठी। कार के अंदर से इंसानी हड्डियों के टुकड़े, पुराने जूते-चप्पल, सड़ा-गला सामान और एक मासूम बच्चे की स्कूल यूनिफॉर्म मिली। जैसे ही परिवारों ने उस यूनिफॉर्म को देखा, चीख-पुकार मच गई। 26 साल से जिन अपनों के लौटने की उम्मीद में घरों के दरवाजे खुले रहते थे, अब उनकी मौत की सच्चाई सामने थी।
साल 2000 में कोटला गांव के मुन्नी लाल, तेज राम, सुरजीत सिंह और 8 साल का मासूम कालू शादी समारोह से लौट रहे थे। तेज राम ने उस ओमनी कार को अपनी जमीन बेचकर खरीदा था, लेकिन वह कार और उसमें बैठे चारों लोग रातों-रात ऐसे गायब हो गए जैसे धरती निगल गई हो। पुलिस की जांच ठंडी पड़ गई, लेकिन परिवार हार नहीं माने। किसी ने खेत बेच दिए, किसी ने कर्ज उठा लिया, तो किसी ने गोताखोरों पर लाखों रुपए खर्च कर दिए। कई बुजुर्ग अपने बेटों का इंतजार करते-करते दुनिया छोड़ गए। हालत यह हो गई कि 26 साल तक परिवारों को यह तक पता नहीं था कि उनके अपने जिंदा हैं या मर चुके।
इस दर्दनाक कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब एक दूसरे लापता व्यक्ति की तलाश में गोताखोर कमलप्रीत सैनी नहर में उतरे। गहरे पानी और तेज बहाव के बीच उनकी नजर एक बुरी तरह गल चुकी ओमनी कार पर पड़ी। इसके बाद घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। जब कार बाहर निकली तो उसमें से मिली स्कूल यूनिफॉर्म ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। परिवार फूट-फूटकर रो पड़े। जिन तस्वीरों को 26 साल तक उम्मीद के सहारे संभालकर रखा गया था, अब उन्हीं तस्वीरों पर फूलों के हार चढ़ाए गए। गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब में अंतिम अरदास हुई और फिर नम आंखों से अस्थियां विसर्जित कर दी गईं।
यह सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि उस इंतजार की कहानी है जिसने परिवारों को अंदर से तोड़ दिया। भाखड़ा नहर के गहरे पानी में दफ्न यह राज 26 साल बाद बाहर आया, लेकिन पीछे छोड़ गया सिर्फ आंसू, सन्नाटा और जिंदगी भर का दर्द।
#नहर #भाखड़ा