02/01/2016
� वाह रे जमाने तेरी हद हो गई, ��
� बीवी के आगे माँ रद्द हो गई !�
� बड़ी मेहनत से जिसने पाला,�
� आज वो मोहताज हो गई !�
� और कल की छोकरी, �
� तेरी सरताज हो गई !�
� बीवी हमदर्द और माँ सरदर्द हो गई !�
� �वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!��
� पेट पर सुलाने वाली, �
� पैरों में सो रही !�
� बीवी के लिए लिम्का,�
� माँ पानी को रो रही !�
� सुनता नहीं कोई, वो आवाज देते सो गई !�
� वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!��
� माँ मॉजती बर्तन, �
� वो सजती संवरती है !�
� अभी निपटी ना बुढ़िया तू , �
� उस पर बरसती है !�
� अरे दुनिया को आई मौत, �
� तेरी कहाँ गुम हो गई !�
��वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!��
�अरे जिसकी कोख में पला, �
� अब उसकी छाया बुरी लगती,�
� बैठ होण्डा पे महबूबा, �
� कन्धे पर हाथ जो रखती,�
�वो यादें अतीत की, �
� वो मोहब्बतें माँ की, सब रद्द हो गई !�
��वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!��
� बेबस हुई माँ अब, �
� दिए टुकड़ो पर पलती है,�
�अतीत को याद कर, �
� तेरा प्यार पाने को मचलती है !�
� अरे मुसीबत जिसने उठाई, वो खुद मुसीबत
हो गई !�
� �वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!��
� मां तो जन्नत का फूल है,��
प्यार करना उसका उसूल है ,�
�दुनिया की मोह्ब्बत फिजूल है ,�
� मां की हर दुआ कबूल है ,�
� मां को नाराज करना इंसान तेरी भूल है ,�
� मां के कदमो की मिट्टी जन्नत की धूल है ,�
�अगर अपनी मां से है प्यार तो �
� अपने सभी दोस्तो को सेन्ड करे वरना ,�
� �ये मेसेज आपके लिये फिजूल है.��