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Kanha ji ki fancy pagdi Poshak set@
13/11/2025

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Kanha ji ki fancy dress
13/11/2025

Kanha ji ki fancy dress

27 जुलाई को  #हरियाली_तीज : सावन की हरियाली तीज महिलाओं के सुहाग का प्रतीक पर्व मानी जाती है। करवा चौथ की तरह ही यह दिन ...
26/07/2025

27 जुलाई को #हरियाली_तीज : सावन की हरियाली तीज महिलाओं के सुहाग का प्रतीक पर्व मानी जाती है। करवा चौथ की तरह ही यह दिन भी खास महत्व रखता है। हरियाली तीज इस बार 27 जुलाई, रविवार के दिन मनायी जाएगी। श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ रही तीज को हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है।

सुहागिनों इस दिन माता पार्वती का उपवास रखते हुए पति के दीर्घ जीवन की कामना करती हैं। हरे रंग के वस्त्र इस त्यौहार की सबसे बड़ी पहचान है। इस बार हरियाली तीज पर रवि योग बन रहा है, जिससे पर्व की शुभता और अधिक बढ़ गई है। शहर की गलियों से लेकर घर-घर तक तीज की तैयारियों का उत्साह साफ झलक रहा है। महिलाओं में हरे वस्त्रों, सोलह शृंगार और मेहंदी की खास धूम है।

इस साल हरियाली तीज पर शाम को 7:30 बजे तक का पूजा मुहूर्त विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने पतियों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं योग्य वर के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। हरा रंग सौभाग्य, संतुलन और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है, जो इस दिन विशेष महत्व रखता है।

उपाय: हरियाली तीज पर शिवलिंग पर फूल और बेलपत्र चढ़ाकर जलाभिषेक करें।

शिव जी की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन

वृषवाहन साजे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।

मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।

शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।

ओम जय शिव ओंकारा।।

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।

ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

27 जुलाई 2025 को श्री बाँके बिहारी जी मंदिर में मनायी जायेगी हरियाली तीज । इस दिन श्री बाँके बिहारी जी स्वर्ण रजत हिंडोल...
24/06/2025

27 जुलाई 2025 को श्री बाँके बिहारी जी मंदिर में मनायी जायेगी हरियाली तीज । इस दिन श्री बाँके बिहारी जी स्वर्ण रजत हिंडोले में विराजमान होकर अपने भक्तों को दर्शन देंगे। हरियाली तीज के अवसर पर बिहारी जी अपने भक्तों को हरे रंग की पोशाक में दर्शन देते हैं। इस दिन बिहारी जी के शयन के लिए पीछे जगमोहन में गुलाबी रंग की शेज सैया सजाई जाती है जिसमे वह आराम कर सके शेज शैया के पास श्रृंगार का सामान भी रखा जाता है। बता दें कि इस हिंडोले को बनाने में लगभग 5 साल का समय लगा था और जब यह हिंडोला बनकर तैयार हो गया तो 1947 में हरियाली तीज के दिन 19 अगस्त की तारीख थी और पहली बार ठाकुर श्री बाँके बिहारी ने 19 अगस्त 1947 के दिन ही इस हिंडोले पर बैठकर अपने भक्तों को दर्शन दिए है. तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
जय बिहारी जी की

15/06/2025
26/04/2025

स्वजन, शुभचिंतकों की एक ही कामना कि आप शीघ्र स्वस्थ हो जायें।

कभी उनकी यह चिंता देखकर मुख से कुछ निकल जाता है तो कभी मौन रह जाता हूँ।

का से कहूँ।

स्वस्थ होने का अधिकांश लोगों के लिए एक ही अर्थ कि देह स्वस्थ रहे।

दास के लिए स्वस्थ का अर्थ सदैव एक ही रहा कि स्व में स्थिति।

स्व में स्थिति अर्थात चैतन्य की सदा-सर्वदा अनुभूति, आह्लाद, प्रेम में सतत अवगाहन।

यह नश्वर देह भी कभी स्वस्थ हुयी है? हो सकती है? हो सकती तो नश्वर ही क्यों होती।

जब यह देह ऊपरी तौर पर स्वस्थ प्रतीत होती है तब भी न जाने कितने ही विषाणु, देह के भीतर रहकर आतंकियों की तरह स्वयं को छिपाते, बढ़ाते हुए सही मौके की तलाश में रहते हैं।

पिंजड़ा मुख्य नही है, मुख्य है तोता !

लोग कहते हैं कि आप अपना थोड़ा सा ध्यान भी रखा करो।

अपने राम ने मानो किसी मकान की रजिस्ट्री किसी के नाम कर दी तो उसके बाद उस मकान से संबध क्या?

वह जाने और उसका स्वामी कि उसकी देख-रेख कैसी करनी है।

अब अपना कोई संबध नहीं और पहुँच जावें उस मकान को देखने, गेट फ़लांगकर घुस जावें और कोई टोके तो कहें कि हम तो इसकी देख-रेख कर रहे हैं; क्या यह उचित?

जिसकी वस्तु, जिसके अधिकार में, वह संभाले अपनी ईच्छा के अनुसार।

वास्तव में तो कोई रजिस्ट्री भी न की; अपना कभी कुछ था ही नहीं।

हाँ, जो कल्पित था, भ्रम था मात्र उसे ही समय रहते त्याग दिया।

कण भर में ममत्व छोड़ा और सारी सृष्टी अपनी हो गयी।

वे लीला-कौतुकी समय-समय पर रचते रहते है नये-नये कौतुक।

कभी संकेत कर बुलाते हैं अपने पास और पास जाओ तो कहते हैं अभी समय नहीं हुआ, फ़िर कभी।

तुम्हारा जीवन, तुम्हारे प्राण, तुम्हारी ईच्छा !

जा मरने से जग डरै, सो मेरे आनन्द।

कब मिलिहों, कब भेंटिहों, पूरण परमानन्द॥

Mukut
26/04/2025

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06/04/2025

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Durga Set
06/04/2025

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Mata ki chunniyan
06/04/2025

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