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1. आपके अवचेतन मन की शक्ति- हमारे अवचेतन मन के वे विचार, जो हम अवचेतन मन में सोचते हैं हमारी मेहनत के कारण सच हो जाते है...
23/06/2026

1. आपके अवचेतन मन की शक्ति- हमारे अवचेतन मन के वे विचार, जो हम अवचेतन मन में सोचते हैं हमारी मेहनत के कारण सच हो जाते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि व्यक्ति की प्रार्थना के कारण उसे वह मिल गया जो वह प्राप्त करना चाहता था, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता। जीवन का नियम वह विश्वास है, जिसे आप संक्षेप में विचार का नियम कह सकते हैं। व्यक्ति जैसा करता है, महसूस करता है और विश्वास करता है, उसी प्रकार उसका मन, शरीर और परिस्थितियां भी वैसी ही बन जाती हैं।

2. तर्कशील जादूगर- मानवता को अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधेरे से निकालकर तर्क के उजाले में वैज्ञानिक दृष्टिकोण देने वाली और 126 जादू ट्रिक के साथ यह किताब।

3. हिप्नोटिज्म क्या क्यों और कैसे?- हिप्नोटिज्म के बारे में संपूर्ण और सही जानकारी देने वाली किताब।

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मिनीमाता चौक, बालमुकुंद स्कूल के पास, तालापारा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

तर्कशील लोगों के लिए 'अब्राहम टी. कोवूर' की दो जरुरी किताबें1984 के काले दौर के समय में मुझे एक एक अंग्रेजी की किताब बि-...
23/06/2026

तर्कशील लोगों के लिए 'अब्राहम टी. कोवूर' की दो जरुरी किताबें

1984 के काले दौर के समय में मुझे एक एक अंग्रेजी की किताब बि-गॉन गॉड-मेन मिली थी। मैंने वह किताब पढ़ी और इसने मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ी। मैंने वह किताब पढ़ने के लिए किसी ऐसे दोस्त अध्यापक को दी जिसके बारे में यह प्रसिद्ध था कि वह तो, 'बाल की खाल' निकालने में माहिर है। उसने वह किताब पढ़ी व कहने लगा कि ''मुझे यह किताब अनुवाद करके दीजिए और मैं यह पांच सौ रूपए में भी खरीद सकता हूं।''

मैंने उससे पूछा कि ''तुम तो किसी चीज पर दो पैसे खर्च नहीं करते। तुम इसपर इतने पैसे खर्च करने के लिए क्यों तैयार हो?'' तो वह कहने लगा, ''मैंने इस किताब से पंद्रह सौ रूपए कमाने हैं।'' वह कैसे ? ''मेरी पत्नी एक ज्योतिषी के चक्कर में पिछले तीन वर्षों से फंसी हुई है और वह मेरे घर में तीन हजार रूपए ठग चूका है। दो वर्ष के उसके उपाय बताए हुए हैं। जिसका मतलब है दो हजार रुपए और ले के जाएगा। इस लिए मैं पांच सौ रुपए खर्च करके पंद्रह सौ रुपए कमा सकता हूं।''

उसके द्वारा कही गई इस बात से प्रभावित होकर ही मैंने इस किताब का अनुवाद सरजीत तलवार की सहायता से कर लिया और '...ते देव पुरुष हार गए' के नाम पर पंजाबी में छापी। किताब छपने पर लोग काफिले बना कर हमारे घरों को आने लगे। इस प्रकार लोगों से सीखकर उनको सिखाने का सिलसिला तर्कशील लहर का विस्तार करता गया। किताब '...और देव पुरुष हार गए' के बाद हमने डॉ. अब्राहम टी. कोवूर जी की दूसरी किताब 'देव और दानव' का भी अनुवाद करके प्रकाशित की। इस किताब को भी पाठकों से भरपूर प्रोत्साहन मिला। पाठकों की मांग पर ही हमने इन किताबों का हिंदी में अनुवाद किया।

-मेघराज मित्तर

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दावा करता है कि वह इस देश का सबसे बड़ा रक्षक, सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त और सबसे बड़ा वफ़ादार है! वह ...
22/06/2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दावा करता है कि वह इस देश का सबसे बड़ा रक्षक, सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त और सबसे बड़ा वफ़ादार है! वह और उसके सहयोगी संगठन तथा व्यक्ति लगातार इस प्रचार में लगे हैं कि आरएसएस और देशभक्ति एक दूसरे के पर्याय हैं।

इस देश में कौन वफ़ादार है और कौन नहीं, इसका प्रमाण पत्र देने का ठेका भी आरएसएस ने अपने सर ले रखा है। जबकि आरएसएस एक ऐसा संगठन है जो न तो स्वतंत्र भारत के संविधान, राष्ट्र-ध्वज (तिरंगा) और प्रजातांत्रिक-धर्मनिर्पेक्ष जैसी राष्ट्रीय मान्यताओं में विश्वास करता है और न ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम से इसका कोई लेना देना था। आरएसएस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपने प्राण निछावर करने वाले शहीदों को कितनी हीन दृष्टि से देखता था यह जान कर किसी भी देशवासी को गुस्सा आना लाज़िमी है।

आरएसएस की सच्चाई को उजागर करने वाली ये 6 महत्वपूर्ण किताबें विशेष छूट के साथ 526 रुपए में

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कहानियों में मुख्य रूप से भलाई, ईमानदारी, और साहस का महत्व बताया गया है, जो बताती हैं कि बुराई का अंजाम हमेशा नुकसानदायक...
22/06/2026

कहानियों में मुख्य रूप से भलाई, ईमानदारी, और साहस का महत्व बताया गया है, जो बताती हैं कि बुराई का अंजाम हमेशा नुकसानदायक होता है।

बच्चों के लिए 'भलाई कर बुराई से डर कजाक लोक कथाएं' विशेष छूट के साथ 162 रुपए में

हार्ड बॉन्डिंग

कुल पृष्ठ 241

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किस तरह पूरे हिन्दुस्तान में विद्रोह हुआ, कैसे विभिन्न धर्मों और जातियों के लोगों ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया और अभूतप...
21/06/2026

किस तरह पूरे हिन्दुस्तान में विद्रोह हुआ, कैसे विभिन्न धर्मों और जातियों के लोगों ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया और अभूतपूर्व क़ुर्बानियां दीं, महिलाओं ने इस विद्रोह में कैसे बेमिसाल बहादुरी और सशक्त नेतृत्व का परिचय दिया, अंग्रेजों ने किन षड्यंत्रों और हथकंडों का इस्तेमाल करके दिल्ली जीती और हिंदुस्तान के जिन राजे-रजवाड़ों ने विद्रोह को कुचलने में अंग्रेजों की सहायता की थी, उन्होंने आजाद हिंदुस्तान पर भी राज किया, ये सब हैरतंअगेज़ सच्चाइयां समकालीन दस्तावेजों की रौशनी में, इस किताब में पेश की गई हैं।

किताब - 1857 की अनकही हैरत अंगेज दास्तानें

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औरंगज़ेब का सचराजनीति का अखाड़ा बनता इतिहासआज़ादी की लड़ाई के दौरान "भारत" का जो विचार उभरा, वह सबको साथ लेकर चलने वाला ...
21/06/2026

औरंगज़ेब का सच

राजनीति का अखाड़ा बनता इतिहास

आज़ादी की लड़ाई के दौरान "भारत" का जो विचार उभरा, वह सबको साथ लेकर चलने वाला था। यह समावेशी विचार ही भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं का मूल वैचारिक आधार था। इसके विपरीत, जो लोग ब्रिटिश शासन के अधीन थे और स्वतंत्रता आंदोलन से अलग-थलग रहे, उनके "राष्ट्रवाद” के विचार धर्म के आवरण में प्रस्तुत किए गए: मुस्लिम राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्रवाद । यह सांप्रदायिक राष्ट्रवाद “दूसरे से नफ़रत” के सिद्धांत पर आधारित था। उन्होंने अपनी राजनीति को इतिहास की एक संकीर्ण समझ पर खड़ा किया। साथ ही, उन्होंने चुनिंदा घटनाओं और कुछ शासकों के कार्यों को उठाकर "दूसरे” को बदनाम करने का काम किया।

विशेष छूट के साथ 270 रुपए में

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गोधरा रेलवे स्टेशन की दुर्घटना के बाद गुजरात के अनेक इलाक़ों में भड़कने वाले भीषण दंगे गुजरात तथा भारत के चेहरे पर कलंक ...
20/06/2026

गोधरा रेलवे स्टेशन की दुर्घटना के बाद गुजरात के अनेक इलाक़ों में भड़कने वाले भीषण दंगे गुजरात तथा भारत के चेहरे पर कलंक हैं। इन भीषण दंगों का कारण पुलिस द्वारा क़ानून-व्यवस्था का पालन न करना था । इस पुस्तक में लेखक ने घटनास्थल पर उपस्थित एक उच्च पुलिस अधिकारी की हैसियत से दंगों और बाद में उन्हें छिपाने तथा अपराधियों को बचाने की सुसंगठित सरकारी कोशिशों का पर्दाफ़ाश किया है। दंगों के दौरान उनकी रिपोर्ट और बाद में दंगों की जाँच करने वाले जाँच आयोग के सामने उनके बयान राजनेताओं, पुलिस तथा नौकरशाहों की घिनौनी भूमिका का पर्दाफ़ाश करते हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष जाँच दल (एस.आई.टी.) के कार्य को उन्होंने निकट से देखा और इस निष्कर्ष तक पहुँचे कि एस.आई.टी. ने अपराधियों को उनके कुकृत्यों का दण्ड दिलाने के बजाय उनको बचाने वाले वकील के तौर पर काम किया।

गुजरात दंगे की असलियत को सामने लाने वाली 2 चर्चित पुस्तकें 555 रुपए में

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सावरकर अब गांधी के समतुल्य राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित हैं, क्योंकि दोनों की तस्वीरें संसद के केंद्रीय-कक्ष में सा...
19/06/2026

सावरकर अब गांधी के समतुल्य राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित हैं, क्योंकि दोनों की तस्वीरें संसद के केंद्रीय-कक्ष में साथ-साथ टंगी हुई नज़र आती हैं। यह इसके बावजूद है कि गांधी की हत्या के लिए देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल ने सावरकर को भी जिम्मेदार ठहराया था। यह पुस्तक सच्चाइयों को मिथकों से अलग करने का प्रयास है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को वास्तविक रूप में सामने रखने की मंशा का नतीजा है।

आज़ादी से पहले के असली सावरकर को जानने के लिए लेखक ने हिंदू महासभा, आरएसएस और भारत सरकार के अभिलेखागारों में उपलब्ध दस्तावेज़ों और सावरकर के साथ कालापानी में .कैद क्रांतिकारियों के संस्मरणों को ही आधार बनाया है। ये सब चकित करते हैं और बताते हैं कि सावरकर ने .कैद से रिहाई के लिए कम से कम 5 बार रहम की भीख मांगी, वे मुस्लिम लीग की तरह द्विराष्ट्र सिद्धांत में विश्वास करते थे, उनके नेतृत्व में हिन्दू महासभा ने 1940 के दशक में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन सरकारें चलाईं।

सावरकर न केवल स्वतंत्रा संग्राम से अलग रहे, बल्कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब सुभाष चन्द्र बोस देश को मुक्त कराने की कोशिश कर रहे थे, उन्होंने खुले तौर पर अंग्रेज़ों की सैनिक तैयारियों में मदद की। वे जातिवाद, नस्लवाद और साम्राज्यवाद के जीवन भर समर्थक रहे, इसे वे 'हिंदुत्व' कहते थे। इस पुस्तक में सावरकर द्वारा लिखित हिंदुत्व के 1923 के मूल संस्करण की समीक्षा भी मौजूद है।

किताब - सावरकर - हिन्दुत्व मिथक और सच

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लगभग 5000 वर्ष पूर्व आर्य ब्राह्मण भारत भूमि पर आक्रमणकारी के रूप में आए। यह विश्वास किया जाता है कि आर्यों का वास्तविक ...
18/06/2026

लगभग 5000 वर्ष पूर्व आर्य ब्राह्मण भारत भूमि पर आक्रमणकारी के रूप में आए। यह विश्वास किया जाता है कि आर्यों का वास्तविक घर मध्य एशिया में था। ये उत्तर-पश्चिम दर्रों से भारत में घुसे थे।

किताब - भारत का इतिहास

विशेष छूट के साथ 315 रुपए में

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भारत! हमारा भारत और हम भारतीय ही नहीं जानते हमें 'भारतीय' क्यों कहा जाता है? किसने और क्यों रखा हमारे देश का नाम भारत? क...
18/06/2026

भारत! हमारा भारत और हम भारतीय ही नहीं जानते हमें 'भारतीय' क्यों कहा जाता है? किसने और क्यों रखा हमारे देश का नाम भारत? किसके वंशज हैं हम? कौन थे हमारे पूर्वज? क्या है हमारा इतिहास? माना अंग्रेज और मुगल विदेशी थे, उनसे हमारा खून का रिश्ता नहीं है मगर नाग, नंद, मौर्य और गुप्तवंशीय* शासक तो भारतीय थे, फिर क्यों हमारे विद्वान इतिहासकार उनसे हमारा खून का रिश्ता नहीं जोड़ पाते? क्यों ऐसा है कि हम भारतीय हमारे किसी भी प्राचीन राजवंश से अपना रक्त संबंध नहीं दर्शा पाते?

किताब - इण्डिका

विशेष छूट के साथ 427 रुपए में

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