20/08/2026
आखिरी ₹100
एक आदमी रोज़ की तरह काम से घर लौट रहा था। जेब में सिर्फ ₹100 थे।
रास्ते में उसे एक बूढ़ा आदमी सड़क किनारे बैठा दिखाई दिया। बूढ़े ने धीमी आवाज़ में कहा—
“बेटा… सुबह से कुछ खाया नहीं है।”
आदमी रुक गया। उसने जेब में हाथ डाला और ₹100 का नोट निकाल लिया।
लेकिन तभी उसके मन में आया—
“घर पर बच्चे भी इंतज़ार कर रहे होंगे… आज सब्ज़ी भी नहीं है।”
वह कुछ पल खड़ा रहा।
फिर उसने वह ₹100 बूढ़े के हाथ में रख दिए और बोला—
“बाबा, आज आप खा लो… मेरे घर का इंतज़ाम भगवान कर देगा।”
वह घर पहुँचा तो पत्नी ने दरवाज़ा खोला और मुस्कुराते हुए बोली—
“आज खाना बनाने की जरूरत नहीं है।”
आदमी ने पूछा, “क्यों?”
पत्नी ने कहा—
“आपके ऑफिस के मालिक का फोन आया था। उन्होंने आपकी मेहनत देखकर आपकी तनख्वाह बढ़ा दी है।”
आदमी कुछ नहीं बोला… बस उसकी आँखों में आँसू आ गए।
उसे समझ आ गया था—
इंसान जब किसी की मदद करता है, तो उसका हिसाब भगवान अपने तरीके से चुकाता है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
अगले दिन वही आदमी उस बूढ़े को ढूँढने निकला।
वह वहाँ नहीं मिला।
सिर्फ एक कागज़ पड़ा था, जिस पर लिखा था—
“बेटा, कल तुमने मुझे ₹100 नहीं दिए थे…
तुमने मुझे यह भरोसा दिया था कि दुनिया में आज भी अच्छे इंसान जिंदा हैं।”
❤️ किसी की मदद करने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं…
बस दिल बड़ा होना चाहिए।
अगर कहानी दिल को छू गई हो तो इसे किसी एक ऐसे इंसान तक जरूर पहुँचाइए, जो आज भी इंसानियत पर विश्वास करता है। 🙏