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हरे-भरे पेड़-पौधे केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि हमारे जीवन की साँस हैं।पेड़ हमें शुद्ध हवा, छाया, फल और आने वाली प...
12/08/2026

हरे-भरे पेड़-पौधे केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि हमारे जीवन की साँस हैं।
पेड़ हमें शुद्ध हवा, छाया, फल और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य देते हैं।
आइए, इस हरियाली को सिर्फ देखें नहीं, इसे बचाने और बढ़ाने का संकल्प लें।
एक पेड़ लगाएँ, उसकी देखभाल करें और प्रकृति को अपना परिवार समझें।
पेड़ बचाएँ — प्रकृति बचाएँ — जीवन बचाएँ।
हर आँगन हरियाली, हर जीवन खुशहाली।

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र की घुघरी बीट में 12 चीतल और 2 सांभर सहित कुल 14 वन्यजीवों की मौत का मामला सामने आ...
29/06/2026

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र की घुघरी बीट में 12 चीतल और 2 सांभर सहित कुल 14 वन्यजीवों की मौत का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह प्राकृतिक मौत नहीं, बल्कि शिकारियों द्वारा तालाब के पानी में ज़हर मिलाकर किए गए सामूहिक शिकार का मामला है।
वन विभाग ने डॉग स्क्वॉड की मदद से जांच करते हुए सुरेश चौधरी, दुर्गेश सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से वन्यजीवों के बाल, मांस, खून के निशान तथा शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कराया गया है और तालाब के पानी के नमूने फॉरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेजे गए हैं ताकि ज़हर के प्रकार की पुष्टि की जा सके। वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है तथा दूषित तालाब के पास विशेष वन रक्षकों की तैनाती की है, जिससे अन्य वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे।

शराब (Sargam/Alcohol) का नियमित या अत्यधिक सेवन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसके प्रमुख नुकसानो...
28/06/2026

शराब (Sargam/Alcohol) का नियमित या अत्यधिक सेवन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसके प्रमुख नुकसानों में लिवर खराब होना (फैटी लिवर) और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, हृदय की मांसपेशियां कमजोर होना, और कैंसर का बढ़ता जोखिम शामिल हैं। इसके अलावा, यह पाचन तंत्र, नसों और याददाश्त को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।आपका लिखा हुआ संदेश प्रभावशाली है। यदि इसे पोस्टर, रील या वीडियो के लिए अधिक आकर्षक बनाना हो, तो इसे इस तरह लिखा जा सकता है:
⚠️ शराब (Alcohol) – सेहत की सबसे बड़ी दुश्मन
❌ नियमित या अत्यधिक शराब का सेवन शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद हानिकारक है।
इसके प्रमुख नुकसान:
🫀 लिवर को नुकसान (फैटी लिवर, सिरोसिस)
🛡️ रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना
❤️ हृदय की मांसपेशियाँ कमजोर होना
🎗️ कैंसर का खतरा बढ़ना
🍽️ पाचन तंत्र को नुकसान
🧠 नसों और याददाश्त पर बुरा असर
😔 मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव

18/06/2026

रामनगर (Ramnagar) मध्य प्रदेश के मंडला शहर से लगभग 15 किमी दूर नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक ऐतिहासिक रूप से समृद्ध गाँव है।

यदि आप यहाँ घूमने की योजना बना रहे हैं, तो रामनगर मुख्य रूप से 17वीं शताब्दी में गोंड राजवंश का एक प्रमुख गढ़ होने के लिए जाना जाता है। जब गोंड शासकों ने अपनी राजधानी यहाँ स्थानांतरित की, तो उन्होंने महलों और किलों का एक शानदार परिसर बनवाया, जो आज भी संरक्षित स्मारकों के रूप में खड़े हैं।

मंडला के रामनगर में देखने लायक मुख्य आकर्षण और स्थान नीचे दिए गए हैं:

1. मोती महल (रामनगर किला)

गोंड राजा हृदयशाह द्वारा 1667 में निर्मित, यह यहाँ का मुख्य आकर्षण है। यह नर्मदा नदी के तट पर बना एक रणनीतिक, तीन मंजिला आयताकार किला है। इसके अंदर एक प्रसिद्ध शिलालेख (पत्थर पर खुदा हुआ लेख) है, जिसमें गोंड राजाओं के पूरे वंश की जानकारी मिलती है।

2. बेगम महल और रानी महल

मोती महल से कुछ ही दूरी पर स्थित ये महल राजपूत और मुगल स्थापत्य शैली (आर्किटेक्चर) के सुंदर मिश्रण को दर्शाते हैं। रानी महल का निर्माण चिमनी रानी के लिए किया गया था, जबकि बेगम महल एक अलग तीन मंजिला इमारत है जो उस काल की शाही जीवन शैली को दिखाती है।

3. राय भगत की कोठी

पास में ही स्थित एक और ऐतिहासिक इमारत है, जो गोंड साम्राज्य के एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी या मंत्री की थी। यह इस क्षेत्र के ऐतिहासिक खंडहरों में एक और खास नाम जोड़ती है।

4. आदिवासी संस्कृति की झलक

रामनगर और उसके आसपास के क्षेत्र (जैसे चौगान गाँव) गोंड और बैगा आदिवासी विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं। मध्य भारत की प्रामाणिक आदिवासी जीवन शैली, कला और परंपराओं को करीब से देखने के लिए यह एक बेहतरीन जगह है।

यात्रा की सलाह: रामनगर प्रसिद्ध कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (Kanha National Park) के रास्ते में स्थित है, इसलिए यह रास्ते में रुकने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यदि आप यहाँ जाने की योजना बना रहे हैं, तो ध्यान रखें कि स्थानीय स्मारक और जिला संग्रहालय आमतौर पर सोमवार को बंद रहते हैं। यहाँ घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच का महीना सबसे अच्छा माना जाता है, जब मौसम सुहावना होता है।

देवगांव संगम (Devgaon Sangam) मध्य प्रदेश के मंडला (Mandla) जिले में स्थित एक बेहद प्राचीन, पवित्र और ऐतिहासिक धार्मिक स...
02/06/2026

देवगांव संगम (Devgaon Sangam) मध्य प्रदेश के मंडला (Mandla) जिले में स्थित एक बेहद प्राचीन, पवित्र और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। यह स्थान मुख्य रूप से नर्मदा परिक्रमा वासियों (तीर्थयात्रियों) के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्राम का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

​इस पावन भूमि का इतिहास और धार्मिक महत्व इस प्रकार है:

​1. नदियों का पवित्र मिलन (भौगोलिक महत्व)

​देवगांव संगम पर मां नर्मदा और उनकी सहायक नदी बुढ़नेर (Budhner Nadi) का पावन संगम होता है। स्थानीय लोक मान्यताओं और कथाओं में बुढ़नेर नदी को मां नर्मदा की 'नानी' के रूप में भी आदर दिया जाता है। इस शांत और सुरम्य संगम तट पर आकर परिक्रमा वासियों और श्रद्धालुओं को अद्भुत मानसिक शांति मिलती है।

​2. महर्षि जमदग्नि की तपोभूमि (पौराणिक इतिहास)

​इस स्थान का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है:

​ऋषि जमदग्नि का आश्रम: मान्यताओं के अनुसार, देवगांव संगम भगवान परशुराम के पिता, महान ऋषि जमदग्नि की प्राचीन तपोभूमि है। उन्होंने इसी पवित्र तट पर बैठकर कठिन तपस्या की थी। आज भी यहाँ उनका ऐतिहासिक आश्रम और यादें जुड़ी हुई हैं।

​भगवान परशुराम से संबंध: पिता जमदग्नि की तपोभूमि होने के कारण इस क्षेत्र को भगवान परशुराम के बाल्यकाल और उनके परिवार से जोड़कर भी देखा जाता है।

​3. नर्मदा परिक्रमा में महत्व और सेवा

​नर्मदा परिक्रमा (नदी के दोनों किनारों पर पैदल चलकर की जाने वाली लगभग 3,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा) में देवगांव संगम एक बहुत महत्वपूर्ण पड़ाव है।

​माँ रेवा प्रसादी प्रकल्प: संगम तट पर 'माँ रेवा प्रसादी प्रकल्प आश्रम' स्थित है। यह आश्रम यहाँ आने वाले सभी संतों और परिक्रमा वासियों के लिए ठहरने और निःशुल्क भोजन (भंडारा) की उत्तम व्यवस्था करता है।

​वार्षिक उत्सव और 56 भोग: यहाँ हर साल (आमतौर पर दिसंबर के महीने में) एक भव्य वार्षिक उत्सव मनाया जाता है, जिसमें मां नर्मदा को '56 भोग' का प्रसाद अर्पण किया जाता है। इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भी यहाँ विशाल मेला लगता है और दीपदान किया जाता है।

​एक अनूठी बात: देवगांव संगम का वातावरण बहुत ही शांत और प्राकृतिक है। घने जंगलों और पहाड़ों के बीच छिपे होने के कारण, यहाँ आज भी आधुनिकता की चकाचौंध से दूर शुद्ध आध्यात्मिक और प्राकृतिक वातावरण देखने को मिलता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि इस आधुनिक दौर में कोई बिना बिजली और पानी के कैसे रहता होगा? सियाराम जी के घर में एक छोटा सा सोलर ...
29/05/2026

अब आप सोच रहे होंगे कि इस आधुनिक दौर में कोई बिना बिजली और पानी के कैसे रहता होगा? सियाराम जी के घर में एक छोटा सा सोलर लाइट है, जो मुश्किल से रात में 10-15 मिनट जलता है। मोबाइल चार्ज करने के लिए उन्हें दूसरे गांव जाना पड़ता है।जंगली हाथी आते हैं, तेंदुए घूमते हैं, भालू का डर है, लेकिन यह इंसान अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। आज हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के तमाबा खुर्द गांव की, जहां रहते हैं 64 वर्षीय सियाराम कोरराम। आखिर क्यों इन्होंने पूरी दुनिया से दूरी बना लीदरअसल, यह पूरा इलाका गंगरेल बांध के डूबान क्षेत्र (डैम बनने के कारण पानी में डूबने वाला इलाका) में आता है। जब यह डैम बना, तो सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से यहां रहने वाले करीब 100 परिवारों को गांव खाली करने को कहा। सब लोग अपना घर-बार छोड़कर चले गए, लेकिन सियाराम और उनके परिवार ने अपनी मिट्टी को नहीं छोड़ा। समय के साथ माता-पिता चल बसे, भाई और मां दूसरे गांव चले गए, लेकिन सियाराम यहीं डटे रहे।

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Mandla
481663

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