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योग माया मंदिर 🙏🌹🙏दिल्ली
05/01/2023

योग माया मंदिर 🙏🌹🙏
दिल्ली

HAPPY GURU PURNIMA TO ALL DIVINE SOULS🙏🙏|| गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्र...
13/07/2022

HAPPY GURU PURNIMA TO ALL DIVINE SOULS🙏🙏
|| गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ||
May Our Life be filled blessing of GURU , Like the Sun light in Sky
May Our Life Always have the Courage
Thanks & Salute to Masters Who Inspire us in Our Beautiful Life

इस माह का 30 मई खास है। इस दिन वट सावित्री के साथ शनि जयंती व सोमवती अमावस्या भी है.... ऐसा संयोग करीब 30 साल के बाद देख...
21/05/2022

इस माह का 30 मई खास है। इस दिन वट सावित्री के साथ शनि जयंती व सोमवती अमावस्या भी है.... ऐसा संयोग करीब 30 साल के बाद देखने को मिल रहा है

19/05/2022

मां के ये अष्ट लक्ष्मी स्वरूप अपने नाम और रूप के अनुसार भक्तों के दुख दूर करते हैं तथा सुख, समृद्धि प्रदान करते हैं..
-🔸 आदि लक्ष्मी
श्रीमद्भागवत पुराण में आदि लक्ष्मी को मां लक्ष्मी का पहला स्वरूप कहा गया है। इन्हें मूल लक्ष्मी या महालक्ष्मी भी कहा गया है। मान्यता है कि आदि लक्ष्मी मां ने ही श्रृष्टि की उत्पत्ति की है तथा भगवान विष्णु के साथ जगत का संचालन करती हैं। आदि लक्ष्मी की साधना से भक्त को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🔸धन लक्ष्मी
मां लक्ष्मी के दूसरे स्वरूप को धन लक्ष्मी कहा जाता है। इनके एक हाथ में धन से भरा कलश है तथा दूसरे हाथ में कमल का फूल है। धन लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं तथा कर्ज से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार, मां लक्ष्मी ने ये रूप भगवान विष्णु को कुबेर के कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिया था
🔸धान्य लक्ष्मी
मां का तीसरा रूप है, ये संसार में धान्य यानि अन्न या अनाज के रूप में वास करती हैं। धान्य लक्ष्मी को मां अन्नपूर्णा का ही एक रूप माना जाता है। इनको प्रसन्न करने के लिए कभी भी अनाज या खाने का अनादर नहीं करना चाहिए।
-🔸 गज लक्ष्मी
गज लक्ष्मी हाथी के ऊपर कमल के आसन पर विराजमान हैं। मां गज लक्ष्मी को कृषि और उर्वरता की देवी के रूप में पूजा जाता है। इनकी आराधना से संतान की प्राप्ति होती है। राजा को समृद्धि प्रदान करने के कारण इन्हें राज लक्ष्मी भी कहा जाता है।
🔸संतान लक्ष्मी
संतान लक्ष्मी को स्कंदमाता के रूप में भी जाना जाता है। इनके चार हाथ हैं तथा अपनी गोद में कुमार स्कंद को बालक रूप में लेकर बैठी हुई हैं। माना जाता है कि संतान लक्ष्मी भक्तों की रक्षा अपनी संतान के रूप में करती हैं।
वीर लक्ष्मी
मां लक्ष्मी का ये रूप भक्तों को वीरता, ओज और साहस प्रदान करता है। वीर लक्ष्मी मां युद्ध में विजय दिलाती हैं। अपने हाथों में तलवार और ढाल जैसे अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।
🔸जय लक्ष्मीमाता
लक्ष्मी के इस रूप को जय लक्ष्मी या विजय लक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है। मां के इस रूप की साधना से भक्तों की जीवन के हर क्षेत्र में जय–विजय की प्राप्ति होती है। जय लक्ष्मी मां यश, कीर्ति तथा सम्मान प्रदान करती हैं।
🔸विद्या लक्ष्मी
मां के अष्ट लक्ष्मी स्वरूप का आठवां रूप विद्या लक्ष्मी है। ये ज्ञान, कला तथा कौशल प्रदान करती हैं। इनका रूप ब्रह्मचारिणी देवी के जैसा है।
🔸वीर लक्ष्मी
मां लक्ष्मी का ये रूप भक्तों को वीरता, ओज और साहस प्रदान करता है। वीर लक्ष्मी मां युद्ध में विजय दिलाती हैं।

🔸वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू की सही दिशा जहां दरिद्रता को दूर करती है वहीं झाड़ू से जुड़ी एक भी गलत बात कई परेशानियों...
18/05/2022

🔸वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू की सही दिशा जहां दरिद्रता को दूर करती है वहीं झाड़ू से जुड़ी एक भी गलत बात कई परेशानियों को बुलावा देती है
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🔸जिस तरह घर में हर चीज़ का अपना अलग महत्व होता है, उसी तरह से घर में या ऑफिस में झाडू का भी अपना एक अलग महत्व है। झाडू न सिर्फ गंदगी को साफ करती है बल्कि यह घर के अंदर से दरिद्रता को दूर करके सुख और समृद्धि भी लाती है। झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू की सही दिशा जहां दरिद्रता को दूर करती है वहीं झाड़ू से जुड़ी एक भी गलत बात कई परेशानियों को बुलावा देती है
🔸शास्त्र के अनुसार झाड़ू रखने के लिये दक्षिण पश्चिम कोण या पश्चिम दिशा का चुनाव करना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिशा में झाड़ू रखने से नेगेटिव एनर्जी नहीं फैलती, जबकि ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा में झाड़ू कभी भी नहीं रखनी चाहिए। माना जाता है कि इस दिशा में झाड़ू रखने से घर में भगवान का आगमन नहीं होता और दुर्भाग्य बना रहता है...
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🔸पूरे समय झाड़ू का दिखाई देना अच्छा नहीं माना जाता। खुले स्थान पर रखी झाड़ू अच्छी ऊर्जाओं को बाहर कर देती है। इसके अलावा झाड़ू को कभी भी खड़ा करके नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र में खड़ी झाड़ू रखना अच्छा नहीं माना जाता। इससे घर में दरिद्रता आती है। झाड़ू को हमेशा जमीन पर लिटा कर ही रखें

16/05/2022

🔸बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक पारंपरिक रूप से हिंदू कैलेंडर में चंद्र माह वैशाख (अप्रैल-मई) की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, और इसलिए इसका नाम वेसाक है। भगवान बुद्ध एक महान आध्यात्मिक शिक्षक, गुरु और दार्शनिक थे। भगवान बुद्ध, “प्रबुद्ध व्यक्ति” ने कर्म को पार कर लिया और जन्म के चक्र से बच गए। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व पूर्णिमा की रात को हुआ था और इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, और बाद में अस्सी वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया (मोक्ष प्राप्त किया)। वे एक दिव्य-मानव थे, जिनका जीवों के प्रति स्नेह और करुणा पृथ्वी पर एक चमत्कार बन गया और उनके कार्य ईश्वर के समान थे
पीपल के पेड़ के नीचे वैशाख पूर्णिमा (वैशाख के महीने में पूर्णिमा के दिन) पर बुद्ध पर ज्ञान का दिव्य प्रकाश आया। इसके बाद, उन्होंने लोगों को अपने जीवन की समस्याओं को सकारात्मक रूप से समझने और उनका समाधान करने के लिए निर्देशित किया। दिन-ब-दिन हजारों भक्तों ने उनकी दिव्य शिक्षाओं का आनंद लिया और गहरे सम्मान के साथ, वे उन्हें गौतम बुद्ध के नाम से पुकारने लगे।
🔸🔸यह शक्तिशाली मंत्र शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक अवरोधों को दूर करने में सहायक है। केवल एक चीज की आवश्यकता है कि किसी भी परिणाम से चिपके न रहें। “ओम मणि पद्मे हम”

ओएम’ : सर्वोच्च तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

‘मा’ : नैतिकता का प्रतिनिधित्व करता है जो ईर्ष्या को नियंत्रित करता है।

‘नी’ : धैर्य का प्रतीक है जो जुनून और इच्छा को नियंत्रित करता है।

‘पद’ : अज्ञान को शुद्ध करने वाले परिश्रम का प्रतिनिधित्व करता है।

‘मैं’ : त्याग का प्रतिनिधित्व करता है जो आपके लालच को शुद्ध करता है।

‘हम’ : बुद्धि का प्रतीक है जो उपरोक्त सभी को नियंत्रित करता है।

तुलसी का पौधा रखने की सही जगहतुलसी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ ही आस्था का भी प्रतीक माना जाता है. इसलिए आप...
15/05/2022

तुलसी का पौधा रखने की सही जगह
तुलसी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ ही आस्था का भी प्रतीक माना जाता है. इसलिए आपको यह पता होना चाहिए कि वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी का पौधा किस दिशा में रखना चाहिए. वास्तु शास्त्र के मुताबिक यदि आपके घर में तुलसी का पौधा है तो आपको बता दें कि इस पौधे का घर की बालकनी या खिड़की की उत्तर या उत्तर पूर्व दिशा में लगाना चाहिए. इन दिशाओं में देवी-देवताओं का निवास माना जाता है और इन जगहों पर तुलसी के पौधे को रखना शुभ होता है.
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🔸ध्यान रखें तुलसी के साथ कभी भी कैक्टस और कांटेदार पौधे को कभी नहीं रखना चाहिए.
🔸मान्यता है कि अमावस्या, द्वादशी और चतुर्दशी तिथि को तुलसी के पत्तों को भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए.
🔸रविवार के दिन तुलसी में की पूजा नहीं की जाती और न ही जल अर्पित करना चाहिए. ध्यान रखें रविवार के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए
🔸कहा जाता है कि तुलसी के पौधे को कभी नाखून से नहीं तोड़ना चाहिए.
🔸तुलसी का पौधा यदि सूख गया है तो उसे ज्यादा दिन घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसे नकारात्मकता आती है.तुलसी का पौधा सूख गया है तो उसे गमले से निकालकर नदी में प्रवाहित कर दें.
मान्यता है कि पूजा के दौरान देवी-देवताओं को तुलसी पत्र अर्पित करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है
🔸याद रखें कि गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्तों को भूलकर भी शामिल नहीं करना चाहिए.


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