12/04/2026
किसान को देश की रीढ़ ही हड्डी कहा जाता है !
लेकिन आज किसान शब्दों तक ही रीढ़ की हड्डी रह गया है !
किसान अपनी फसल से अपना ही नहीं पूरे देश का पेट पालता है !
6 महीने दिन रात मेहनत करता है !जमीन जोतता है !बीज उगाता है ,सिंचाई करता है खेत में अपना पसीना बहाता है! धूप में जलता है ,ठंड में ठरता है!
अपनी ओलाद जैसे फसल का ख्याल रखता है तब जाकर एक फसल तैयार होती है!
अब जब खड़ी फसल में किसी के बीड़ी सिगरेट फेक देने से या अन्य कारणवश आग लग जाती है!
या मौसम की मार पड़ जाती है तो सोचिए उसके दिल पर क्या बीतती होगी वो अंदर से टूट जाता है!
अगर फसल सही सलामत हो जाए तो किसान को फसल का उचित दाम नहीं मिलता!
फसल नहीं होती तो किसान कर्ज ले लेता है ,कर्ज नहीं ले पाता तो depression में चला जाता है ! NCRB रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लगभग 11000 किसान और मजदूर आत्महत्या करते है!
सरकार मुआवजे के नाम पर सिर्फ आश्वासन देती है ! जब बड़े बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ हो सकता है तो किसान का क्यों नहीं हो सकता ?