01/06/2026
आज के दौर का कड़वा सच
हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, लेकिन हर दिन ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जो इंसानियत को शर्मसार कर देती हैं।
कहीं एक मासूम बच्चे की हत्या कर दी जाती है, कहीं मामूली हंसी-मज़ाक या छोटी सी कहासुनी पर किसी युवक की जान ले ली जाती है। सड़कों पर लापरवाही और रैश ड्राइविंग के कारण निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। बेटियां और महिलाएं आज भी दुष्कर्म जैसी जघन्य घटनाओं का शिकार हो रही हैं। हर तरफ हिंसा, गुंडागर्दी और अपराध की खबरें आम होती जा रही हैं।
सवाल यह है कि आखिर आम आदमी की जिंदगी और सुरक्षा की कीमत क्या रह गई है?
घर से निकला व्यक्ति सुरक्षित लौटेगा या नहीं, सड़क पर चलता व्यक्ति किसी लापरवाह वाहन की चपेट में आ जाएगा या नहीं, कोई महिला या बच्ची सुरक्षित रहेगी या नहीं — ऐसे सवाल आज समाज के सामने खड़े हैं।
संविधान ने हर नागरिक को जीवन, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार दिया है, लेकिन जब अपराधी कानून का डर खो देते हैं और न्याय मिलने में लंबा समय लग जाता है, तब लोगों का भरोसा कमजोर होने लगता है।
एक मजबूत समाज वही है जहां अपराध करने वाला सजा से बचे नहीं, रैश ड्राइविंग करने वाला जवाबदेह हो, महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो और आम नागरिक बिना डर के अपना जीवन जी सके।
हमें सिर्फ घटनाओं पर दुख व्यक्त करने की बजाय ऐसी मानसिकता और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठानी होगी जो अपराध और हिंसा को बढ़ावा देती है।
विकास केवल बड़ी इमारतों, चौड़ी सड़कों और नई तकनीक से नहीं मापा जाता, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि एक आम नागरिक, एक बच्चा और एक महिला कितनी सुरक्षित है।