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sar during 3 decades, BL Flowers is now the largest florist and flowers service provider across all the major cities and towns of Haryana and Nearby.

03/08/2025
Flower arrangement
03/08/2025

Flower arrangement

पान एक बारहमासी बेल है जिसके पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह सांस की समस्याओं को ...
03/08/2025

पान एक बारहमासी बेल है जिसके पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह सांस की समस्याओं को कम करने, जोड़ों के दर्द से राहत देने और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग के लिए जाना जाता है।

🔶️️ गमले में पान की बेल उगाने की विधि :-

✅ ️सही मौसम और समय :
पान की बेल लगाने के लिए वसंत और मानसून सबसे सही समय होता हैं। इस समय नमी और गर्मी का संतुलन बेल की वृद्धि के लिए उपर्युक्त हैं।

✅ ️️गमले का चयन :
कम से कम 12 से 15 इंच गहरा और चौड़ा मिट्टी या प्लास्टिक का गमला लें। गमले में जल-निकासी के लिए छेद होने चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।

️✅ ️मिट्टी की तैयारी :
पान की बेल के लिए भुरभुरी, जल-निकासी वाली और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी सबसे अच्छी होती हैं। इसकी मिट्टी बनाने के लिए 50% मिट्टी + 30% गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट + 20% रेत का इस्तेमाल करें।

✅️️ पान की बेल कैसे लगाए :
पान की बेल को कटिंग या तैयार पौधे के रूप में लगाया जा सकता हैं। कटिंग में 4-5 गांठें होनी चाहिए और इसे मिट्टी में 2-3 इंच गहराई में रोपें। शुरूआत में बेल को छायादार जगह पर रखें और हर दिन थोड़ा-थोड़ा पानी दें।

🔶️ पान के पौधे की देखभाल का तरीका :-

✅ ️️पौधे को छायादार या अप्रत्यक्ष धूप में रखें, सीधी तेज धूप से बचाए।

️✅️ इसकी मिट्टी को सूखने न दें, लेकिन ओवर-वाटरिंग करने से भी बचे।

️✅️ बेल को चढ़ाने के लिए लकड़ी की छड़ी या जाली का इस्तेमाल करें।

️✅️ पत्तियों पर हर 15 दिन में पानी का छिड़काव करें ताकि धूल हट जाये और पत्तियां हरी-भरी दिखें।

✅ ️️हर 30 से 35 दिन में गमले की मिट्टी की गुड़ाई करके 2 मुट्ठी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें।

✅ ️️महीने में एक बार नीम की खली का घोल देने से कीट-फंगस नहीं लगते।

️✅️ अगर पत्तियां पीली पड़ने लगें तो थोड़ा सा जैविक नाइट्रोजन खाद का इस्तेमाल करें।

✅ ️सर्दियों में बेल की वृद्धि धीमी हो जाती हैं, उस समय इसे घर के अंदर रखें, तेज हवा और ठंड से बचाएं।

✅ ️️हर 1-2 साल में गमला बदल दें ताकि जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

✅ ️️घना करने के लिए समय-समय पर इसकी प्रूनिंग करें।

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स्वर्ग से आए हैं तीन फूल अपराजिता, पारिजात और मधुकामिनी, जानिए मधुकामिनी क्या है?  #मधुकामिनी के फूल गर्मियों में खिलते ...
15/05/2025

स्वर्ग से आए हैं तीन फूल अपराजिता, पारिजात और मधुकामिनी, जानिए मधुकामिनी क्या है?
#मधुकामिनी के फूल गर्मियों में खिलते हैं। घर में अगर एक बार आपने कामिनी के फूल का पौधा लगा दिया तो ४-५ वर्ष या इससे अधिक समय तक फूल आते रहेंगे। सौंधी और मनमोहक खुशबू के कारण इसे अपने घर की बालकनी में लगाना बहुत ही आसान है।
मधुकामिनी प्लांट को सबसे अच्छे इनडोर और आउटडोर पौधों में से एक माना जाता है। वास्तु के अनुसार यह प्लांट घर-आंगन को खुशियों से भर सकता है।जरूरी बात यह है कि यह कम रखरखाव वाला पौधा है और इसमें सुगंधित फूलों के गुच्छे होते हैं जो सुंदर ति‍तलियों और चिड़ियों को बहुत आकर्षित करते हैं।
मधुकामिनी फूल का वनस्पति नाम है मुराया पैनीकुलेटम। यह एक सफेद रंग का फूल है जो घर की सज्जा के साथ औषधि के लिए भी प्रयोग किया जाता है

खूशबूदार फूलों में से मधुकामिनी दिन रात महकने वाला प्लांट है। यह एक सदाबहार झाड़ीनुमा पौधा है जिसका आकार ५-१५ फिट तक होता है। नारंगी यानी संतरा जैसी सुगंध आने के कारण इसको ऑरेंज जैस्मीन नाम से भी जाना जाता है। इसके फूलों का रंग सफेद होता है!
इसके फूलों की मनभावन सुगंध मानसिक तनाव को दूर करने वाली होती है!

मान्यता है कि जो तीन फूल स्वर्ग से आए हैं उसमें #अपराजिता, #पारिजात के साथ तीसरा फूल मधुकामिनी ही है...


मधुकामिनी के लाभ

इसके मात्र २ पत्तों को उबाल कर पीने से श्वास रोग में बहुत ज्यादा लाभ होता है। गला साफ़ होता है।

इसके फूलों को बेडरूम में रखने से दाम्पत्य जीवन सुखी रहता है। ऐसा माना गया है।

मधुकामिनी की पत्तियां शुभकारी होती हैं इसीलिए विवाह मण्डपों में इसका प्रयोग होता है।

तमिल भाषा में इसे वेंगराए और तेलगु में नागागोलुंग , मराठी में कुंती तो मणिपुरी में कामिनी कुसुम कहा जाता है। कन्नड़ में काडु कारिबेयु तो मलयालम में #मारामुला कहा जाता है।

Sabjiyon Se bhare bagicha.
28/02/2025

Sabjiyon Se bhare bagicha.

घरों में लोग महंगे-महंगे एयर प्यूरीफायर लगाते हैं, तब जाकर कहीं अच्छी सांस आती हैं, हालांकि घर के अंदर के पॉल्यूशन लेवल ...
05/02/2025

घरों में लोग महंगे-महंगे एयर प्यूरीफायर लगाते हैं, तब जाकर कहीं अच्छी सांस आती हैं, हालांकि घर के अंदर के पॉल्यूशन लेवल को कम करने के लिए आप कुछ और नेचुरल किफायती तरीके भी आजमा सकते हैं। दरअसल कुछ ऐसे पौधे भी होते हैं, जिन्हें घर में लगाने से प्रदूषण का स्तर कम होता हैं और हवा प्राकृतिक रूप से प्यूरीफाई होती हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही पौधों के बारे में।

1. पीस लिली (Peace Lily):- जैसा इस पौधे का नाम हैं, ठीक वैसा ही इसका काम भी हैं। सफेद रंग के फूलों वाला यह पौधा, जिस भी जगह पर लगाया जाता हैं, उस जगह के वातावरण को पूरी तरह से शुद्ध कर देता हैं। लिली परिवार के इस पौधे की खुशबू भी बहुत ही अच्छी होती हैं। आज के समय में जब हर जगह एयर पॉल्यूशन इतना बढ़ गया हैं, ऐसे में घर में इस पौधे को लगाकर काफी हद तक हवा को शुद्ध किया जा सकता हैं। यह एक इंडोर पौधा हैं जिसे ज्यादा देख-रेख की जरूरत नहीं पड़ती हैं।

2. स्नेक प्लांट (Sansevieria):- इसे बेडरूम प्लांट, मदर-इन-लॉ टंग प्लांट या सेन्सेविरिया आदि कई नामों से जाना जाता हैं। यह भी एक तरह का इनडोर प्लांट हैं, जिसे घर के लिविंग रूम में बहुत आसानी से लगाया जा सकता हैं। यह प्लांट एयर पॉल्यूशन को कम करके हवा को शुद्ध करने का काम करता हैं। इस प्लांट से जुड़ी सबसे खास बात यह हैं कि ये दिन के साथ-साथ रात में भी एयर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन प्रोड्यूस करने का काम करता हैं।

3. मनी प्लांट (Pothos):- यह सबसे पॉपुलर इंडोर प्लांट्स में से एक हैं, जो लगभग हर घर और ऑफिस में देखने को मिल ही जाता हैं। बता दें ये भी एक बहुत ही अच्छा एयर प्यूरीफायर प्लांट हैं। ये प्लांट हवा में मौजूद टॉक्सिक एलिमेंट को अब्जॉर्ब करके हवा को शुद्ध बनाने में मदद करता हैं। इसे मिट्टी और पानी दोनों में लगा सकते हैं।

4. एरिका पाम (Areca Palm):- यह घरों में सबसे ज्यादा लगाए जाने वाला पौधा हैं। इसकी बड़ी-बड़ी पत्तियाँ देखने में बहुत ही खूबसूरत लगती हैं। घर में बड़ी ही आसानी से लगने वाला यह पौधा आस-पास के वातावरण के लिए बहुत ही अच्छा होता हैं। यह पौधा जिस भी जगह पर लगा होता हैं वहां की हवाओं से फॉर्मेल्डिहाइड, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को अब्जॉर्ब करने का काम करता हैं। जिससे हवा फ्रेश और टॉक्सिन फ्री बनी रहती हैं।

5. जी जी प्लांट (ZZ plant):- यह एक बेस्ट एयर प्यूरीफायर इनडोर प्लांट हैं। कम रोशनी और कम पानी में इसे आसानी से घर के अंदर लगाया जा सकता हैं। यह प्लांट जिस भी जगह पर लगाया जाता हैं उस जगह की एयर में मौजूद सभी टॉक्सिक गैसे जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड और फॉर्मेल्डिहाइड गैस को अब्जॉर्ब करके हवा को शुद्ध करने का काम करता हैं।

22/01/2025

Balloon decoration in car at occasion of birthday.
❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
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19/10/2024
केसर को अब कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों में भी उगाया जाने लगा हैं। इसे उगाने के लिए 10°c से 25°c तापमान जरूरी होता हैं। ...
17/10/2024

केसर को अब कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों में भी उगाया जाने लगा हैं। इसे उगाने के लिए 10°c से 25°c तापमान जरूरी होता हैं। अगर आपके राज्य में सर्दियां (Winter season) पड़ती हैं तो केसर को उगा सकते हैं। इसे उगाने के लिए इसके बल्ब चाहिए जोकि ऑनलाइन मिल जाएंगे। केसर के बल्ब अक्टूबर से नवम्बर तक लगा सकते हैं। इसके बल्ब लगाने के लिए बलुई या दोमट मिट्टी चाहिये। इसके लिए एक भाग मिट्टी, एक भाग वर्मीकम्पोस्ट और एक भाग रेत लेंगे, फिर तीनों को अच्छे से मिक्स करके गमले या ग्रो बैग में भर लेंगे। फिर मिट्टी में केसर के बल्ब को दबा देंगे, ध्यान दें कि केसर का चोटी वाला हिस्सा ऊपर की तरफ रखना हैं। इसके बाद पानी डालकर गमले या ग्रो बैग को सेमी-शेड वाली जगह पर रख देंगे, जहां सुबह की 4-5 घंटे की हल्की धूप आती हो। केसर के पौधे को तेज धूप से बचाकर रखें। इसमें पानी तभी डाले जब इसकी मिट्टी सूखी दिखाई दें, ज्यादा पानी डालने से इसके बल्ब गल भी सकते हैं। लगभग 12 से 15 दिन में इसके बल्ब अंकुरित होने लगेंगे और 50 से 55 दिन बाद इनमें फूल आना शुरू हो जाएंगे। केसर के फूल हल्के बैंगनी रंग के होते हैं और इसके फूलों के अंदर तीन स्टिग्मा होते हैं, इन्हे ही केसर बोला जाता हैं। इन्हे सावधानी से तोड़कर निकाल लीजिए और छांव में सुखा दीजिए। सूख जाने के बाद आप इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। पोस्ट पसंद आया हो तो Like करके हमारे इस पेज को Follow जरूर करें, धन्यवाद

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