21/05/2019
छोटी दुकानों से सामान खरीदने में है आपका फायदा और बड़ी दुकानों से खरीदने में है आपका नुकसान
कैसे ??...आइये जानते हैं
1) बड़ी दुकानें रिहायशी इलाकों से दूर होती हैं जहाँ तक पहुँचने के लिए आपको डीज़ल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों का उपयोग करना पड़ता है जो आज सस्ते नहीं.......वहीँ छोटी दुकानों के आपके घर के नज़दीक होने के कारण आपको इंधन फूंकने की ज़रूरत नहीं पड़ती......मतलब इंधन में व्यर्थ हो रहे पैसों की बचत l
2) बड़ी दुकानों में घर तक सामान पहुँचाने के सुविधा नहीं होती, मतलब आपको खुद सामान ढोना पड़ता है........वहीँ छोटी दुकानों में आपका सामान आपके घर तक पहुचने की सुविधा होती है ...मतलब समय और श्रम की बचत l
3) बड़ी दुकानों में ज्यादा सामान देखकर आपका मन वो चीज़ें खरीदने का भी होता है जिसकी आपको ज़रूरत नहीं होती जिससे आप फ़िज़ूल खर्ची करते हैं...फिजूलखर्ची मतलब नुकसान ......वहीँ छोटी दुकानों में फिजूलखर्ची करने की गुन्जायिश ना के बराबर होती है क्योंकि आप ज़रूरत के सामान की लिस्ट दुकानदार को देते हैं और वो वही सामान निकालता है जो आपको चाहिए होता है l मतलब फिजूलखर्ची से बचत l
4) बड़ी दुकानों में क्रेडिट और डेबिट कार्ड की सुविधा होने के कारण आप ज़रूरत से ज्यादा खरीददारी करते हैं क्योंकि इससे आपको भ्रम होता है की आपको इतना सामान खरीदने पर पैसे नहीं चुकाने पड़ रहे हैं .....वहीँ छोटी दुकानों में आप पैसा देकर सामान खरीदते हैं और मेहनत से कमाया पैसा जब हाथ से जाता है तो दुःख होता है, इसलिए आप ज़रूरत के अनुसार सामान खरीदते हैं l...फिर से बचत l
5) बड़ी दुकानों में किसी प्रकार के सामान के ख़राब निकलने पर आपको वापस दुकान जाना पड़ता है...मान लीजिये उस ख़राब सामान की कीमत 100 रुपये है और बड़ी दुकान आपके घर से 8 किलोमीटर दूर है, तो आपको एक सामान बदलवाने के लिए 16 किलोमीटर का सफ़र करना पड़ेगा जो आज की तारीख में 100 रुपये से ज्यादा का ही पड़ेगा, ऊपर से सामान बदलवाने के लिए आपको सामान का बिल दिखाना आवश्यक होगा ........वहीँ छोटी दुकान पर दुकानदार आपका सामान हाथों हाथ बदल देगा बिना किसी बिल दिखने के झंझट के क्योंकि आपकी चेहरा ही उसके लिए बिल है l
इसलिए शानपट्टी में आकर मूर्ख ना बनें, अपनी अक्ल लगायें और अपना मेहनत से कमाया हुआ धन बचाएँ..........
छोटी दुकानों पर मिल रहा सामान मिलावटी होता है यह एक प्रायोजित झूठ है, इसलिए बड़ी कम्पनियों के झूठ के मकडजाल से निकलें और स्वदेशी बनें |