Sonu Aata Chakki

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मोटा अन्न!ये उन अनाजों का आटा है जिन्हें हमने आधुनिकता की दौड़ में भोजन में शामिल करना छोड़ दिया है।हम सबको लगता है कि म...
16/10/2024

मोटा अन्न!

ये उन अनाजों का आटा है जिन्हें हमने आधुनिकता की दौड़ में भोजन में शामिल करना छोड़ दिया है।

हम सबको लगता है कि मैदा हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है परन्तु गेहूं की आटा शरीर के लिए ठीक है।

ये बात भी पूरी तरह से ठीक नहीं है।

यदि हमे हमारे शरीर को स्वस्थ रखना है तो भोजन में विविधता अपनाना आवश्यक है जैसे हमारे पुरखे करते थे।

हालाकि उस समय उपज कम होती थी परन्तु उस समय का जो खान पान था वो पोषक तत्व से भरपूर होता था क्योंकि फर्टिलाइजर्स का प्रयोग न के बराबर होता था।

अब यदि फर्टिलाइजर्स न डाली जाय तो उपज ही नहीं मिल पाती है।

खैर मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि आप गेहूं के आटे की रोटी खाइए परन्तु इन सभी प्रकार के आटे की मिलाकर रख लीजिए और इनकी एक मोटी रोटी रोज के खाने में उपयोग करे।

इनके सदस्यों के हिसाब से टुकड़े कर दे और घी गुड़ या चटपटे नमक व सरसों तेल के साथ खाए और खिलाए।

यदि घर के सदस्य रोज में यही रोटी खाने के लिए तैयार हैं तो अच्छी बात है । इस आटे को गेहूं के आटे में मिला दे और रोज की रोटी इनसे ही बनाये।

वर्ना एक मोटी रोटी का हिसाब अपनाए।

01/08/2022

*‼️गेहूं की तोंद*‼️
*गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है अमेरिका के एक हृदय रोग विशेषज्ञ हैं डॉ विलियम डेविस...उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी 2011 में जिसका नाम था "Wheat belly गेंहू की तोंद"...यह पुस्तक अब फूड हेबिट पर लिखी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक बन गई है...पूरे अमेरिका में इन दिनों गेंहू को त्यागने का अभियान चल रहा है...कल यह अभियान यूरोप होते हुये भारत भी आएगा*
*यह पुस्तक ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं और कोई फ़्री में पढ़ना चाहे तो भी मिल सकती है, चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ डेविस का कहना है कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया को अगर मोटापे, डायबिटिज और हृदय रोगों से स्थाई मुक्ति चाहिए तो उन्हें पुराने भारतीयों की तरह ज्वार, बाजरा, रागी, चना, मटर, कोदरा, जो, सावां, कांगनी ही खाना चाहिये गेंहू नहीं जबकि यहां भारत का हाल यह है कि 1980 के बाद से लगातार सुबह शाम गेंहू खा खाकर हम महज 40 वर्षों में मोटापे और डायबिटिज के मामले में दुनिया की राजधानी बन चुके हैं...गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है. यह मध्य एशिया और अमेरिका की फसल मानी जाती है और आक्रांताओ के भारत आने के साथ यह अनाज भारत आया था...उससे पहले भारत में जौ की रोटी बहुत लोकप्रिय थी और मौसम अनुसार मक्का, बाजरा, ज्वार आदि...भारतीयों के मांगलिक कार्यों में भी जौ अथवा चावल (अक्षत) ही चढाए जाते रहे हैं। प्राचीन ग्रंथों में भी इन्हीं दोनों अनाजों का अधिकतम जगहों पर उल्लेख है..जयपुर निवासी प्रशासनिक अधिकारी नृसिंह जी की बहन विजयकांता भट्ट (81 वर्षीय) अम्मा जी कहती हैं कि 1975-80 तक भी आम भारतीय घरों में *बेजड़* (मिक्स अनाज, Multigrain) की रोटी का प्रचलन था जो धीरे धीरे खतम हो गया। 1980 के पहले आम तौर पर घरों में मेहमान आने या दामाद के आने पर ही गेंहू की रोटी बनती थी और उस पर घी लगाया जाता था, अन्यथा बेजड़ की ही रोटी बनती थी ......आज घरवाले उसी बेजड़ की रोटी को चोखी ढाणी में खाकर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं....हम अक्सर अपने ही परिवारों में बुजुर्गों के लम्बी दूरी पैदल चल सकने, तैरने, दौड़ने, सुदीर्घ जीने, स्वस्थ रहने के किस्से सुनते हैं। वे सब मोटा अनाज ही खाते थे गेंहू नहीं।एक पीढ़ी पहले किसी का मोटा होना आश्चर्य की बात होती थी, *आज 77 प्रतिशत भारतीय ओवरवेट हैं और यह तब है जब इतने ही प्रतिशत भारतीय कुपोषित भी हैं...फ़िर भी 30 पार का हर दूसरा भारतीय अपनी तौंद घटाना चाहता है....*
गेंहू की लोच ही उसे आधुनिक भारत में लोकप्रिय बनाये हुये है क्योंकि इसकी रोटी कम समय और कम आग में आसानी से बन जाती है...पर यह अनाज उतनी आसानी से पचता नहीं है...समय आ गया है कि भारतीयों को अपनी रसोई में 80-90 प्रतिशत अनाज जौ, ज्वार, बाजरे, रागी, मटर, चना, रामदाना आदि को रखना चाहिये और 10-20 प्रतिशत गेंहू को...
*हाल ही कोरोना ने जिन एक लाख लोगों को भारत में लीला है उनमें से डायबिटिज वाले लोगों का प्रतिशत 70 के करीब है...वाकई गेहूं त्यागना ही पड़ेगा.... अन्त में एक बात और भारत के फिटनेस आइकन 54 वर्षीय टॉल डार्क हेंडसम (TDH) मिलिंद सोमन गेंहू नहीं खाते हैं....*
*मात्र बीते 40 बरसों में यह हाल हो गया है तो अब भी नहीं चेतोगे फ़िर अगली पीढ़ी के बच्चे डायबिटिज लेकर ही पैदा होंगे...शेष- समझदार को इशारा ही काफी है।*
*'न्यू यॉर्क टाइम्स' के सबसे अधिक बिकने वाली किताब "Wheat Belly" (गेहूं की तोंद) में से लिया गया अंश।
लेखक: डॉ. विलियम डेविस, M.D.प्रसिद्ध हृदय रोग चिकित्सक......🙏

16/05/2022

*पैकिंग आटा में कीड़े क्यों नही पड़ते ??*
आंखें खोल देने वाला सच --- 😮😳😨

एक प्रयोग करके देखें । गेहूं का आटा पिसवा कर उसे 2 महीने स्टोर करने का प्रयास करें।,आटे में कीड़े पड़ जाना स्वाभाविक हैं, *आप आटा स्टोर नहीं कर पाएंगे।*
फिर ये बड़े बड़े ब्रांड आटा कैसे स्टोर कर पा रहे हैं? यह सोचने वाली बात है।

*एक केमिकल है- बेंजोयलपर ऑक्साइड, जिसे ' फ्लौर इम्प्रूवर ' भी कहा जाता है।* इसकी पेरमिसीबल लिमिट 4 मिलीग्राम है, लेकिन आटा बनाने वाली फर्में 400 मिलीग्राम तक ठोक देती हैं। कारण क्या है? आटा खराब होने से लम्बे समय तक बचा रहे। *बेशक़ उपभोक्ता की किडनी का बैंड बज जाए।*

🙏🏼🙏🏼कोशिश कीजिये खुद सीधे गेहूं खरीदकर अपना आटा पिसवाकर खाएं।

नियमानुसार आटे का समय..
ठंडके दिनों में 30 दिन
गरमी के दिनोंमें 20 दिन
बारिस के दिनोंमें 15 दिन का बताया गया है।

ताजा आटा खाइये, स्वस्थ रहिये...समझदार बनें, अपने लिए पुरुषार्थी बन सभी गेंहू पिसवा कर काम ले।न कोई रेडीमेड थैली का 🙏

*केवल 3 बदलाव कर के देखे :-*

1.) नमक सेंधा प्रयोग करे,
2.) आटा चक्की से पिसवा कर लाये,
3.) पानी मटके का पिये,सुबह गर्म पानी पिये...

आधी बीमारियों से छुटकारा पाएंगे।🌷 🇮🇳 🚩

सभी देशवासियों को हिंदू नव वर्ष व नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
02/04/2022

सभी देशवासियों को हिंदू नव वर्ष व नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

02/11/2021

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