01/10/2026
गाँधी जयंती पर विशेष...
*चश्मा*
अड़तालीस बर्खक हम
अड़तालीस सँ पहिने
कियैक नहि भेल जन्म
देखितहुँ अहाँकेँ चलैत-बजैत
छुबि केँ देखितहुँ
अकानितहुँ देवत्वक स्पन्दन
पुछितहुँ प्रश्न अनेक मुदा
एकटा त' अबस्से--
की एहू तरहे निमाहल जा सकैत अछि जिनगी
बानरक भीड़ मे
अहाँक तीनू बानर केँ तकैत-तकैत
अपसियांत भेल आबि गेल छी
राजघाट धरि हम
अहीं कहू राष्ट्रपिता
कतय निपत्ता अछि ई तीनू
मुदा कने थम्हु
पहिने अपना लेल
एकटा चश्मा कीनू
अहाँक चश्मा
एहि देशक कोनो टा तक्खा पर नहि अछि।
*अहीं कहने रही*
राजपथ सँ जनपथ दिस बढ़ैत
सैन्य-दलक मार्च-पास्ट सँ
गर्दम-गोल भेल अछि आकाश
जाहि मे मिज्झर अछि किलोल
उत्कंठित जन-गण-मन केर
ई जे 'धम-धम' सुनि रहल अछि सगर जहान
से असल मे 'धम्म' थिक बुद्धक
हुनकहि शरण सँ
पओने अछि विस्तार अनुशरण
जकर एक छोर पर ठेंगा लेने
ठाढ़ छी अहाँ अनवरत
ई अहींक पहरेदारी अछि पिता
जे कहियो नहि होबय देलक कर्तव्य-विमुख किनकहु
राष्ट्रगानक सम्मान मे ठाढ़ सगर देश
अन्तिम 'जय हे' गओलाक बाद आइयो
डूबि जाइत अछि अनेक-अनेक स्मृति-ऋण मे
जकर चुकता नहि भ' सकल अछि आइ धरि
अहूँक ऋण त' नहिये सधा सकलहुँ अछि राष्ट्रपिता
नहिये बेमाक भ' सकत ई देश
युद्ध-भूमि मे परिणत
एहि पृथ्वीक चारूकात सँ
उठि रहल अछि धुआँ आइ
किन्तु एहि धुआँ मे
नहुएँ-नहुएँ मिझरा रहल अछि
आरतीक अगर आ
अज़ानक मधुरिम लय
बारुदक भभक किछु कम भेल अछि
पासा फेकनिहार किछु बेदम भेल अछि
ई अहींक देल पूजी थिक बापू
ई अहीं कहने रही
अनकर घर जराक' आगि नहि तापू
अहाँक हाड़ ने जरि गेल पिता
विचार नहि।
*फन्द*
लाल-हरियर कप्पा मे बान्हल आस्था
कुनमुनाइत अछि
गीता-क़ुरान-बाइबिल जकाँ
सत्य अछि मुदा पाछू मे टाँगल गाँधी सन
आगू शून्य अछि भयहीन
आब अहीं कहू मीलॉर्ड
कठघरा मे ठाढ़ लोकक सप्पत पर
कतबा करी भरोस
कतबा असंदिग्ध अछि निर्णय अहाँक
मद मे डूबल संसद लग
संविधान अछि
मुदा आलमारी मे बन्द
राष्ट्राध्यक्ष मुस्किया रहलाह अछि मन्द-मन्द
फन्द मे पड़ल अछि ई देश!
*अजित आज़ाद*