04/10/2022
शमी वृक्ष
सनातन धर्म में दशहरे के त्योहार का विशेष महत्व है। मां भगवती की 9 दिन पूजा करने के बाद दशमी के दिन विजयादशमी या दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। हर साल यह पर्व आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन देवी जया और विजया की पूजा की जाती है। विजयादशी का पर्व अच्छाई की जीत का विजय संदेश है। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोक परंपराओं को मुताबित विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन शस्त्र पूजा व शमी के वृक्ष की पूजा की जाती है। साथ ही कहीं पर अश्वपूजन भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसरा, दशहरे के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है
विजयादशमी के दिन शमी के पूजन करने का विशेष महत्व है और इसके पीछे कई कथा भी हैं। कथा के अनुसार, कौरवों की द्यूत में जीत के पीछे शमी पूजन मुख्य कारक था। महाभारत युद्ध से पहले एक और युद्ध हुआ था, जिसे अर्जुन ने अकेले ही लड़ा था। एक तरह कौरवों की विशाल सेना थी और दूसरी तरह अर्जुन अकेले थे।
यह युद्ध विराट के युद्ध के नाम से इतिहास में दर्ज है। अज्ञातवास के अंतिम दिनों के दौरान राजा विराट के लिए अर्जुन यह युद्ध लड़ा था। अर्जुन ने अज्ञातवास में अपने अस्त्र गांडीव को पूरे वर्ष शमी वृक्ष पर रखा, जिससे गांडीव में मारक हथियार के रूप में शत्रुओं में खौफ का सबब बन गया और बाद में कौरवों से जीत प्राप्त हुई थी। शमी वृक्ष की नियमित पूजा करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और दशहरे के दिन इस वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व है
विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष की पूजा करें, इसके बाद गंगा या नर्माद के जल को वृक्ष की जड़ में सिंचन करें। इसके बाद दीपक जलाकर उनकी आरती करें। इसके बाद कोई सांकेतिक शस्त्र रखें और मिठाई से भोग लगाएं और वृक्ष को प्रणाम करें। पूजा करने के बाद वृक्ष की कुछ पत्तियां तोड़कर पूजाघर में रख दें। लाल कपड़े में अक्षत, एक सुपारी के साथ इन पत्तियों को बांध लें। इसके बाद इस पोटली को गुरु या बुजुर्ग से प्राप्त करें और भगवान श्रीराम की परिक्रमा करें।