14/04/2026
"मेरे दृष्टि से अभी भी कुछ काम अधूरा है।केवल मेरे नाम का जयजयकार लगाने के बजाय मेरा जो अधूरा काम रहा है उस काम को पूरा करने के लिए अपनी जान कि बाजी लगा दो"...
मुझे किस बात कि दिक्कतें हो रही है किस बात का दुख हो रहा है।इस बात कि जानकारी आप लोगों को पता नहीं है।मुझे इस बात का अफसोस है कि मैंने जो अपने जीवन का कार्य निर्धारित किया था।उस कार्य को मैं पूरा नहीं कर पाया।मैं अभी बीमारियों के कारण अपाइज हो गया हूँ।मैंने कठीन संघर्ष करके जो हक्क अधिकार प्राप्त किए।उसका फायदा कुछ मुठीभर पढ़े लिखे लोगों ने लिया।लेकिन वो धोखेबाज और नालायक निकले।मुझे मेरा ध्यान मेरे लाखों करोड़ों अनपढ़ लोगों कि ओर देना था।जो गांव देहात में आज भी रोजमर्रा कि कष्टमय जिंदगी जी रहे है।उनके आर्थिक स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं आया हुआ है।लेकिन अब मेरा जीवन बहुत ही सीमित हो चुका है।मेरी इच्छा थी कि मेरी जो किताबें है वो सारी किताबें मेरे जीवन कार्य में ही प्रकाशित हो।लेकिन इसके के लिए मैं असमर्थ असहाय हूं।इसकी मैं कल्पना भी करता हूं तो भयानक दुःखदायक लगता है।मुझे विश्वास था कि जो मेरे साथी सहयोगी है वो लोगों मूवमेंट चलाएंगे।लेकिन वो आज नेतृत्व और सत्ता के लिए एक दूसरे के विरोध में झगड़ा कर रहे है।उनके मनमस्तिष्क में थोड़ा भी नहीं है कि उनके ऊपर कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।
नानकचंद तू मेरे लोगों को बता दे कि उनके लिए जो मैंने अधिकार प्राप्त किए है वो अकेले के बलबूतेपर किए है।और यह हक्क अधिकार प्राप्त करने के लिए कष्टमय संघर्ष और दिक्कतों का सामना मुझे करना पड़ा है।वर्तपत्रद्वारा मेरे ऊपर निरंतर टिक्का टिपण्णी होती रही।निरंतर मेरे विरोधक के विरूद्ध मैंने संघर्ष किया।लेकिन मेरे ही लोगों ने उनके स्वार्थ के लिए मेरे साथ विश्वासघात किया।उनके विरोध में भी मैंने दो हाथ किए।
यह जो कारवां मैंने खड़ा किया और यहां तक लाने के लिए जो संघर्ष किया है।ऐसा ही इस कारवां को उन्होंने आगे बढ़ा ना चाहिए ऐसा मुझे लगता है।बहुत सारी दिक्कतें, अवरोध,संकट आएंगे।लेकिन कारवां रुकना नहीं चाहिए।उनको अगर सम्मानजनक जीवन जीना है तो आनेवाले संकटों की चुनौतियां स्वीकार करने कि उनके अंदर साहस,धैर्य चाहिए।अगर मेरे लोगों इस कारवां को आगे बढ़ाने में असमर्थ हो।तो किसी भी परिस्थिति में इस कारवां को पीछे मत जाने देना।यही मेरा संदेश है।और यह संदेश मैं बहुत ही गंभीरतापूर्वक दे रहा हूँ।और इस गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा ऐसा मुझे विश्वास लगता है।
(डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर: अनुभव और यादें लेखक-नानकचंद रत्तू)