09/09/2026
*खिरसा*
खिरसा लेल रकटल जीह कें
सेदि लैत छी सए ग्राम पनीर सँ
मुदा खंघरल आत्मा बिसरय नहि चाहैत अछि
खिरसाक स्वाद
ढाबुस बेंग जकाँ अलगौने रहैत अछि
भरल डबरा मे मूड़ी
रहरहाँ फाटि जायल करैत अछि दूध
चिन्नी संग फाँकि जाइत छी फट्टन
कहियो काल घरनी
बना लैत छथि तरकारी
मुदा खिरसाक स्वाद
घुरिक' नहि अबैत अछि गाम सँ
मनोरथे पौस रही पोसने
बाछी तरे बियेबाक भरसबे
खेपि लेने रही मग्घा जाड़
घूरक धुआँ सँ ओँसने रहैत रही मालघर
कहियो कामहि नहि कयल हरियरी
पोसिया लागल गायक एहि पौस कें
दाम-दिगर करैत
छोड़ा अनने रही हम
कुट्टीकट्टा सँ घाहिल भेल अंगुरी
बारि लेल करी खाइत काल
सभटा गुड़ गोबर भेल
हाथ आयल बाछा
सुनैत आयल रही लोकक मुँहें-
गायक पेट मे रहैत छैक चालीस मोन सोन
कहि नहि भेल पौस कें अलच्छी
छाती सँ साटि लेलहुँ नेरू
पौस सँ गाय बनल माय
देबय चाहैत छल हमरा बेटी
जखन कि हमरा गाम मे
नून चटबैक रेबाज
जड़ि पकड़ि लेने छल कहियो
जाँत-पीच करैत बीति गेल राति
भोरे भरि डोल दूध
बनि गेल छल खिरसा
एकटा गमक पसरि गेल छल भरि अँगना
घरनी बिलहय लगली बेन
हमर थारी देखि तखन
ककरो भ' सकैत छल ईर्ष्या
एंटीलिया सँ अंटार्कटिका धरि
ई सुख छल दुर्लभ!
*अजित आजाद*