दिया दासी

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दिया दासी ,धार्मिक संगठन

22/01/2026

*✰जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में 508वें कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस के अवसर पर 27, 28 व 29 जनवरी 2026 को आयोजित विशाल भंडारे में आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं✰*

आयोजन स्थल का पता है :-
सतलोक आश्रम धनाना धाम (हरियाणा),
सतलोक आश्रम भिवानी (हरियाणा),
सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र (हरियाणा),
सतलोक आश्रम करोंथा (हरियाणा),
सतलोक आश्रम मुंडका (दिल्ली)
सतलोक आश्रम सोजत (राजस्थान),
सतलोक आश्रम खमानो (पंजाब),
सतलोक आश्रम धुरी (पंजाब),
सतलोक आश्रम शामली (उत्तर प्रदेश),
सतलोक आश्रम सीतापुर (उत्तर प्रदेश),
सतलोक आश्रम बैतूल (मध्य प्रदेश),
सतलोक आश्रम इन्दौर (मध्य प्रदेश),
सतलोक आश्रम धवलपुरी (महाराष्ट्र)
सतलोक आश्रम जनकपुर (नेपाल देश)
🙏🏻 किसानों के हितैषी, मानवता के सच्चे सेवक जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सान्निध्य में परमेश्वर कबीर साहिब निर्माण दिवस के उपलक्ष में महा समागम धनाना धाम में हरियाणा सोनीपत भारत में किया जाएगा आपको सादर आमंत्रित पूरे परिवार को और विश्व कि परमात्मा की सभी आत्माओं का सादर आमंत्रित हैं��
जो मुझे फॉलो करते है उनको सभी को दिल से Thank you �Follow me
Ten Unknown Facts About

1. Founding and History: BMW, Bayerische Motoren Werke AG, was founded in 1916 in Munich, Germany, initially producing aircraft engines. The company transitioned to motorcycle production in the 1920s and eventually to automobiles in the 1930s.

2. Iconic Logo: The BMW logo, often referred to as the "roundel," consists of a black ring intersecting with four quadrants of blue and white. It represents the company's origins in aviation, with the blue and white symbolizing a spinning propeller against a clear blue sky.

3. Innovation in Technology: BMW is renowned for its innovations in automotive technology. It introduced the world's first electric car, the BMW i3, in 2013, and has been a leader in developing advanced driving assistance systems (ADAS) and hybrid powertrains.

4. Performance and Motorsport Heritage: BMW has a strong heritage in motorsport, particularly in touring car and Formula 1 racing. The brand's M division prod

ये राज इतनी बुरी चीज है कि स्वर्ग के राजा इंद्र ने भी अपनी पत्नी उर्वशी को नंगा नाचने के लिए मारकंडे ऋषि के सामने भेज दि...
02/10/2025

ये राज इतनी बुरी चीज है कि स्वर्ग के राजा इंद्र ने भी अपनी पत्नी उर्वशी को नंगा नाचने के लिए मारकंडे ऋषि के सामने भेज दिया था ताकि उसका राज बचा रहे।⏩⏩

यह कोई निंदा नहीं सत्य घटना पर आधारित सत्य कथा है देखिए स्वर्ग के राजा इंद्र सुखी नहीं फिर हम जैसे जीव कहां से सुखी हो सकते हैं विस्तार पूर्वक जानने के लिए पढ़िए पूरा लेख आखिर कैसे हो सकते हैं हम सुखी जिसका तलाश हमें अशंखो जन्मों से है।

कथा-मार्कण्डेय ऋषि तथा अप्सरा का संवाद
एक समय बंगाल की खाड़ी में मार्कण्डेय ऋषि तप कर रहा था। इन्द्र के पद पर विराजमान आत्मा को यह शर्त होती है कि यदि उसके शासनकाल में 72 चौकड़ी युग के दौरान यदि पृथ्वी पर कोई व्यक्ति इन्द्र पद प्राप्त करने योग्य तप या धर्मयज्ञ कर लेता है और उसकी क्रिया में कोई बाधा नहीं आती है तो उस साधक को इन्द्र का पद दे दिया जाता है और वर्तमान इन्द्र से वह पद छीन लिया जाता है। इसलिए जहाँ तक संभव होता है, इन्द्र अपने शासनकाल में किसी साधक का तप या धर्मयज्ञ पूर्ण नहीं होने देता। उसकी साधना भंग करा देता है, चाहे कुछ भी करना पड़े।

जब इन्द्र को उसके दूतों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में मार्कण्डेय नामक ऋषि तप कर रहे हैं। इन्द्र ने मार्कण्डेय ऋषि का तप भंग करने के लिए उर्वसी (इन्द्र की पत्नी) भेजी। सर्व श्रंृगार करके देवपरी मार्कण्डेय ऋषि के सामने नाचने-गाने लगी। अपनी सिद्धि से उस स्थान पर बसंत ऋतु जैसा वातावरण बना दिया। मार्कण्डेय ऋषि ने कोई उत्सुकता नहीं दिखाई। उर्वसी ने कमर का नाड़ा तोड़ दिया, निःवस्त्रा हो गई। तब मार्कण्डेय ऋषि बोले, हे बेटी!, हे बहन!, हे माई! आप यह क्या कर रही हो? आप यहाँ गहरे जंगल में अकेली किसलिए आई? उर्वसी ने कहा कि ऋषि जी मेरे रूप को देखकर इस आरण्य खण्ड (बन-खण्ड) के सर्व साधक अपना संतुलन खो गए परंतु आप डगमग नहीं हुए, न जाने आपकी समाधि कहाँ थी? कृप्या आप मेरे साथ इन्द्रलोक में चलो, नहीं तो मुझे सजा मिलेगी कि तू हार कर आ गई। मार्कण्डेय ऋषि ने कहा कि मेरी समाधि ब्रह्मलोक में गई थी, जहाँ पर मैं उन उर्वसियों का नाच देख रहा था जो इतनी सुंदर हैं कि तेरे जैसी तो उनकी 7.7 बांदियाँ अर्थात् नौकरानियाँ हैं। इसलिए मैं तेरे को क्या देखता, तेरे पर क्या आसक्त होता? यदि तेरे से कोई सुंदर हो तो उसे ले आ। तब देवपरी ने कहा कि इन्द्र की पटरानी अर्थात् मुख्य रानी मैं ही हूँ। मुझसे सुन्दर स्वर्ग में कोई औरत नहीं है।

तब मार्कण्डेय ऋषि ने पूछा कि इन्द्र की मृत्यु होगी, तब तू क्या करेगी? उर्वसी ने उत्तर दिया कि मैं 14 इन्द्र भोगूँगी। भावार्थ है कि श्री ब्रह्मा जी के एक दिन में 1008 चतुर्युग होते हैं जिसमें 72.72 चतुर्युग का शासनकाल पूरा करके 14 इन्द्र मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इन्द्र की रानी वाली आत्मा ने किसी मानव जन्म में इतने अत्यधिक पुण्य किए थे। जिस कारण से वह 14 इन्द्रों की पटरानी बनकर स्वर्ग सुख तथा पुरूष सुख को भोगेगी।

मार्कण्डेय ऋषि ने कहा कि वे 14 इन्द्र भी मरेंगे, तब तू क्या करेगी? उर्वसी ने कहा कि फिर मैं मृत्य लोक (पृथ्वी लोक को मनुष्य लोक अर्थात् मर्त्यः लोक कहते हैं) में गधी बनाई जाऊँगी और जितने इन्द्र मेरे पति होंगे, वे भी पृथ्वी पर गधे की योनि प्राप्त करेंगे।

मार्कण्डेय ऋषि बोले कि फिर मुझे ऐसे लोक में क्यों ले जा रही थी जिसका राजा गधा बनेगा और रानी गधी की योनि प्राप्त करेगी? उर्वसी बोली कि अपनी इज्जत रखने के लिए, नहीं तो वे कहेंगे कि तू हारकर आई है।

मार्कण्डेय ऋषि ने कहा कि गधियों की कैसी इज्जत? तू वर्तमान में भी गधी है क्योंकि तू चौदह खसम करेगी और मृत्यु उपरांत तू स्वयं स्वीकार रही है कि मैं गधी बनूंगी। गधी की कैसी इज्जत? इतने में वहीं पर इन्द्र आ गया। विधानानुसार अपना इन्द्र का राज्य मार्कण्डेय ऋषि को देने के लिए। कहा कि ऋषि जी हम हारे और आप जीते। आप इन्द्र की पदवी स्वीकार करें। मार्कण्डेय ऋषि बोले अरे-अरे इन्द्र! इन्द्र की पदवी मेरे किसी काम की नहीं। मेरे लिए तो काग (कौवे) की बीट के समान है। मार्कण्डेय ऋषि ने इन्द्र से फिर कहा कि तू मेरे बताए अनुसार साधना कर, तेरे को ब्रह्मलोक ले चलूँगा। इस इन्द्र के राज्य को छोड़ दे। इन्द्र ने कहा कि हे ऋषि जी अब तो मुझे मौज-मस्ती करने दो। फिर कभी देखूंगा।

पाठकजनो! विचार करो:- इन्द्र को पता है कि मृत्यु के उपरांत गधे का जीवन मिलेगा, फिर भी उस क्षणिक सुख को त्यागना नहीं चाहता। कहा कि फिर कभी देखूंगा। फिर कब देखेगा? गधा बनने के पश्चात् तो कुम्हार देखेगा। कितना वजन गधे की कमर पर रखना है? कहाँ-सी डण्डा मारना है? ठीक इसी प्रकार इस पृथ्वी पर कोई छोटे-से टुकड़े का प्रधानमंत्राी, मंत्राी, मुख्यमंत्राी या राज्य में मंत्राी बना है या किसी पद पर सरकारी अधिकारी या कर्मचारी बना है या धनी है। उसको कहा जाता है कि आप भक्ति करो नहीं तो गधे बनोगे। वे या तो नाराज हो जाते हैं। कहते हैं कि हम क्यों बनेंगे गधे? फिर से मत कहना। कुछ सभ्य होते हैं, वे कहते हैं कि किसने देखा है, गधे बनते हैं? फिर उनको बताया जाता है कि सब संत तथा ग्रन्थ बताते हैं। तो अधिकतर कहते हैं कि देखा जाएगा।

उनसे निवेदन है कि मृत्यु के पश्चात् गधा बनने के बाद आप क्या देखोगे, फिर तो कुम्हार देखेगा कि आप जी के साथ कैसा बर्ताव करना है? देखना है तो वर्तमान में देख। बुराई छोड़कर शास्त्रानुकूल साधना करो जो वर्तमान में विश्व में केवल मेरे (रामपाल दास के) पास है। आओ ग्रहण करो और अपने जीव का कल्याण कराओ।

ऊपर लिखी वाणी नं. 3 में बताया है कि इन्द्र-कुबेर तथा ईश की पदवी प्राप्त करने वाले तथा ब्रह्मा जी का पद तथा वरूण, धर्मराय का पद प्राप्त करके तथा विष्णु जी के लोक को प्राप्त कर देव पद प्राप्त भी वापिस जन्म-मरण के चक्र में रहता है।

स्वर्ग लोक में 33 करोड़ देव पद हैं। जैसे भारत वर्ष की संसद में 540 सांसदों के पद हैं। व्यक्ति बदलते रहते हैं। उन्हीं सांसदों में से प्रधानमंत्राी तथा अन्य केन्द्रीय मंत्राी आदि-आदि बनते हैं।

#आदि_सनातनधर्म_होगाप्रतिष्ठित

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परमात्मा ने आध्यात्म मार्ग के अंदर प्रथम जो कड़ी है वह गुरु बताया है और गुरु के बिना जो साधना करते हैं वह साधना नहीं, उन...
21/06/2025

परमात्मा ने आध्यात्म मार्ग के अंदर प्रथम जो कड़ी है वह गुरु बताया है और गुरु के बिना जो साधना करते हैं वह साधना नहीं, उनका व्यर्थ प्रयत्न है।

,̤RadhaSoami_Vs_KabirPanthराधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत प्रेत क्यों बने?पूर्व जन्म की भक्ति स...
12/12/2024

,̤RadhaSoami_Vs_KabirPanth
राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत प्रेत क्यों बने?
पूर्व जन्म की भक्ति से सम्पन्न हुये भक्त वर्तमान में अच्छे साधक लगते हैं, परन्तु साधना शास्त्रविरुद्ध होने के कारण भविष्य की भक्ति कमाई से वंचित रह जाते हैं।


#राधास्वामीपंथ_का_महाखुलासा

#राधास्वामी_प्रवर्तकबना_प्रेत






https://youtu.be/5cRn_76l7D0?si=qXmDEsVBP1RjUNuc

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