18/08/2026
संविधान चाहे किसी भी देश का हो, उसे उस देश की भूमि का प्रधान कानून माना जाता है। अन्य जितने भी अथवा प्रकार के कानून चाहें, सिविल हों, क्रिमनल हों, उनका प्रावधान संविधान के साथ सुसंगत होना आवश्यक होता है।
भारतवर्ष में स्वतन्त्र होने के पूर्व ही 2 सितम्बर, 1946 को, अंतरिम सरकार का गठन हुआ जिसके प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी बने। डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने कानून मंत्री का पद संभाला। लॉर्ड माउंट बेटन योजना के अनुसार, संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा का गठन हुआ। संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव प्रादेशिक विधानसभाओं द्वारा हुआ उसमें प्रिंसली स्टेटस के मनोनीत सदस्य भी थे। सर्वप्रथम डॉ. बी.आर. आंबेडकर अविभाजित बंगाल से चुनकर संविधान सभा में आये थे। 15 अगस्त, 1947 को देश स्वतंत्र हुआ और बंगाल का भी विभाजन हुआ । इस वजह से डॉ. बी.आर. आंबेडकर का निर्वाचन क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान में चला गया, इसलिए बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर की सदस्यता समाप्त हो गई। फिर उनको बम्बई प्रादेशिक विधानसभा से चुना गया। देश की सेवा करने का उन्हें यह स्वर्ण अवसर मिला। 21 अगस्त, 1947 को संविधान सभा ने संविधान मसौदा समिती का गठन किया जिसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. आंबेडकर को चुना गया। मसौदा समिति ने मसौदा तैयार किया और संविधान सभा में एक-एक धारा पर चर्चा के लिए 21 फरवरी, 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को सौंप दिया गया। संविधान 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिनों में मुकम्मल हुआ।
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