31/05/2026
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
कह कबीर दयावान के पास रहे भगवान।
कबीर परमात्मा जी अपनी अमृतवाणी में बताते हैं कि दया ही सच्चे धर्म की जड़ है और अभिमान सभी पापों का कारण है। जिस मनुष्य के हृदय में दया, प्रेम और मानवता होती है, उसके पास स्वयं परमात्मा निवास करते हैं। लेकिन जो व्यक्ति अहंकार और घमंड से भरा होता है, वह परमात्मा की कृपा से दूर हो जाता है।
इसलिए हमें अपने जीवन में दया, नम्रता और सद्भाव अपनाकर सच्चे धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। यही मानव जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।
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