01/09/2026
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विस्थापन का लाभ और पैसा मिल रहा है, तो विस्थापन कार्ड कब मिलेगा?
मोरवा के विस्थापित परिवारों की समस्या केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। विस्थापित होना एक परिवार की पूरी पहचान और भविष्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में विस्थापन का लाभ देते समय ही परिवार को उसका आधिकारिक विस्थापन कार्ड मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में उसे अपनी पहचान साबित करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
इसी महत्वपूर्ण विषय को लेकर मोरवा पुनर्वास एवं शिक्षा सेवा समिति, सिंगरौली द्वारा एनसीएल प्रबंधन के समक्ष ज्ञापन सौंपकर विस्थापित परिवारों के हित में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। समिति ने मुख्य रूप से निम्न मांगें उठाई हैं।
समिति की प्रमुख मांगें
1. विस्थापित परिवारों को विस्थापन प्रमाण-पत्र/विस्थापन कार्ड उपलब्ध कराया जाए।
2. विस्थापित परिवारों को एनसीएल के स्थानीय चिकित्सालयों एवं केंद्रीय चिकित्सालयों में विस्थापन कार्ड के आधार पर चिकित्सा सुविधा दी जाए।
3. विस्थापित परिवारों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए एनसीएल की बसों में निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा एनसीएल से जुड़े विद्यालयों में विस्थापित बच्चों को उचित प्राथमिकता दी जाए।
4. एनसीएल क्षेत्र में संचालित केंद्रीय विद्यालयों में विस्थापित परिवारों के बच्चों को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाए तथा उनके लिए निर्धारित कोटा सुनिश्चित किया जाए।
5. विस्थापित परिवारों को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसायों को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देने की व्यवस्था की जाए।
समिति द्वारा उठाई गई ये मांगें केवल सुविधाओं की मांग नहीं हैं, बल्कि विस्थापित परिवारों के अधिकार और सम्मान से जुड़ी मांगें हैं।
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अब मेरा भी समिति की इन मांगों को पूरा समर्थन है।
मैं विशेष रूप से विस्थापन कार्ड तत्काल जारी किए जाने की मांग का समर्थन करता हूं।
जब किसी परिवार को विस्थापन का लाभ दिया जा रहा है और उसकी संपत्ति के बदले भुगतान किया जा रहा है, तो उसी प्रक्रिया में उसे यह आधिकारिक पहचान भी मिलनी चाहिए कि वह विस्थापित परिवार है।
रजिस्ट्री, खसरा, ऋण पुस्तिका, पहचान पत्र जैसे दस्तावेज पहले से व्यक्ति की जमीन, संपत्ति और पहचान का आधार हैं। जरूरत पड़ने पर बिजली बिल या नगर निगम का टैक्स जैसे एक-दो सहायक दस्तावेज लिए जा सकते हैं, लेकिन दस्तावेजों के नाम पर ऐसा कागजी चक्रव्यूह नहीं बनना चाहिए जिसमें विस्थापित परिवार ही उलझकर रह जाए।
आखिर विस्थापन के समय ही कार्ड क्यों नहीं?
जिस समय विस्थापन का लाभ दिया जा रहा है, उसी समय विस्थापन कार्ड भी परिवार के हाथ में होना चाहिए।
कल जब वह परिवार अपना घर छोड़कर किसी दूसरी जगह जाएगा, तब उसके पास यह प्रमाण होना चाहिए कि—
> “हम यहां के मूल निवासी थे और विकास परियोजना के कारण विस्थापित हुए हैं।”
यही कार्ड भविष्य में अस्पताल, बच्चों की शिक्षा, परिवहन, रोजगार और अन्य पुनर्वास सुविधाओं का आधार बन सकता है।
विस्थापित परिवारों ने विकास के लिए अपनी जमीन और अपना घर छोड़ा है। अब उन्हें अपनी पहचान और अधिकार के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें—यह सुनिश्चित करना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
मेरी अपील स्पष्ट है—
समिति की मांगों पर गंभीरता से विचार हो, विस्थापन कार्ड तत्काल जारी किए जाएं और विस्थापित परिवारों को उनके अधिकारों के लिए अनावश्यक कागजी प्रक्रिया में न उलझाया जाए।
विस्थापन का पैसा देना जरूरी है, लेकिन विस्थापित की पहचान देना भी उतना ही जरूरी है।
यह राजनीति का विषय नहीं, विस्थापित परिवारों के सम्मान, अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।
**अब सवाल सिर्फ इतना है—
विस्थापन का लाभ मिल रहा है, पैसा मिल रहा है…
तो विस्थापन की पहचान देने वाला कार्ड कब मिलेगा?**
— संजीव सिंह की कलम से ✍️
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