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गोमेद रत्न धारण करने से होता है चमत्कारिक लाभ ... और सफलता राजयोग बनाता है गोमेद रत्न ..कुंडली में निम्‍न बातें हो तो धा...
07/11/2024

गोमेद रत्न धारण करने से होता है चमत्कारिक लाभ ...

और सफलता राजयोग बनाता है गोमेद रत्न ..

कुंडली में निम्‍न बातें हो तो धारण कर सकते हैं

गोमेद किसी व्‍यक्‍ति की राशि या लग्‍न मिथुन, तुला, कुंभ या वृष हो तो ऐसे लोगों को गोमेद अवश्‍य पहनना चाहिए।

राहू कुंडली में यदि केंद्र में विराजमान हो अर्थात 1,4,7, 10 भाव में तो गोमेद अवश्‍य धारण करना चाहिए।

अगर राहूं दूसरे, तीसरे, नौवे या ग्‍यारवें भाव में राहू हो तो भी गोमेद धारण करना बहुत लाभदायक होगा।

राहू अगर अपनी राशि से छठे या आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद पहनना हितकर होता है।

यदि राहू शुभ भावों का स्‍वामी हो और स्‍वयं छठें या आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद धारण करना लाभदायक होता है।

राहू अगर अपनी नीच राशि अर्थात धनु में हो तो गोमेद पहनना चाहिए।

राहू मकर राशि का स्‍वामी है। अत: मकर राशि वाले लोगों के लिए भी गोमेद धारण करना लाभ फलों को बढ़ाता है।

राहू अगर शुभ भाव का स्‍वामी है और सूर्य के साथ युति बनाए या दृष्‍ट हो अथवा सिंह राशि में स्थित हो तो गोमेद धारण करना चाहिए।

राहू राजनीति का मारकेश है। अत: जो राजनीति में सक्रीय हैं या सक्रीय होना चाहते हैं उनके लिए गोमेद धारण करना बहुत आवश्‍यक है।

शुक्र, बुध के साथ अगर राहू की युति हो रही हो तो गोमेद पहनना चाहिए।

वकालत, न्‍याय और राज-काज से संबंधित कार्यों में बेहतर करने के लिए भी गोमेद पहनना चाहिए।
गोमेद रत्न का प्रयोग

गोमेद को शनिवार को चांदी या अष्‍टधातु में जड़वाकर शाम के समय विधिनुसार उसकी उपासना के बाद बीच की अंगुली में धारण करना चाहिए।

गोमेद का वजन 6 रत्‍ती से कम नहीं होना चाहिए। इसे पहनने से पहले ऊं रां राहवे नम: का मंत्र 108 बार जप करके गोमेद को जागृत करके पहनना चाहिए।

गोमेद रत्न का विकल्‍प ...
गोमेद बहुत सस्‍ता रत्‍न है लेकिन यह आवश्‍यक नहीं है कि सभी को सही गोमेद जरूरत के समय पर ही प्राप्‍त हो जाए। इसलिए इसके दो उपरत्‍न हैं जिन्‍हें गोमेद के बदले धारण किया जा सकता है।

पहला उपरत्‍न है तुरसा और दूसरा साफी। इसके अलावा गोमेद के रंग का अकीक भी गोमेद के स्‍थान पर पहना जा सकता है।

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किस राशि को पहनना चाहिए कौन से रत्न ...मेष और वृश्चिक - मूंगा रत्नमिथुन और कन्या राशि - मोतीसिंह राशि - माणिक रत्नशनि कु...
06/11/2024

किस राशि को पहनना चाहिए कौन से रत्न ...

मेष और वृश्चिक - मूंगा रत्न
मिथुन और कन्या राशि - मोती
सिंह राशि - माणिक रत्न
शनि कुंभ और मकर राशि - नीलम
वृषभ और तुला राशि - हीरा
धनु और मीन राशि - पुखराज

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स्फटिक की माला के चमत्कारी फायदे ? कहते हैं कि इसे पहनने से किसी भी प्रकार का भय और घबराहट नहीं रहती है।2. इसकी माला धार...
05/11/2024

स्फटिक की माला के चमत्कारी फायदे ?

कहते हैं कि इसे पहनने से किसी भी प्रकार का भय

और घबराहट नहीं रहती है।

2. इसकी माला धारण करने से मन में सुख, शांति और धैर्य बना रहता है।

3.ज्योतिष अनुसार इसे धारण करने से धन, संपत्ति, रूप, बल, वीर्य और यश प्राप्त होता है।

4.माना जाता है कि इसे धारण करने से भूत-प्रेत आदि की बाधा से भी मुक्ति मिल जाती है।

5.इसकी माला से किसी मंत्र का जप करने से वह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।

6.इससे सोच-समझ में तेजी और दिमाग का विकास होने लगता है।

7.इसकी भस्म से ज्वर, पित्त-विकार, निर्बलता तथा रक्त विकार जैसी व्याधियां दूर होती है।

8.स्फटिक किसी भी पुरुष या स्त्री को एकदम स्वस्थ रखता है।

9.स्फटिक की माला को भगवती लक्ष्मी का रूप माना जाता है।

10.स्फटिक की माला धारण करने से शुक्र ग्रह दोष दूर होता है।

11.स्फटिक के उपयोग से दु:ख और दारिद्र नष्ट होता है।

12.यह पाप का नाशक है। पुण्य का उदय होता है।

13.सोमवार को स्फटिक माला धारण करने से मन में पूर्णत: शांति की अनुभूति होती है एवं सिरदर्द नहीं होता।

14.शनिवार को स्फटिक माला धारण करने से रक्त से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है।

15.अत्यधिक बुखार होने की स्थिति में स्फटिक माला को पानी में धोकर कुछ देर नाभि पर रखने से बुखार कम होता है एवं आराम मिलता है।

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खूबसूरत और बेशकीमती रत्न हीरे के ये 8 विशेषताए ...हीरा हल्के रंग की नीलिमा लिए श्वेत वर्ण का या नीलीया लाल किरण निःसारित...
04/11/2024

खूबसूरत और बेशकीमती रत्न हीरे के ये 8 विशेषताए ...

हीरा हल्के रंग की नीलिमा लिए श्वेत वर्ण का या नीली

या लाल किरण निःसारित करते हुए सफेद वर्ण का हो या काले बिन्दुओं से मुक्त हो, वह उत्कृष्ट होता है।

साथ ही इसमें चिकनापन, सुंदर चमक, अंधेरे में जुगनू की तरह चमकने वाला, सुंदर कठोर व अच्छे वर्णयुक्त हो वह श्रेष्ठ हीरा है, इस तरह असली उत्कृष्ट हीरे की पहचान की जाती है।

हीरे के नौ विशेष गुण :

1 प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हीरा पानी पर तैरता है, इसलिए इसका नाम वारितर भी रखा गया है।

2 हीरा बिजली का कुचालक होता है, अतः हाथ में हीरे की अंगूठी पहनने पर बिजली के झटके का प्रभाव नहीं पड़ता है।

3 हीरे की चमक स्थायी व ताप में शीतल होती है।

4 उन्नतोदर ताल द्वारा सूर्य की किरणें एकत्रित कर हीरे पर डालने पर जल जाता है।

5 हीरे को अत्यधिक गर्म करने पर रंग हल्का हो जाता है, परन्तु शीतल होने पर रंग पुनः पूर्ववत्‌ हो जाता है।

6 अंधकार में अच्छे हीरे के प्रकाश में पढ़ा जा सकता है।

7 हीरा कठोर होते हुए भी भंगुर है तथा हाथ से नीचे गिरने पर टूट जाता है।

8 हीरा सबसे अधिक कठोर होता है, जिससे किसी भी वस्तु से हीरे पर रगड़ या खरोंच का निशान या रगड़ने का भी निशान नहीं पड़ता।

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पुखराज रत्न के चमत्कारिक लाभ खास लोगों के लिए ...हमने यह खास रत्न बहुत सारे लोगों में प्रयोग किया है और लाभ लिया हुआ रत्...
30/10/2024

पुखराज रत्न के चमत्कारिक लाभ खास लोगों के लिए ...

हमने यह खास रत्न बहुत सारे लोगों में प्रयोग किया है

और लाभ लिया हुआ रत्ना है आप भी अपने जीवन में कुछ करना चाहते हैं

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क्या है पन्ना रतन धारण करने की सही विधि ...पन्ना को सोने, चांदी अथवा प्लैटिनम की अंगूठी में जड़वाकर बुधवार के दिन सुबह द...
30/10/2024

क्या है पन्ना रतन धारण करने की सही विधि ...

पन्ना को सोने, चांदी अथवा प्लैटिनम की अंगूठी में जड़वाकर बुधवार के दिन सुबह दूध से स्नान करवाकर छोटी उंगली में धारण करना चाहिए।

बुधवार के दिन अश्लेषा, रेवती, पूर्वाफाल्गुनी अथवा पुष्य नक्षत्र हो तो और उत्तम रहता है।
इसे धारण करने से पहले 'ओम ब्रां, ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' मंत्र का 9,000 बार जप करना चाहिए
इसके बाद धारण करें तो सही रहता है

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बार-बार पड़ते हैं बीमार तो पहनें मूंगा रत्न, जानें इसके स्वास्थ्य लाभ ...वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान...
28/10/2024

बार-बार पड़ते हैं बीमार तो पहनें मूंगा रत्न, जानें इसके स्वास्थ्य लाभ ...

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान है।

वैसे तो मंगल का अर्थ कल्याणकारी होता है

लेकिन जब मंगल ग्रह के संदर्भ में इसका प्रयोग किया जाता है तो इसका एक अर्थ नकारात्मक भी हो सकता है।

यह अस्थि रोग विशेषज्ञ, खून की जांच, ब्लड से संबंधित लेबोरेट्री का प्रतिनिधित्व करता है। इसके नकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति को नेत्र रोग, वात रोग, गठिया, फोड़े-फुंसी और किडनी स्टोन हो सकता है।

इसके अलावा जोड़े में दर्द, जोड़ों का काम करना बंद कर देना, चोट लगना या जख़्म हो जाना, बार-बार बुखार होना, शरीर में कंपन होना, शरीर की शक्ति कमज़ोर होना आदि स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

मंगल के दुष्प्रभाव से अधिकतर रक्त संबंधी बीमारियां, जैसे कि रक्त की कमी या अशुद्धि हो जाती है। इसके नकारात्मक प्रभाव से महिलाओँ में मासिक धर्म और प्रजनन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।

मंगल को साहस, ऊर्जा, बल, विस्फोटक सामग्री के व्यवसाय, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, पहलवानी, सुरक्षा के क्षेत्र से संबंधित कार्य करने वाले (जैसे कि सेना, पुलिस),

राजनीति, ईंट-भट्टे के कार्य, ज़मीन-प्रोपर्टी से संबंधित कार्य, बिल्डर व बिल्डिंग मटिरीयल सप्लायर का कारक ग्रह माना जाता है।

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो इसका निवारण मूंगा रत्न धारण करके किया जा सकता है। मूंगा मंगल का रत्न है।

रत्नशास्त्र के अनुसार मंगल को प्रबल करने के लिए इस रत्न को धारण करना सबसे लाभकारी होता है। ख़ासकर स्त्री संबंधी रोगों से मुक्ति के लिए यह रत्न वरदान है।

तो, आइए, आपको बताते हैं मूंगा रत्न क्या है? जानिए, इसके स्वास्थ्य एवं ज्योतिषीय लाभ और इसे धारण करने की विधि...

मूंगा रत्न क्या है?
मूंगा समुद्र की गहराई में पाई जानी वाली वनस्पति है जिसे मंगल का रत्न कहा जाता है। पानी से बाहर आने के बाद हवा के संपर्क में आने से यह कठोर हो जाता है।

यह लाल रंग के अलावा अन्य रंगों में भी मिलता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल पापी होकर अशुभ फल दे रहा हो,

उसे नियंत्रित करने के लिए यह रत्न धारण करना चाहिए। इसके धारण करने के अनेक लाभ हैं लेकिन यह रत्न हर किसी को नहीं धारण करना चाहिए।

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तकनीकी संरचना
समुद्र की गहराई में पाया जाने वाला मूंगा रत्न मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट होता है जिसका रासायनिक सूत्र CaCO3 होता है। मोह्स स्केल (Mohs Scale) पर इसकी कठोरता 4 से कम होती है

और इसका विशेष घनत्व 2.68 होता है। मूंगा की विशेषता इसका लाल रंग है जिसका इस्तेमाल आभूषणों में किया जाता है। सबसे बेहतर क्वालिटी के मूंगा रत्न श्रीलंका में पाए जाते हैं।

इसके अलावा मूंगा रत्न ब्राज़ील, भारत और अमेरिका समेत आदि कई देशों में भी पाए जाते हैं।

मूंगा रत्न पहनने के लाभ
मूंगा रत्न धारण करने से कई लाभ होते हैं। इसे धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है, रक्त संबंधी बीमारियों से छुटकारा मिलता है, दुश्मनों और बुरी आत्माओं से बचाव होता है, शारीरिक और मानसिक शक्ति बढ़ती है।

यह रत्न मंगल से संबंधित सभी दोषों को दूर करता है। इसके अलावा मूंगा पहनने से नेतृत्व क्षमता का विकास होता है जिससे व्यक्ति जीवन की कड़ी चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनता है। इससे जीवन में प्रेम और सुख-समृद्धि आती है।

मूंगा रत्न पहनने के स्वास्थ्य लाभ
मूंगा रत्न निम्न स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में सहायक है:

यह रत्न रक्त और रक्त की अशुद्धि और इससे संबंधित विभिन्न बीमारियों से मुक्ति पाने में मदद करता है। इससे रत्न को धारण करने से उच्च रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।

यह पेट दर्द, सर्दी और खांसी से बचाने में मदद करता है।
यह अस्थि रोग, जैसे कि बोन मैरो और सिर की बीमारियों से बचाव में लाभकारी है।

यह रत्न शारीरिक शक्ति और ह़ड्डियों को मज़बूत बनाने में सहायक है।

इसके अलावा यह कैंसर, ब्रेन ट्यूमर जैसी घातक बीमारियों में भी मददगार है।

यदि किसी को बवासीर या गंजेपन की समस्या है तो उसे हाथ में यह रत्न धारण करने से लाभ होता है।

त्वचा संबंधी रोगों, गला, हृदय, गठिया और श्वास संबंधी रोगों से निजात दिलाने में यह रत्न बेहद फ़ायदेमंद है।
इस रत्न को पहनने से व्यक्ति का आलस दूर भागता है।

वह अपने कार्य को गंभीरता से लेने लगता है।
मिर्गी या पीलिया रोगियों के लिए मूंगा रत्न अत्यंत लाभकारी है।

उदासी या मानसिक तनाव पर काबू पाने के लिए मूंगा रत्न अवश्य धारण करना चाहिए।
मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों को यह रत्न पहनने से विशेष लाभ होता है।

स्त्री रोगों से मुक्ति के लिए वरदान है यह रत्न
महिलाओं के लिए मूंगा रत्न किसी वरदान से कम नहीं है। यह रत्न पहनने से महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी निम्न लाभ होते हैं:

यह रत्न स्त्रियों में रक्त की कमी (एनीमिया), रक्तचाप और मासिक धर्म संबंधी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।

ऐसा माना जाता है कि यदि गर्भवती महिला मूंगा रत्न धारण करती है तो पहले 3 महीने में गर्भपात होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

यह रत्न स्त्री संबंधी रोगों जैसे कि ब्रेस्ट कैंसर और प्रजनन संबंधी रोगों में मददगार है।
बच्चों के लिए मूंगा रत्न के लाभ
मूंगा रत्न धारण करने से बच्चों को निम्न लाभ होते हैं:

यह रत्न पहनने से बच्चों को कुपोषण और पेट दर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं नहीं होतीं।
इस रत्न को सोने/चांदी या तांबे में पहनने से भूत-प्रेत और बाहरी हवा का भय नहीं रहता जिससे बच्चों को नज़र नहीं लगती।

विद्यार्थियों के लिए भी यह रत्न बहुत फायदेमंद होता है। आत्मविश्वास में वृद्धि और विचारों में सकारात्मकता लाने के लिए वे यह रत्न धारण कर सकते हैं।

मूंगा रत्न के ज्योतिषीय लाभ
रत्नशास्त्र के अनुसार मूंगा रत्न से निम्न ज्योतिषीय समस्याओँ का समाधान संभव है:

मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति को मूंगा रत्न पहनने से लाभ होता है। इसलिए अगर मंगल दोष के कारण आपके विवाह में बाधा आ रही हो तो यह रत्न अवश्य धारण करें।

अगर कुंडली में राहु या शनि के साथ कहीं भी मंगल बैठा हो तो आपको यह रत्न धारण करने से लाभ होगा।
प्रथम भाव में यदि मंगल बैठा हो तो भी मूंगा रत्न धारण करना चाहिए।

मंगल अगर तीसरे भाव में बैठा हो तो भाई-बहनों से क्लेश रहता है। ऐसी स्थिति में भी मूंगा रत्न धारण करना चाहिए। इससे रिश्तों में मधुरता आती है।

चौथे भाव में मंगल हो तो जीवनसाथी का स्वास्थ्य खराब रहता है। ऐसी स्थिति में भी मूंगा धारण करना चाहिए।
कर्ज़ की समस्या से मुक्ति पाने के लिए यह रत्न बहुत अधिक फ़ायदेमंद है। इसलिए कर्ज़ के बोझ से परेशान लोग यह रत्न धारण करें तो लाभ होगा।

मूंगा पहनने से मन में ईष्या-द्वेष की भावना नहीं आती। साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
पुलिस, आर्मी, डाक्टर, प्रॉपर्टी का काम करने वाले, हथियार निर्माण करने वाले, सर्जन, कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर इन्जीनियर आदि लोगों को मूंगा पहनने से विशेष लाभ होता है।

मूंगा रत्न धारण करने की विधि
मंगल ग्रह का रत्न होने के कारण इसे मंगलवार को धारण किया जाता है। मूंगा को सोने, चांदी या तांबे की अंगूठी में डालकर पहना जा सकता है।

अंगूठी में मूंगा का वज़न कम से कम 6 रत्ती का होना चाहिए। आप इसे तर्जनी, मध्यमा या अनामिका अंगुली में धारण कर सकते हैं।

मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और लाल आसन पर बैठ जाएं। इस रत्न की अंगूठी पर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद ‘’ऊँ भौं भौमाय नम:’’ मंत्र का 108 बार जाप करें और फ़िर इसे धारण करें।

मूंगा धारण करने संबंधी सावधानी
मूंगा रत्न मंगल के शुभ प्रभाव को बढ़ाने और उसके प्रभाव को नष्ट करने के लिए पहना जाता है। लेकिन इस रत्न को अगर किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी की सलाह के बिना धारण किया जाए तो इसका आप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है:

बिना सलाह के धारण करने से आपको स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। इनमें रक्त संबंधी विकार होने की संभावना अधिक रहती है।

आपके वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ सकती हैं।
आप अतिआत्मविश्वास का शिकार हो सकते हैं।
दूसरों के प्रति आप में ईष्या और द्वेष की भावना आ सकती है।

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लाल गुंजा माला के चमत्कारी फायदे ...• लाल गुंजा माला के शुभ प्रभाव से भाग्‍य में वृद्धि होती है। घर में सुख-शांति का आगम...
11/08/2024

लाल गुंजा माला के चमत्कारी फायदे ...

• लाल गुंजा माला के शुभ प्रभाव से भाग्‍य में वृद्धि होती है। घर में सुख-शांति का आगमन होता है।

• लाल गुंजा माला को धारण करने और इसका प्रयोग करने से धन की प्राप्‍ति होती है और धन आगमन के मार्ग खुलते है

• व्यापार में वृद्धि के लिए भी लाल गुंजा माला प्रभावकारी है। नौकरी व्यवसाय में आनेवाली रूकावटे भी इस गुंजा के प्रभाव से ख़त्म होती है।

• कर्ज से मुक्‍ति पाने के लिए इस माला को अवश्य धारण करना चाहिए ।

• तांत्रिक क्रियाओं के दौरान गुंजा पहनने से आपके विरोधियों को शांत और वश में किया जाता है ।

• लाल गुंजा माला को पहनने से काला जादू और बुरी नज़र से बचने के लिए भी पहना जाता है ।

• लाल गुंजा की माला पहनने से घर परिवार में माता लक्ष्मी की कृपा सदेव बनी रहती है ।

• लाल गुंजा माला पहनने से समाज में मान सम्मान प्राप्त होता है जीवन में उन्नति होती है

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प्रेम विवाह लव मैरिज अरेंज मैरिज या वशीकरण आप किसी को करना चाहते हैं तो ओपल धारण करें...ओपल रत्न पति-पत्नी के विवादों को...
09/05/2024

प्रेम विवाह लव मैरिज अरेंज मैरिज या वशीकरण आप किसी को करना चाहते हैं तो ओपल धारण करें...

ओपल रत्न पति-पत्नी के विवादों को पल भर में दूर करने वाला बहुत ही चमत्कारिक रत्न है। शुक्र का सम्बन्ध विवाह से होता है, ओपल शुक्र ग्रह के प्रभाव को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। हिंदी में ओपल को दूधिया पत्थर के नाम से भी जाना जाता है।

ओपल तुला, वृषभ, लग्न वाले जातक या जिसकी कुंडली में शुक्र फलदायी नहीं होता, शुक्र का बल कम होता है, ऐसे जातक के लिए रत्न धारण करना बहुत ही लाभकारी होता है।

ओपल पहनने से पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका के बीच यदि खराब सम्बन्ध है, तो जल्दी से जल्दी ओपल धारण करना चाहिए। यह रत्न मान-सम्मान में वृद्धि करता है तथा उलझे हुए दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम-संबंधों में मधुरता लाता है।

ओपल पत्थर क्या है?
ओपल पत्थर एक प्रकार के धातु से बना जैल है, जो बहुत ही कम तापमान पर चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, आग्नेय चट्टान, मार्ल और बेसाल्ट जैसे चट्टान की दरारों में इकठ्ठा होने से बनता है।

यह एक पारदर्शी रत्न है। यह सभी रंगों में सबसे रंगीन है और इसके इन्द्रधनुषी रंगों के कारण ये सभी रत्नों में सबसे अधिक सुन्दर दिखाई देता है। दाम्पत्य जीवन के सुख के लिए दूधिया रंग का ओपल पत्थर सबसे लाभदायक होता है।

ओपल का मुख्य स्रोत ...
ओपल मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया अकेला ही दुनिया का लगभग 95% ओपल पैदा करता है।

अन्य देशों में भी ओपल रत्न पाया जाता है, मैक्सिको, ब्राजील,ऑस्ट्रेलिया तथा दक्षिण अफ्रीका में भी ओपल रत्न का उत्पादन होता है।

ओपल रत्न किसे धारण करना चाहिए?
ज्योतिष के अनुसार ओपल रत्न शुक्र (Venus) ग्रह के प्रभाव को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। जिस जातक की जन्म कुंडली में तुला तथा वृषभ लग्न हो या जिसकी जन्म राशि तुला या वृषभ हो वह जातक ओपल रत्न बिना संकोच धारण कर सकता है।

जिस व्यक्ति की कुंडली में शुक्र बलवान नहीं है उस जातक को भी ओपल रत्न धारण कर अपने शुक्र को मजबूत करना चाहिए। कर्क और मकर लग्न की कुंडली वाले जातक भी ओपल रत्न धारण कर सकते है।

ओपल रत्न पहनने से लाभ
अधिकतर मामलों में ओपल रत्न धारण करने के कारण महिलाओं तथा पुरुषों के निजी जीवन में प्यार और रोमांस को पुनर्जीवित किया है।

दाम्पत्य जीवन में स्थिरता लाता है यह रत्न
दाम्पत्य जीवन में या प्रेम संबंधों में यदि अकारण कलह, दरार, अनबन या अलगाव या तलाक की स्थिति उत्पन्न हो रही हो तो उस स्थिति में परेशान शादीशुदा जीवन में

स्थिरता लाने के लिए ओपल रत्न धारण किया जाता है, इसे धारण करने से उत्पन्न विवादों को शीघ्र ही दूर किया जा सकता है।

स्वास्थ्यवर्धक ...
ओपल आँखों से सम्बंधित रोग, मानसिक तनाव, उदासीनता, आलस्य, लाल रक्त कणिकाओं से सम्बन्धित रोगों से राहत दिलाता है। यौन शक्ति को विकसित करता है, क्योंकि यह शुक्र ग्रह का कारक है

और शुक्र वीर्य का कारक है। यह शारीरिक तंदरुस्ती भी प्रदान करता है। यह रत्न आपके शरीर के हार्मोनल स्राव के संतुलन को बनाएं रखने में मदद करता है। गुर्दे की बीमारी को भी यह रत्न ठीक करता है।

आकर्षण शक्ति में वृद्धि
इस रत्न के प्रभाव से आकर्षण शक्ति का विकास होता है तथा सौन्दर्य शक्ति में भी वृद्धि होती है। अधिकतर मामलों में यह रत्न बहुत कारगर सिद्ध हुआ है।

कलात्मक क्षेत्रों में लाभकारक
संगीत, चित्रकला, नृत्य, अभिनेता, अभिनेत्री, टीवी, फिल्म, थिएटर, कम्पूटर, आईटी से सम्बंधित काम करने वाले लोगों के लिए यह रत्न धारण करना बहुत ही लाभप्रद होता है।

इन व्यापारियों के लिए फायदेमंद
ओपल रत्न उन लोगों को जो कपडे, फैशन, गहने, कलाकृतियों, महंगे, वस्त्र, कारें, आदि के सौदेबाजी से जुड़े रहते है या वो लोग जो आयात-निर्यात का व्यापार करते है, उन्हें ओपल धारण करने से लाभ होता है।

ओपल पहनने की विधि
दिन- शुक्रवार
होरा- शुक्र
पक्ष- शुक्ल
नक्षत्र -भरणी, पूर्व फाल्गुन, पूर्व अषाढ़ा

ओपल रत्न शुक्रवार के दिन या शुक्र की होरा में धारण किया जाता है। ओपल सीधे हाथ की तर्जनी अंगुली में धारण करते है। इस रत्न को धारण करते समय शुक्र देव को याद करते हुए 108 बार

मंत्र – ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः का जाप करना चाहिए, उसके बाद विधिवत संकल्पपूर्वक धूप, दीप मिष्टान्न से पूजा अर्चना करके अंगूठी को पहनना चाहिए।

हमसे क्‍यों लें
इस रत्न जड़ित अंगूठी को हमारे अनुभवी ज्योतिषी पंडित ओम शास्त्री जी द्वारा अभिमंत्रित किया गया है, जिससे यह आपको जल्‍द ही शुभ फल दे।

इस रत्न के साथ सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा जो इस रत्‍न के ओरिजनल होने का प्रमाण है।
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II रत्न विशेषज्ञ ओम II
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05/05/2024

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