Astrologer Boby Mohan

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14/09/2021

*गणेश जी को कभी भी विदा नहीं करना चाहिए क्योंकि विघ्न हरता ही अगर विदा हो गए तुम्हारे विघ्न कौन हरेगा।।*
*क्या कभी सोचा है गणेश प्रतिमा का विसर्जन क्यों? अधिकतर लोग एक दूसरे की देखा देखी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। और 3 या 5 या 7 या 11 दिन की पूजा के उपरांत उनका विसर्जन भी करेंगे।*
*आप सब से निवेदन है कि आप गणपति की स्थापना करें पर विसर्जन नही विसर्जन केवल महाराष्ट्र में ही होता हैं। क्योंकि गणपति वहाँ एक मेहमान बनकर गये थे। वहाँ लाल बाग के राजा कार्तिकेय ने अपने भाई गणेश जी को अपने यहाँ बुलाया और कुछ दिन वहाँ रहने का आग्रह किया था जितने दिन गणेश जी वहां रहे उतने दिन माता लक्ष्मी और उनकी पत्नी रिद्धि व सिद्धि वहीँ रही इनके रहने से लालबाग धन धान्य से परिपूर्ण हो गया। तो कार्तिकेय जी ने उतने दिन का गणेश जी को लालबाग का राजा मानकर सम्मान दिया यही पूजन गणपति उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।*
*अब रही बात देश की अन्य स्थानों की तो गणेश जी हमारे घर के मालिक हैं। और घर के मालिक को कभी विदा नही करते वहीँ अगर हम गणपति जी का विसर्जन करते हैं, तो उनके साथ लक्ष्मी जी व रिद्धि सिद्धि भी चली जायेगी तो जीवन मे बचा ही क्या। हम बड़े शौक से कहते हैं गणपति बाप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ इसका मतलब हमने एक वर्ष के लिए गणेश जी लक्ष्मी जी आदि को जबरदस्ती पानी मे बहा दिया। तो आप खुद सोचो कि आप किस प्रकार से नवरात्रि पूजा करोगे, किस प्रकार दीपावली पूजन करोगे और क्या किसी भी शुभ कार्य को करने का अधिकार रखते हो जब आपने उन्हें एक वर्ष के लिए भेज दिया।*
*इसलिए गणेश जी की स्थापना करें पर विसर्जन कभी न करे।*

*🌷ओम एकदंताय नमो नमः🌷।।*

12/09/2020

👉 *कुंडली का दूसरा घर "दीक्षा और सन्यास" का विचार करने हेतु अत्यंत इम्पोर्टेन्ट भाव है* क्योंकि इसे आप सन्यास के बाद नये बनने जा रहे कुटुंब से भी जोड़कर देख सकते हो अतः ऐसे सभी दोस्त जो भविष्य में सन्यास का विचार कर रहे है वो ये क्लास की नोट्स ध्यान से नोट किजियेगा।
👉 कुंडली का दूसरा घर हमारी इज्जत,संचित धन,कुटुंब और रत्नों के व्यवसाय के बारे में बताता है। हमारा मान-सम्मान कितना होना है या नहीं होना है,हमारे पास ईमानदारी से अर्जित धन दौलत कितनी होगी,व्यक्ति के मकान/दुकान के बारे में यह भाव संकेत देता है जैसे उसका मकान/दुकान किस किस्म का होगा यानी छोटा बडा होगा।
👉दूसरा भाव यह भी बताता है कि हम कितने ऐसे ऐशोआराम से रहते है,यह भाव हमारे ज्ञान,नेकी, मोहमाया या हमारा दूसरों से काम निकलवाने का तरीका आदि भी दर्शाता है। इसके अलावा मानसिक तौर पर प्रेम का संबंध भी इसी घर से संबंध रखता है।
👉 गुरु इस घर का कारक होने के कारण यह घर भी किसी हद तक हमारी आध्यात्मिकता के बारें ज्ञान का कारक है,इस ज्ञान का विशेष सम्बन्ध हमारे जीवन के पहले हिस्से में उम्र की पहली साल से पच्चीसवी साल तक जो ज्ञान हम प्राप्त करते है उसका संबंध भी है। घर मिट्टी यानी खेती, गैसे भी इसी घर से देखी जातीं है,उन हवाओं का संबंध भी इसी घर से जो हवा में ऊपर की ओर उठतीं है,हमारी की गयी बचत ओर स्त्री से मिला धन भी इसी घर से देखा जाता है,आध्यात्मिक रूप से या सन्यासी का धन भी इसी घर से देखा जाता है,सन्यासी के धन से मतलब उस धन से जो शुभ कामों के द्वारा कमाया गया हो।
👉 जब हम घर के अंदर कई तरह के पालतू जानवर रखते है तो उनके बारे में भी यह घर अपनी स्थिति बताता है। दूसरे घर को धर्म स्थान या मन्दिर भी कहा जा सकता है,यह धर्म स्थान का घर तो है लेकिन पुराने जमाने में इसे गाय के बांधने का स्थान भी जाना जाता था,इस भाव का संबंध उन पौधों से भी जिनको उनके अंगों को काटकर उगाया जाता है,जैसे मनीप्लांट गुलाब, गन्ना,केला आदि।
👉 हमारे शरीर में यह भाव गर्दन और तिलक लगाने की जगह माथे के बीच में जो स्थान है उसका भी इस घर से है,यह घर हमारी गृहस्थी-कुटुंब से भी संबंध रखता है,इसके अलावा जो कुछ हम रिस्तेदारों से प्राप्त करेंगे या जो कुछ उन्हे देना पडेगा उसका संबंध भी इसी भाव से है।
👉 कुंडली ठीक नक्शे की तरह होती है जो हमे चपटी दिखाई देती है पर वो ग्लोब की तरह होती है, आप भारत का नक्शा और ग्लोब देखकर समझने का प्रयास किजियेगा।दिशाओं के अनुसार यह भाव "उत्तर-पश्चिम" दिशा का कारक है,इस घर मे गुरु,बुध,शुक्र सबसे अच्छे फल देते है,आमतौर पर इस घर में बैठे सभी ग्रह शुभफ़ल देते है,चन्द्रमा को इस घर में उच्चता प्राप्त है,गुरु को इस घर का कारक इसलिये माना गया है कि यह घर मान-सम्मान और धन स्थान है, शुक्र हमारे जीवन में आराम के साधनों का प्रतीक है।

04/06/2020

चन्द्रमा के उपच्छाया ग्रहण ( वर्ष 2020)

5/6 जून 2020
5 जुलाई 2020
30 नवम्बर 2020
चंद्र - मालिन्य ( Penumbra)
उपच्छाया ग्रहण :- उपच्छाया ग्रहण वास्तव में चंद्र ग्रहण नहीं होता। प्रत्येक चंद्र ग्रहण के घटित होने से पहिले चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया में अवश्य प्रवेश करता है, जिसे चन्द्र -मालिन्य अथवा इंग्लिश में (Penumbra) भी कहा जाता है। उसके बाद ही वह पृथ्वी की वास्तविक छाया [ दूसरे शब्दों में भूभा (umbra) ] में प्रवेश करता है। तभी उसे वास्तविक ग्रहण कहा जाता है। भूभा में चन्द्रमा के संक्रमणकाल को चन्द्र ग्रहण कहा जाता है।
ध्यान रहे, कई बार पूर्णिमा को चन्द्रमा उपच्छाया में प्रवेश कर, उपच्छाया शंकु से ही बाहर निकल जाता है। इस उपच्छाया के समय चन्द्रमा का बिम्ब केवल धुन्धला पडता है, काला नहीं होता तथा इस धुधंलेपन को साधारण नंगी आँख से देख पाना संभव नहीं होता। धर्म शास्त्रकारों ने इस प्रकार के उप-ग्रहणों (उपच्छाया) में चन्द्र बिम्ब पर मालिन्य मात्र छाया आने के कारण उन्हें ग्रहण की कोटि में नहीं रखा।
गत कुछ वर्षों से टी.वी. चैनलों तथा कुछ समाचार पत्रों द्वारा अपनी T. R. P. को बढाने के उद्देश्य से उपरोक्त उपछाया ग्रहणों को भी ग्रहण की कोटि में प्रदर्शित कर उनका प्रचार -प्रसार किया जा रहा है। और वहाँ बैठे एंकरों तथा अल्पज्ञ ज्योतिषी के द्वारा इन उपच्छाया ग्रहणों व्दारा 12 राशियों पर पडने वाले काल्पनिक प्रभावों का वर्णन भी कर देते हैं। ऐसे में लोग गुमराह और भयभीत होते हैं। अतः आप बिना कारण बहम न करें।
Rajan Bhardhwaj (Astrologer)
E-mail: [email protected]

27/01/2020

*30 साल बाद शनिग्रह का मकर राशि में प्रवेश*
✍🏻ज्योतिष शास्त्र अनुसार शनि ग्रह को बेहद क्रूर और न्याय करने वाला ग्रह माना जाता है, शनि देव हर इंसान को उसके कर्म के अनुसार शुभ-अशुभ फल देते हैं, शनिदेव 24 जनवरी 2020 को धनु राशि को छोड़कर अपनी राशि मकर में प्रवेश कर चुके हैं। शनि देव के इस राशि परिवर्तन के साथ ही कई लोगों की ढैय्या और साढ़ेसाती समाप्त हो जाएगी तो कुछ लोग इसके प्रभाव में आ जाएंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि शनि के इस राशि परिवर्तन करने से एक तरफ जहां कुछ लोग राहत की सांस लेंगे तो कुछ लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। शनि के अशुभ असर से बचने के लिए राशि अनुसार *दान-पुण्य* करते रहना चाहिए.... १.-हर शनिवार के दिन ॐ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप सभी राशियों के लोगों को करना चाहिए। २.-तांबे के दीपक में तिल या सरसों का तेल भरकर ज्योति जलानी चाहिए। ३.-शनि ग्रह को ठीक करने के लिए सबसे पहले अपने आचरण में सुधार करना चाहिए। ४.-प्रत्येक शनिवार को उड़द की दाल दान करनी चाहिए। ५.-शनि का शुभ परिणाम पाने के लिए अपने माता-पिता को हमेशा सम्मान दें। ६.-एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरें और दान कर दें। ७.-शनिवार की शाम को सरसों के तेल का दिया पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं। ८.-साढ़े साती के दौरान शनि ग्रह का पूजन, जाप ब्राह्मणों से कराए। ९.-प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए...!!

05/11/2019

बृहस्पति का धनु राशि में गोचर- 5 नवंबर 2019
वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत नवग्रहों में बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा गया है और ग्रहों के मंत्रिमंडल में इन्हें मंत्री का पद प्राप्त है। ये नैसर्गिक रूप से सब से शुभ ग्रह माने जाते हैं। यह वृद्धि के कारक हैं इसलिए अच्छी या बुरी जो भी घटना हो उसमें इनका योग वृद्धि कारक होता है। यह हमारे जीवन में हमारे गुरु और गुरु तुल्य लोगों, हमारे परिवार के बड़े बुजुर्गों, संतान, धन तथा ज्ञान का कारक प्राप्त है। जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति से जातक के जीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें पता चलती हैं।

गुरु बृहस्पति का कुंडली पर प्रभाव
कुंडली में बृहस्पति की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को मान सम्मान और ज्ञान प्रदान करती है तथा व्यक्ति को धन की प्राप्ति भी अच्छी मात्रा में होती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी बृहस्पति की मजबूत स्थिति को देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर गुरु बृहस्पति जब इसके विपरीत अवस्था में होते हैं तो इन सभी कारकों में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है। यह धनु और मीन राशि के स्वामी हैं और कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीच अवस्था में माने जाते हैं। कुंडली में चंद्रमा लग्न पर बृहस्पति की दृष्टि अमृत समान मानी जाती है। अगर कुंडली में बृहस्पति की स्थिति अनुकूल नहीं है तो आपको बृहस्पति ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए।

जानें धनु राशि में बृहस्पति ग्रह के गोचर का बारह राशियों पर असर

बृहस्पति ग्रह की शांति के कुछ उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति अनुकूल अवस्था में नहीं है तो आपको पुखराज रत्न धारण करना चाहिए। चूंकि बृहस्पति धनु और मीन राशियों के स्वामी हैं इसलिए अगर इन दोनों राशियों के जातक पुखराज धारण करें तो उन्हें शुभ फल मिलते हैं।

इसके साथ ही बृहस्पति ग्रह के अच्छे फल प्राप्त करने के लिए गुरुवार के दिन या बृहस्पति की होरा में गुरु यंत्र को अपने घर में स्थापित करना चाहिए।

आप गुरु ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए पीपल की जड़ को गुरु की होरा या गुरु के नक्षत्रों में भी धारण कर सकते हैं।

बृहस्पति गोचर का समय
बृहस्पति ग्रह 5 नवंबर 2019, मंगलवार 00:03 बजे अपनी राशि धनु में गोचर करेगा और 29 मार्च 2020, रविवार रात्रि 19:08 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा। गुरु बृहस्पति के इस राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर होगा।

21/09/2019

अपने पूर्वजों के चित्र यहां न लगाएं वरना होगा बुरा, जानिए 5 बातें
घर में अपने मृतकों के चित्र कहां लगाएं और कहां नहीं लगाएं इस संबंध में वास्तु शास्त्र में स्पष्ट उल्लेख मिलता है। गलत स्थान पर चित्र लगाने का बुरा असर होता है। अत: अपने मृतकों या पूर्वजों के चित्र आप उचित‍ स्थान पर ही लगाएं। आओ जानते हैं कुछ खास 5 बातें।
यहां कभी ना लगाएं:-
1.कभी भी परिवार के मृत व्यक्तियों का चित्र देवी और देवताओं के साथ न लगाएं या रखें, क्योंकि देवी या देवता पितरों से बढ़कर होते हैं। ऐसा करने से देवदोष होता है।
2.पूर्वजों के चित्र ब्रह्म अर्थात मध्य स्थान में कभी नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे मान-सम्मान की हानि होती है। पश्चिम या दक्षिण में लगाने से संपत्ति की हानि होती है। उत्तर, ईशान और पूर्व दिशा में किस स्थिति में लगाना चाहिए यह नीचे देखें।
3.पितरों की तस्वीर घर में सभी जगह नहीं लगाना चाहिए। इसे शुभ नहीं माना जाता है। इससे तनाव बना रहता है।
4.यह भी कहा जाता है कि कभी भी मृत लोगों की तस्वीर जीवित लोगों के साथ ना लगाएं इससे नकारात्मकता फैलती है।
5.पूर्वजों की तस्वीर को बैठक, शयनकक्ष और रसोई घर में भी नहीं लगाना जाहिए। इससे पूर्वजों का अपमान होता है और घर में तनाव का माहौल बना रहता है।
6.पितरों की तस्वीर को कभी भी लटकते हुए या झुलते हुए नहीं लगाना चाहिए। मान्यता है कि इससे व्यक्ति का जीवन भी लटकता और झुलता रहता है।
यहां लगाएं तस्वीर:-
1.कुछ वास्तुशास्‍त्रियों के अनुसार यदि घर में पूजा-पाठ का स्थान ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में है तो पितरों की तस्वीर को पूर्व में लगा सकते हैं। वहीं, यदि पूजा स्थल पूर्व दिशा में हो तो तस्वीर ईशान में लगा सकते हैं। यदि पूजा घर से भिन्न किसी कमरे में पूर्वर्जों की तस्वीर लगा रहे हैं तो उत्तर दिशा की दिवार पर लगा सकते हैं जिससे की पूर्वर्जों का चेहरा दक्षिण की ओर रहेगा।
2.हालांकि हम आपको यहां सलाह देना चाहेंगे कि आप अपने पूर्वर्जों की तस्वीर घर की दक्षिण दीवार पर लगाएं। आप इसे घर का दक्षिण पश्‍चिम का कोना मान लीजिए। अगर दक्षिण नहीं मिल पा रहा है तो आप पश्‍चिम के कोने में लगा सकते हैं। मतलब यह कि उनका मुख पूर्व या उत्तर में होना चाहिए।
3.घर के किसी एक ही स्थान पर ही पूर्वजों की तस्वीर लगाएं। वह स्थान ऐसा होना चाहिए तो कि दिशादोष से मुक्त हो।
4.जब भी तस्वीर लगाएं तो तस्वीर के नीचे किसी लकड़ी के गत्ते का सपोट लगाना चाहिए जिससे तस्वीर लटकी या झुलती हुई नजर नहीं आती है।
5.घर के पूर्वजों का चित्र सिर्फ आपके देखने के लिए है किसी दूसरे के लिए नहीं। अत: उसे उस स्थान पर ही लगाएं जहां पर किसी अतिथि की नजर ना पड़े। आप भी उन्हें प्रतिदिन न देखें तो ही अच्छा है। यह सही है कि आपकी भावनाएं उनसे जुड़ी है लेकिन उन्हें प्रतिदिन याद करने से आपके भविष्य पर इसका बुरा असर होगा। मान्यता है कि हर वक्त पूर्वजों को याद करते रहने से मन में उदासी और निराशा की भावना का विकास होता है।

11/08/2019

*इस बार रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, बन रहे हैं*

इस वर्ष भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व भद्रामुक्त रहेगा। कई ऐसे संयोग बनेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा। चार दिन पहले 11 अगस्त को गुरु मार्गी होकर सीधी चाल चलेंगे। रक्षाबंधन पर लगभग 13 घंटे तक शुभ मुर्हूत रहेगा। जबकि दोपहर 1:43 से 4:20 तक राखी बांधने का विशेष फल मिलेगा।
इस बार सावन माह में 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का संयोग एक साथ बन रहा है। इस बार बहनों को भाई की कलाई पर प्यार की डोर बांधने के लिए मुहूर्त का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस बार राखी बांधने के लिए काफी लंबा मुहूर्त मिलेगा। 15 अगस्त की सुबह 5 बजकर 49 मिनट से शाम 6 बजकर 01 मिनट तक राखी बांध सकेंगी। राखी बांधने के लिए 12 घंटे 58 मिनट का समय मिलेगा। शुभ मुहूर्त दोपहर में साढ़े तीन घंटे रहेगा।
इस बार रक्षाबंधन भद्रा मुक्त रहेगी। भद्रा के समय कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। इसलिए भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती। लेकिन, इस बार बहनें सूर्य अस्त होने तक किसी भी समय राखी बांध सकती हैं।

10/08/2019
29/07/2019

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