24/01/2023
श्री शुक्ला जी का ये नया उपन्यास आज समाप्त किया।पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों एवं सात्विक विचारों के महत्व को परिलक्षित करती हुई ये कृति पाठकों के मन में स्वयं के प्रति आत्मचिंतन का भाव जगाती है।लेखक ने जिस तरह एक साधारण परिवार में घटने वाली घटनाओं का चित्रण किया है, उस से हर व्यक्ति सरोकार रखता है, इसी कारण पाठक की उत्सुकता अंत तक बनी रहती है।
भाषा दैनिक जीवन में प्रयुक्त हिंदी ही है इसलिए उबाऊ बिलकुल नहीं है। अति सुंदर रचना।