15/11/2024
मुफ्तखोरी का मनोविज्ञान !
लाल झंडा पकड़े नेता ने कॉमरेडों से कहा: अगर तुम्हारे पास बीस-बीघा खेत है तो क्या तुम उसका आधा दस बीघा गरीबों को दे दोगे?
सारे कामरेड एक साथ बोले: हाँ दे देंगे!
नेता ने फिर कहा: अगर तुम्हारे पास दो घर हैं तो क्या तुम एक घर गरीबों को दे दोगे?
सारे कामरेड एक साथ बोले: हाँ दे देंगे!
नेता ने फिर कहा: अगर तुम्हारे पास दो कार हैं तो क्या तुम एक कार ग़रीब को दे दोगे?
सारे कामरेड एक साथ बोले: हाँ दे देंगे !
नेता ने फिर पूछा: अगर तुम्हारे पास बीड़ी का बंडल हैं तो क्या उनमें से दो बीड़ी तुम अपने साथी को दे दोगे?
सारे कामरेड एक साथ बोले: नहीं, बीड़ी तो बिल्कुल नहीं देंगे!
नेता बहुत चकित हुए और उन्होंने पूछा: तुम अपना खेत दे दोगे गरीबों को, घर दे दोगे, कार दे दोगे मगर अपनी बीड़ी क्यों नहीं दोगे? इतना बड़ा-बड़ा बलिदान कर सकते हो और बीड़ी पर अटक गए? आख़िर क्यों?
सारे कॉमरेड बोले: ऐसा है कि हमारे पास न तो खेत हैं, न घर है और ना ही कार है ! हमारे पास सिर्फ बीड़ी बंडल हैं!
यही कम्युनिज्म का मूल स्वभाव होता है ! कम्युनिस्ट आपको हर वो चीज देने का वादा करता है जो उसके पास होती नहीं और न ही वो उसे अर्जित कर सकता है!
कम्युनिस्ट आपको ये सारी चीजें किसी और से छीनकर देने का वादा करता है !
अर्बन नक्सल आपको फ्री बिजली, फ्री पानी, फ्री ट्रांसपोर्टेशन देने का वादा करता है... वह भी किसी और की गाढ़ी कमाई से!
Samant B Jain की wall से