Gupta's story

Gupta's story new poem

*केंसर कोई छुआ-छूत की बिमारी नहीं अफवाहों से बचें**एक गलत इंसान पर भरोसा आपका पुरा जीवन खत्म कर सकता है*मेरी कहानी शुरू ...
11/02/2026

*केंसर कोई छुआ-छूत की बिमारी नहीं अफवाहों से बचें*

*एक गलत इंसान पर भरोसा आपका पुरा जीवन खत्म कर सकता है*

मेरी कहानी शुरू होती है फरवरी 2022 से जहां मेरी मां का सदियों का सपना पूरा होता है कि मेरा औलाद को एक सरकारी नौकरी हो,
क्योंकि एक मामुली सी साधारण सरकारी नौकरी भी हम जैसे निम्नवर्गीय मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बहुत बड़ी बात होती है खास इस बेरोजगारी के मार में,
पर ऐ कामयाबी कुछ अपने (बस कहने भर के लिए) को रास न आई!
फिर मिला जुला कर जिंदगी का सफर अच्छा ही चल रहा था!
पर, लोगों कि बद्दुआ कहूं या अपने किस्मतों का मार

हमारी माता जी आखरि अक्टूबर तक बिमार रहने लगीं बहुत जगहों पर बहुत सारे डाक्टरों से दिखाया पर कुछ सुधार नहीं हो पा रहा था,

पहली दफा में सारे डाक्टरों ने उसे बाबसीर कहा जो कि बर्षो पहले मुगलसराय में दिखाने के क्रम में बिल्कुल ठीक हो गया था!

पुनः मैंने वहां दिखाया पर कोई सुधार नहीं हुआ,इसी बीच मैंने एक बंगाली डाक्टर से मिला जिसने मुझे एक मोटी रकम के बाद पुरी तरह ठीक करने का दावा किया पर वहां भी मुझे असफलता ही हाथ लगी!
तब जाकर मैंने एक प्रसिद्ध सिविल सर्जन से मिलने के बाद आपरेशन कराने का फैसला लिया!

सारे ब्लड टेस्ट करवा चुका था बस आपरेशन ही बाकी था कि मेरे जहन में एक सुझाव आया कि क्यों ना एक बार एम्स में दिखाया जाए!

मैंने अपनी मां को दिसंबर २०२२ में पटना एम्स में दिखाया जहां डॉक्टरों ने कंडीसन खराब देख तुरंत कोलोनोस्कोपी कराने का सलाह दी पर नंबर १२ दिन बाद मिला!
परन्तु उन्हें दर्द से राहत नहीं मिल पा रही थी जिसके कारण मुझे पुनः ६ दिसंबर २०२२ को एम्स का रूख करना पड़ा जहां स्थिति को गंभीर देखते हुए डॉ ने सिधे एडमिट करने को कहा!
जहां मैंने इस उम्मीद के साथ एडमिट करवाया कि अब तो अब तो मेरी मां पुरी तरह ठीक होकर ही घर वापस लौटैगी, मगर होनि को तो कुछ और ही मंजूर थी!
अगले दिन मां कि कोलोनोस्कोपी हुई जिसमें मां को एक ऐसी बिमारी डिड्कट हुई जिसके नाम सुनते ही अच्छे-अच्छे लोगों कि रुह कांप उठती है!

बिमारी का नाम था *केंसर* 134 एकड़ में फैले हुए Patna aiims में मै अपनी मां के साथ अकेला था बिमारी का नाम सुनते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई! ऐसा लगा जैसे एक पल में मेरी सारी दुनियां छिन गई वहां मुझे संभालने भी कोई नहीं था!
अगर मेरे सामने कोई था तो वो मेरी मां ही थी जो एक टक मुझे आशा भरी निहारे जा रही थी, जैसे वह कह रहीं हों कि अगर मेरा बेटा मेरे सामने है तो मुझे कुछ होने नहीं देगा!
मैं उनकी नजरों से अपनी नजरें मिला न सका और भागते हुए एक सुनसान जगह जाकर खुद को दिवालों से घंटों ठोकर मारता रहा!
तभी किसी ने अवाज दि आपकी मां आपको बुला रही हैं! झटपट मैं अपनी आंसूओं को पोंछते हुए मां के पास पहुंचा! क्या हुआ मां???
कहा रह.. ऐतना देर से अभी कुछ दिन रहे के बा नू ऐहिजे काहे ना। ...भइया से कुछ कपड़ा, कंबल, बर्तन मंगा लेलह कल बहुत ठंड लागत रहे....
मैंने किसी तरह हिम्मत जुटा कर उन्हें फोन किया जो थे तो चचेरे पर मैं अपने भाई से भी कहीं ज्यादा उनको मानता था!
पर उन्होंने सिर्फ ऐ कहते हुए साफ इंकार कर दिया कि मुझे बरात जानि मैं नहीं आ सकता हूं! मैं रोता रहा, गिरगिराता रहा पर उनको पर कोई असर नहीं हुआ! यहां तक कि मैंने यह भी कहा कि आप सिर्फ पहुंचा कर चले जाना एक मिनट भी नहीं रुकना आपकी बरात भी नहीं छुटेगी!

मैं उसके इस व्यवहार से पुरी तरह आश्चर्य था कि आखिर ये इंसान इस तरह कैसे कर सकता है??
पर खैर कोई नहीं मैंने एक दोस्त कि मदद से किसी तरह इंतजाम तो कर लिया,
पर हद तो तब हो गई जब मेरा सबसे ज्यादा दुसरा विश्वासि शक्श ने विश्वासघात किया!
वो रिश्ते में मेरा बहनोई लगता था जिसको से मैं उन दिनों हर बात साझा करता था!
डॉ० ने मेरी मां को ३-६ माह कि उम्र बताई थी, मैं पूरी तरह से बिखड़ चुका था,
मेरे कानों में हर वक्त वो गीत गुंज रही थी जो मेरी मां ने मेरी शादी को लेकर गुनगुनाया करती थी! उन्हे शादी विवाह वाला गीत बहुत याद था जो अक्सर विवाह में गाया करती थी!
उन्होंने अपनी एक डायरी गीत फूल कर दी थी जिसपर सिर्फ विवाह के गीत थें जोकि मेरी मां मेरी शादी को लेकर संजोकर रखीं थीं!
इन सभी बातों को याद कर मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था!
इन सभी बातों को लेकर मैंने दुसरे शक्श (रिश्ते में बहनोई) को फोन लगा कर फुट-फुट कर रो पड़ा और उन्हें इस बिमारी के बारे में किसी को भी नहीं बताने को बोला क्योंकि मुझे मेरी शादी टुटने का डर था, जोकि १०-१५ दिन पहले ही लगी थी!
और मैं किसी भी किमत पर मां कि इच्छा पूरी करना चाह रहा था!
पर यह इंसान ठीक उसके विपरीत किया मेरे हर एक रिश्तेदारों को उन्होंने यह कहकर बातों आग कि तरह फैलाना शुरू किया कि उनके मां को *केंसर हुआ है* *जो कि एक छुआ-छूत की बिमारी है!*
ऐसे भी किस बात को कहां और कैसे कहना है इस बात में तो वह महारत हासिल किया हुआ है!
नतीजा यह हुआ कि मेरे सारे घर वाले, रिश्तेदार हमसे दुरियां बढ़ाने लगें!
क्योंकि उन्हें मालूम था कि मुझे समय,इंसान और घन सभी कि जरुरत होगी और वो भी कब तक के लिए कुछ कहा नहीं जा सकता है!
कुछ सुभचिंतको ने यहां तक सुझाव दिए कि *अब इलाज करवाने से कोई फायदा नहीं है वो तो बचेंगी नहीं और पैसे भी खर्च हो जाएंगे बेकार में...*
और हैरत तब हुई जब मेरे पिता जी ने भी उनकी बातों में आ कर ईलाज करवाने से मना कर दिए!
पर कहां मानने वाला था
सभी कि बातों को नजर अंदाज कर ईलाज करवाने का फैसला ले चुका था!

मैंने एक-एक कर सभी रिश्तेदारों अपने घर वालों को पैसों (उपचार) के लिए फोन लगाना शुरू किया पर एक-दो को छोड़कर सभी लोगों ने बहाने बना कर मना कर दिया!
यहां तक कि लाखों का महिना कमाने वाले लोगों ने 50000 तक भी उघार नहीं दे सकें।
उस समय मेरी पगार सिर्फ 18000 रुपए मासिक थी जिस खर्च पर इलाज कराना संभव नहीं था!
खैर किसी तरह मैंने उनका इलाज शुरू करवाया!
दिसंबर 2022 के मध्य में मैंने उनका पहला *किमोथेरेपी* शुरू करवाया।
जिसके सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले मैंने जब उसके साइड इफेक्ट के बारे में पढ़ कर मेरे सारे रोगंटे खड़े हो गए।
जब मैं मां के तरफ देखा तो दिसंबर के उस ठंड में मेरे शरीर से पसीने आ गये।
पर मेरे पास हस्ताक्षर के सिवा कोई और रास्ता नहीं था!
हस्ताक्षर के बाद लगातार 72-80 घंटो तक चलने वाले किमोथेरेपी शुरू। जिसमें एक दिन पहले डॉक्टर से मिलना बेड खाली होने के लिए 12 से 24 घंटे तक इंतजार करना!

कुल मिलाकर एक किमोथेरेपी के लिए मुझे 4-5 दिन समय लग जाते थें।
और यह हर 10दिन बाद दुहराना पड़ता था!
कुल मिलाकर मुझे महिने का 10-12 दिन मुझे Hospital 🏥 में गुजारने पड़ते थे!
एक तो मुझे बिमारी ने तोड़ दिया था और दुसरे तरफ़ हमारे घर वाले रिश्तेदार जिनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। मांनसिक रुप से तोड़ चुके थे!
कभी कभी तो मुझे बाहरी दुनिया देखे हुए 4-5 दिन हो जातें थें।
जब भी बाहरी दुनिया देखता तो ऐसा लगता था कि जैसे यह दुनिया तो मेरे लिए बनी ही नहीं है।
लोगों बाहर हसंता देख कुछ अजीब सा ही लगता था।
खुल कर हंसने कि तो बात छोड़ो खुलकर रो भी नहीं पा रहा था।
विद्यालय से इतने-इतने दिन छुट्टी पर रहने पर प्रधान शिक्षक का ताना अलग से,
कभी कभी तो मुझे मां को दुसरे Attendant के भरोसे छोड़कर विद्यालय जाना पड़ता था।
कुछ दिन बाद मेरे पिता जी और मेरे बहनोई मेरे इस काम में सहयोग करने लगे जिससे कुछ राहत मिली,
13फरवरी 2023 को मेरी तिलक थी जिसके एक दिन पहले मां हास्पिटल से आई थी।
इतने असहनीय दर्द के बाद भी मेरी शादी को लेकर खुशी उसके चेहरे पर देखने लायक थी!
जिसे देखकर मैं अपने सारे दर्द भूल जाता था।
17 फरवरी 2023 को मेरी शादी हुई जिसकी सारी गतिविधियां मेरी मां ने खुद किया।
घर परिवार वाले हमसे इतनी दुरियां बढ़ाने लगें कि वो अपने घर के छोटे बच्चों को मेरे घर आने तक नहीं देते थे।

इसितरह 5 दिन Hospital 🏥 और 10दिन घर का सफर चल रहा था।
अंततः 24 अगस्त 2023 को मुझे पुत्र रत्न कि प्राप्ति हुई जिसकी खबर सुनकर मेरी मां खुशियों का ठिकाना नहीं था।
पर न जाने किसकी नज़र लग गई और 24 दिसंबर 2024 को मेरे पुत्र को ठंड लग गई और लगातार एक महिनों तक इलाजरत रहने बावजूद भी 28 जनवरी 2025 को उसने पटना महावीर वात्सल्य अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली!

घर कि हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि एक तरफ मेरा पुत्र तो दूसरी तरफ मेरी मां पटना के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती थे!

अब मैं पूरी तरह से टुट चुका था मेरे पास अब इन बिमारीयों से लड़ने कि ताकत नहीं थी।

अपने नात को खोने का सदमा मां को ऐसा लगा कि उन्होंने ने भी 10 फरवरी 2025 को इस दुनियां को सदा सदा के लिए अलविदा कर गई!

5 सद्स्यों के इस परिवार में 13 दिनों के अंदर दो लोगों कि मौत (मेरा पुत्र & मेरी मां) मेरे लिए मेरी जिंदगी का सबसे कठीन समय था,
मैं पूरी तरह सदमे में था।
तब तक लोगों में इतनी इतनी छुआ-छूत कि भावना फैल चुकी थी कि उन्हें कोई फर्क तक महसूस नहीं है रहा था।

और घरवालों (गोतिया) कि तो हद तो तब हो गई जब उन्होंने मेरी मां के मौत के अगले दिन यह साफ कहते हुए माना कर दिया कि मुझे आपसे कोई रिश्ता नहीं रखनी है।

बजबुरन आज मुझे घर से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर किराए के मकान में रहना पड़ रहा है............

01/01/2026

Happy new year 2026

14/11/2025

Tum kahte ho na ki past ko bhulo aur aage badho by

10/11/2025

एक ही समय पर प्यार और नफरत दोनों है! #वायरल


22/10/2025
15/10/2025

12/10/2025

Address

Dhobi Ghat Ara
Ara
802203

Opening Hours

9am - 5pm

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gupta's story posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share