26/08/2026
न्यूज़ लॉन्ड्री की खबर पुष्ट है या नहीं किन्तु काफी कर्मचारियों को निकाल दिया गयाl ज्यादातर उन कर्मचारियों को हटा गया है जो 40-50 हजार रुपए वेतनभोगी थे. बड़े पद पर काम कर मोटी कमाई करने वालों को नही निकाला गया है.2024-2025 में आज तक ने 111 करोड़ मुनाफा कमाया. वहीं 2025-2026 में घटकर 29 करोड़ हो गया. चैनल को विज्ञापन कम मिल रहा है. कंपनियों को सोशल मीडिया पर विज्ञापन देना सस्ता पड़ता है.बड़ी कम्पनियों के विज्ञापन अब युट्युब,फेसबुक को जा रहे हैंl सोशल मीडिया का दायरा ज्यादा है और न्युज चैनल से कई गुना ज्यादा दर्शक सोशल मीडिया पर है सोशल मीडिया पर विज्ञापन की लागत भी न्यूज़ चैनल से कम है वर्तमान में असली मीडिया सोशल मीडिया ही बन रहा हैl जिसके चार प्रमुख कारण है---
(1) न्यूज़ चैनलों पर पहले से ही स्क्रिप्टेड पक्ष के पक्ष में माहौल बनाया जाता है ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है एक ही फोटो को बार बार घुमा फिराकर दिखाकर घंटो घंटो दिखाया जा रहा हैl
(2)डिबेट में एंकर के बर्ताव से साफ पता चलता है उनका झुकाव व् इंटर्स्ट न्यूज़ पढ़ने के स्थान पर राजनीती की चीजों में ज्यादा हो चूका है
(3) मात्र 10-12 एंकर चेहरों ने सारे न्यूज़ सिस्टम को कैप्चर कर रखा है उनके बर्ताव व् हनक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग को लगभग कमजोर ही कर दिया है
(4) ये 10-12 एंकर सामान्य,मानविक,समाजिक आर्थिक,लोकतांत्रिक मुद्दों को छोड़कर राजनैतिक व् हिन्दू-मुस्लिम कंटेंट को ही सफलता की कुंजी मान चुके हैl
अब स्टोरी व् प्रोग्राम,बहस में राजनीती व् हिन्दू-मुस्लिम की छोटी से छोटी चीजों पर आयोजित करने लगे है वे चीजे इतनी छोटी होती है जिसे सामान्य तौर पर अहम नहीं समझा जा सकता किन्तु ये लोग उसे अति महत्वपूर्ण बताकर पेश करने के चक्कर में अपने दर्शक खो रहे हैl इसी कारण मैनस्ट्रीम न्यूज़ चैनलों से सामान्य दर्शक और विपक्ष के समर्थक दर्शक तो दूर हो ही गए है मोदी समर्थक भी अधिकतर सोशल मीडिया पर ही ज्यादा फोकस हो रहे है इसलिए मैनस्ट्रीम की जगह सोशल मीडिया ने ज्यादा एयर कर लिया है, सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या सोशल मीडिया अब मैनस्ट्रीम के अस्तित्व को मिटा देगी ? समय का परिवर्तन सभी को आखिरकार स्वीकार करना ही पड़ता हैl---नीरज आर