24/08/2023
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गाजीपुर. 20 सेटेलाइट लेकर 22 जून को रॉकेट PSLV-C34 अंतरिक्ष के लिए रवाना हुई। इसके चीफ कंट्रोलर कमलेश कुमार शर्मा की पढ़ाई गांव के स्कूल से शुरू हुई थी। आज इसरो में साइंटिस्ट बनकर ये विश्व में भारत का नाम रोशन कर रहे हैंं। इसके पहले भी 2014 में मंगलयान के सफल प्रक्षेपण में इन्होंने कंट्रोलर की सफल जिम्मेदारी निभाई थी। क्या कहते हैं कमलेश...
- फोन पर कमलेश ने बताया कि इसरो ने पहली बार इतने सारे सेटेलाइट एक साथ लांच किया।
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) शार, श्रीहरिकोटा के दूसरे लांच पैड (एसएलपी) से इन्हें PSLV-C34 से भेजा गया।
- इस रॉकेट की यह 36वीं उड़ान थी। इसके साथ ही यह सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित हो गया।
- इन 20 उपग्रहों का कुल वजन लगभग 1288 किग्रा है।
- इसमें भारत के 3, अमेरिका के 13, कनाडा के 2, जर्मनी और इंडोनेशिया के एक-एक सेटेलाइट हैं।
- 22 जून को लांच हुए प्रमुख उपग्रह कार्टोसेट 2 सीरीज की कंट्रोलिंग में हमलोगों का मुख्य योगदान रहा।
- इसमें मुझे बतौर चीफ कंट्रोलर की जिम्म्ेदारी सौंपी गई।
- इसका नियंत्रण अभी भी बंगलुरू स्थित कंट्रोल रूम इस्ट्रैक से जारी है।
- इस्ट्रैक से इन सबको कंट्रोल करना और इन सेटेलाइट्स के उद्देश्यों की पूर्ति में सहयोग करना हमारा मकसद है।
अभियान का उद्देश्य
- इसके मुख्य उद्देश्य हैं- पृथ्वी का अवलोकन, समुद्री सतह के सही इस्तेमाल का अवलोकन, पृथ्वी के सतह की मैपिंग के साथ वाटर डिस्ट्रीब्यूशन की जानकारी लेना।
- भारत दुनिया का पहला देश है जिसने चांद पर पानी की खोज की।
- इसके प्रमाण मिलते ही इसरो ने चंद्रयान-2 का निर्माण कार्य जोरशोर से शुरू कर दिया। इसकी कामयाबी से चांद पर बस्ती बसाने की उम्मीदों को पर लगेंगे।
गांव में हुई थी शुरुआती शिक्षा
- वैज्ञानिक कमलेश शर्मा का जन्म 15 सितंबर 1976 को रेवतीपुर गांव के एक सामान्य परिवार में हुआ था।
- इनके पिता वेदप्रकाश शर्मा वकील थे।
- इनकी शुरुआती शिक्षा गांव के ही सरस्वती विद्या मंदिर में हुई।
- उसके बाद हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा जिला मुख्यालय स्थित महुआबाग आदर्श इंटर कॉलेज में हुई। इसमें उन्होंने पूरे जिले में टॉप किया।
- यहां के पीजी कॉलेज से बीएससी किया और लखनऊ यूनिवर्सिटी से पीजी किया।
- इन्हें विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 10 गोल्ड मेडल प्राप्त हो चुके हैं। ये अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने पिता को देते हैं।