05/11/2021
सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर जितना मूल्य कम किया है वह स्वागत योग्य है, परंतु इस कसरत में पंप मालिकों की 20% जमा पूंजी ही डूब गई है। सरकार जिस तरह से मूल्य में वृद्धि कर रही थी उसी प्रकार से कमी की जानी चाहिए थी। सरकार को एक दिन में अधिकतम उतनी ही कमी करनी चाहिए जितना उत्पाद पर कमीशन दिया जा रहा है, तब भी पंप मालिक इस नुकसान को सहन कर सकते थे। पर इस तरह से मूल्य में एकमुश्त कटौती से पूंजी ही डूब जाने का खतरा है। सबसे ज्यादा नुकसान नए एवम् छोटे व्यवसायी का हुआ है, जिसकी कर्ज से जुटाई गई पूंजी ही घट गई है। ४ वर्ष पूर्व सरकार ने नीति बनाई थी कि मूल्य में किसी भी तरह का बदलाव एक दिन में ५० पैसे से अधिक नहीं होगा। परंतु सीजन के समय, त्योहार की छुट्टी के पहले जब पंपों में स्टॉक भरपूर होता है तब मूल्य में नीति विरुद्ध तरीके से इतनी बड़ी कमी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।