Dark Horse Book

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हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा और शिक्षण संस्थानों को चुनने की बात आज भी जब होती है, तो देश के 33 सैनिक स्कूल अग्रदूत की ...
23/08/2022

हमारे देश में प्राथमिक शिक्षा और शिक्षण संस्थानों को चुनने की बात आज भी जब होती है, तो देश के 33 सैनिक स्कूल अग्रदूत की तरह टिके हुए नज़र आते हैं। और मेरी पढाई भी ऐसे ही एक सैनिक स्कूल, सैनिक स्कूल तिलैया से हुई है। इस स्कूल ने मुझे क्या-क्या दिया है, इसका वर्णन शब्दों में कर पाना बहुत कठिन है लेकिन मैं अपने छोटे भाइयों जो ऐसे ही किसी स्कूल की तैयारी में लगे हुए हैं और उनके माता -पिता जिनके मन में फीस, रैगिंग, छुट्टियाँ आदि तमाम चीज़ों को लेकर ऊहापोह की स्थिति चल रही है, के लिए जरूर कुछ कहना चाहता हूँ। मैंने इस स्कूल में 2001 से 2002 तक पढ़ाई की और यहाँ से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। दसवीं की बोर्ड परीक्षा की बात इसीलिए क्योंकि वह वक़्त अब भी मेरे जहन में चलचित्र की तरह चलता रहता है। मैं, मेरे दोस्त सलिल सरोज, जो अभी लोक सभा सचिवालय में कार्यकारी अधिकारी हैं, के साथ बोर्ड परीक्षा से तीन महीने पहले से रोज़ लगभग 14 घंटे की पढ़ाई साथ-साथ करते और हर विषय के सेम्पल पेपर्स सॉल्व करते और यह सिलसिला लगातार बोर्ड परीक्षा तक चलता रहा। हम दोनों एक साथ पढ़ते तो थे लेकिन प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही थी। वो मेरी कॉपी चेक करता और मैं उसकी और इसका परिणाम यह था कि हम दोनों ने बोर्ड परीक्षा में बेहतरीन अंक हासिल किए। यह स्कूल दोस्ती, प्रतिस्पर्धा, सहयोग, साथ और एकता सिखाने की मिशाल है। यहाँ हर बच्चे को खेल-कूद, पढ़ाई, स्पीच, सामाजिक कार्य जैसे श्रमदान आदि के लिए तैयार करते हुए जीवन की कठिनाओं को पार पाने की तरकीबें भी सिखाई जाती हैं। कमोबेश ऐसी गतिविधियाँ हर स्कूल में होती है।

मेरे स्कूल के जैसे अन्य स्कूल में घटी कहानियों को किताब के रूप में संकलित किया है मेरे दोस्त सलिल सरोज और अमित झा ने। इस किताब में हास्य, रूदन, क्रोध, ईर्ष्या, मोहब्बत हर भावना की कहानियां एक बच्चे की नज़र से लिखी गई गई जो कहीं ना कहीं आपको अपनी कहानी लगेगी। मैंने अपनी प्रति खरीद ली है। आप भी सहयोग करें और इसे खरीदें और अपने दोस्तों को भी बताएँ। किताब आर्डर करने का लिंक

03/11/2021
26/10/2020
20/09/2020


#इब्नेबतूती

होता तो यह है कि बच्चे जब बड़े हो जाते है तो उनके माँ-बाप उनकी शादी कराते हैं लेकिन इस कहानी में थोड़ा-सा उल्टा है, या यूँ कह लीजिए कि पूरी कहानी ही उल्टी है। राघव अवस्थी के मन में एक बार एक उड़ता हुआ ख़याल आया कि अपनी सिंगल मम्मी के लिए एक बढ़िया-सा टिकाऊ बॉयफ्रेंड या पति खोजा जाए। राघव को यह काम जितना आसान लग रहा था, असल में वह उतना ही मुश्किल निकला। इब्नेबतूती आज की कहानी होते हुए भी एक खोए हुए, ठहरे हुए समय की कहानी है। एक लापता हुए रिश्ते की कहानी है। कुछ सुंदर शब्द कभी किसी शब्दकोश में जगह नहीं बना पाते। कुछ सुंदर लोग किसी कहानी का हिस्सा नहीं हो पाते। कुछ बातें किसी जगह दर्ज नहीं हो पातीं। कुछ रास्ते मंज़िल नहीं हो पाते। इब्नेबतूती-उन सभी अधूरी चीज़ों, चिट्ठियों, बातों, मुलाक़ातों, भावनाओं, विचारों, लोगों की कहानी है।.

About the Author
दिव्य प्रकाश दुबे ने चार बेस्ट सेलर किताबें— ‘शर्तें लागू’, ‘मसाला चाय’, ‘मुसाफ़िर Cafe’ और ‘अक्टूबर जंक्शन’—लिखी हैं। ‘स्टोरीबाज़ी’ नाम से कहानियाँ सुनाते हैं। AudibleSUNO एप्प पर उनकी सीरीज ‘पिया मिलन चौक’ सर्वाधिक सुनी जाने वाली सीरीज में से एक है। दस साल कॉरपोरेट दुनिया में मार्केटिंग तथा एक लीडिंग चैनल में कंटेंट एडिटर के रूप में कुछ साल माथापच्ची करने के बाद अब वह एक फ़ुलटाइम लेखक हैं। मुंबई में रहते हैं। कई नए लेखकों के साथ ‘रायटर्स रूम’ के अंतर्गत फ़िल्म, वेब सीरीज़, ऑडियो शो विकसित करते हैं।.

'पानी की दुनिया' असल में एक ऐसे आसामान्य दौर की कहानी है, जिसकी सहज कल्पना भी नहीं की जा सकती, जिसे इनसान की जरूरतों से ...
28/08/2020

'पानी की दुनिया' असल में एक ऐसे आसामान्य दौर की कहानी है, जिसकी सहज कल्पना भी नहीं की जा सकती, जिसे इनसान की जरूरतों से बढकर उसकी कभी न ख़तम होने वाली लालसाओं ने जनम दिया है, जो आपको सोचने पर मजबूर करती है और बताने की कोशिश करती है कि कुछ भूलें ऐसी होती हैं, जो कभी-कभी उन पर विचार करने, या यों कहें कि सुधार का एक मौका भी नहीं देतीं...

'वे लौट आए!'

'कौन?' उसने हैरानी से पूछा।

'इनसान! मां इनसान!'

About the Author
रागा बन्धुओं का यह चौथा उपन्यास है। जातिवाद पर आधारित ‘पंडित दलित’ आपका काफ़ी चर्चित उपन्यास रहा है। इसके अलावा ‘मिख्ला’ और ‘राइट—मैन’ आपके श्रृंखला उपन्यास हैं। 'परिसा' आपका शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास है, जो कि एक नारीवादी रचना है। आप बड़ी से बड़ी कल्पना गढ़ने में माहिर हैं। इसलिए लोग आपको 'फैंटेसी के जादूगर' कहते हैं।

राजस्थान के भरतपुर शहर में एक अनाथाश्रम में अपनी ज़िन्दगी का अधिकांश वक़्त बिताने के बाद, आप अब जयपुर में रह रहे हैं। आप साहित्य की कथा और कथेतर दोनों ही विधाओं में लिखते हैं। लेखन की शुरूआत आपने प्राइमरी स्कूलिंग के वक़्त ही कर दी थी। कहानियां, आत्मकथा और ढेर सारी कविताएं उस दरम्यान आपने रचीं।

समाधान केंद्रित लेखनी के लिए जाने जाने वाले आप दोनों युवा न केवल आज को बारीकी से आलोकित करने वाले साहित्यकार हैं, बल्कि एक बेहतर कल के निर्माण की आवश्यक बुनियाद रखने वाले चिंतक भी हैं। इस क्रम में 'द कॉन्सेप्ट ऑफ ऑर्फोल्ड होम' आपका एक महत्त्वपूर्ण विचार है।

आपकी कविताओं की संवेदना अमूर्त दुनिया की सच्चाई, प्रकृति और समाज के कमज़ोर तबक़े से उठकर आती हैं।

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27/08/2020

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#ब्लिंक #ब्लिंककाहिंदीअनुवाद



#तूरंतनिर्णयलेनेकीशक्ति

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एक कला-विशेषज्ञ नकल को तुरंत पहचान लेता है। एक पुलिसकर्मी जानता है कि कब गोली चलानी है। एक मनोवैज्ञानिक कुछ ही मिनटों में किसी दंपति का भविष्य सटीकता से बता देता है। यह पुस्तक उस क्षण के बारे में है, जब हम बिना कारण जाने कुछ ‘जान’ जाते हैं। यह दर्शाती है कि अपने अंतर्बोध को धार देना विचार करने से जुड़े आपके विचारों को बदल सकता है।

About the Author
लेखक, पत्रकार और सांस्कृतिक टिप्पणीकार मैल्कम ग्लैडवेल का जन्म 1963 में इंग्लैंड में हुआ। इनकी मां जमैका मूल की एवं पिता अंग्रेज गणितज्ञ थे। इनकी परवरिश कैनेडा में हुई और इन्होंने टोरंटो विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक किया। 1987 से 1996 के दौरान वे वॉशिंगटन पोस्ट में पत्रकार रहे, जहां पहले वे विज्ञान से जुड़े विषयों के लेखक थे और बाद में न्यू यॉर्क सिटी के ब्यूरो चीफ़ हो गए। इनकी बेस्टसेलर पुस्तक ‘द टिपिंग पॉइंट’ ने पूरी दुनिया का ध्यान इस सिद्धांत की ओर आकर्षित किया कि उत्साहपूर्वक किए गए छोटे-से बदलावों के अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं।

05/12/2019

Hi everyone please read this book also.

03/10/2017
नीलोत्पल मृनाल साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार-2016 से सम्मानित
25/09/2017

नीलोत्पल मृनाल साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार-2016 से सम्मानित

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