21/07/2024
एक गुरु कि महिमा का, कैसे बखान करूं,
आप जो हैं, उसे शब्दों में कैसे बयां करूं।
मात-पिता का प्यार, आपमें पाया,
हर कदम पे, हमें रास्ता दिखाया।
एक साथी की तरह, साथ निभाया,
हर मुश्किल को, यूं आसान बनाया।
ब्रह्मा का ज्ञान, विष्णु का संरक्षण,
शिव का रूप, सब आपका है दर्शन।
परब्रह्म का साक्षात स्वरूप हो,
अज्ञान के अंधेरे में, ज्ञान की धूप हो।
हर सुबह हर शाम, आपको ही नमन करते,
आपकी कृपा से, जीवन में प्रकाश भरते।
आपकी महिमा, आपकी गरिमा,
आपके चरणों में, है हमारी भक्ति की सीमा।
मेरी ये नज़्म, आपको समर्पित है,
आपकी दुआ से, हर मंजिल पर हमारी जीत लिखित है।
आप ही हैं, हमारी हर कहानी की कड़ी,
आभार आपका है, हर पल हर घड़ी।
- आर्यका शुक्ला