29/09/2022
खैरथल : मिलावट की गिरफ्त में आपका दूध भी हो सकता है। कहीं इसमें पाउडर तो कहीं इंजेक्शन, कहीं केमिकल तो कहीं वनस्पति, कहीं फॉर्मेलिन तो कहीं यूरिया मिला होता है। जिस दूध को आप सेहत का साथी मानकर खुद पीते और अपने बच्चों को पिलाते हैं, वह जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि समय समय पर दूध की जांच खुद करते रहें।
चूंकि शहर में मांग की तुलना में दूध का उत्पादन कम है। इसी का फायदा उठाकर कई दूध बेच रही हैं। 60 फीसद दूध आपूर्ति डेयरी कंपनियां करती हैं। मिलावट की शिकायत खुले दूध में bhi है। खटाल वाले इंजेक्शन के सहारे गाय-भैंस का दूध उतारते हैं। इतना ही नहीं दूध में पानी व पाउडर भी मिला देते हैं। ये पाउडर हरियाणा से मंगाए जाते हैं। मिलावटी दूध के सेवन से हार्ट, किडनी, लीवर खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।
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दुग्ध उत्पादों में डेयरी व्हाइटनर
कारोबारियों की मानें तो यहां दूध में डेयरी व्हाइटनर का इस्तेमाल होता है। इस दूध से दही, मिठाई, राबड़ी, पनीर तैयार होता है। यह व्हाइटनर मूंगफली के दाने व छिलके, सफेद उड़द दाल, सफेद तिल से तैयार होता है। सोया दूध का प्रचलन भी तेजी से बढ़ रहा है।
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- 5 हजार लीटर दूध तैयार होता है दूध पाउडर से।
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कोट --
इंजेक्शन या रासायनिक मिलावट वाले दूध के नियमित सेवन से शरीर का मेटाबालिज्म डिस्टर्ब होता है। इससे पाचनतंत्र कमजोर होता है।जोड़ों में दर्द होने लगता है। लीवर खराब होने लगता है। किडनी तक फेल हो जाती ह
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