Setu Prakashan Samuh

Setu Prakashan Samuh रचनात्मक, विचारपरक, गुणवत्तापूर्ण

06/08/2026

BABA SAHEB Dr. AMBEDKAR : JEEVAN AUR VICHAR by Ashok Gopal

बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर (1891-1956) शायद भारत की सबसे ज्यादा पूजी जाने वाली ऐतिहासिक हस्ती हैं।

नामवर सिंह की जयंती के अवसर पर श्रीप्रकाश शुक्ल की पुस्तक 'आलोचना की जमीन और नामवर सिंह'सेतु प्रकाशन समूह से प्रकाशित श्...
28/07/2026

नामवर सिंह की जयंती के अवसर पर श्रीप्रकाश शुक्ल की पुस्तक 'आलोचना की जमीन और नामवर सिंह'

सेतु प्रकाशन समूह से प्रकाशित श्रीप्रकाश शुक्ल की नयी पुस्तक 'आलोचना की जमीन और नामवर सिंह' अब पाठकों के लिए उपलब्ध।

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 #सेतु_प्रकाशन_समूह  #पुण्य_स्मरणहिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष, प्रख्यात चिन्तक और अध्यापक प्रो. नामवर सिंह को उनकी जन्मशत...
28/07/2026

#सेतु_प्रकाशन_समूह #पुण्य_स्मरण

हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष, प्रख्यात चिन्तक और अध्यापक प्रो. नामवर सिंह को उनकी जन्मशती पर सेतु प्रकाशन परिवार की ओर से सादर नमन!

#नामवर_सिंह #जन्मशती #हिंदी_साहित्य #हिंदी_आलोचना #श्रद्धांजलि

 #सेतु_प्रकाशन_समूह  #विशेष_छुट   #गांधी_के_बहाने  #पराग_मांदले सेतु प्रकाशन समूह से प्रकाशित तृतीय सेतु पाण्डुलिपि पुरस...
24/07/2026

#सेतु_प्रकाशन_समूह #विशेष_छुट #गांधी_के_बहाने #पराग_मांदले

सेतु प्रकाशन समूह से प्रकाशित तृतीय सेतु पाण्डुलिपि पुरस्कार योजना के तहत पराग मांदले की पुरस्कृत कृति 'गांधी के बहाने' पर 25% की विशेष छूट। यह छूट 31 जुलाई, 2026 तक सेतु की वेबसाइट पर उपलब्ध।

पुस्तक लिंक:
https://www.setuprakashan.com/.../gandhi-ke-bahane-by.../

 #साभार_राजेंद्र_कैड़ा  #बाबासाहेब_डॉ_आंबेडकर_जीवन_और_विचार  #अशोक_गोपाल  #अनुवादक_अनिल_माहेश्वरीबाबासाहेब डॉ. आंबेडकर ज...
24/07/2026

#साभार_राजेंद्र_कैड़ा #बाबासाहेब_डॉ_आंबेडकर_जीवन_और_विचार #अशोक_गोपाल #अनुवादक_अनिल_माहेश्वरी

बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जीवन और विचार - लेखक : अशोक गोपाल, अनुवादक : अनिल माहेश्वरी प्रकाशक :सेतु प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, 2026

पिछले कुछ वर्षों में आम्बेडकर को लेकर भारतीय बौद्धिकों के बीच बहस तेज होती रही। हालांकि कम या ज्यादा डॉ. भीमराव आम्बेडकर भारतीय बौद्धिक जगत में गंभीर रूप से चर्चित रहे हैं, लेकिन इधर यह गंभीरता कुछ बड़ी हुई दिखाई देती है। बाबा साहेब पर इधर दो दशकों के भीतर जो महत्वपूर्ण अध्ययन सामने आए उनमें Gail Omvedt की Ambedkar : Towerds An Enlightened India (2004), Salim Yusufji कि Ambedkar : The Attendant Details (2017), क्रिस्तोफ जाफ्र्लो की Dr. Ambedkar And Untouchability (2019) और शशि थरूर की पुस्तक Ambedkar : A Life (2022) महत्वपूर्ण रहीं। ये यह और इन जैसी कुछ और महत्वपूर्ण पुस्तकों जिनमे अरुंधति रॉय की The Docter And The Saint (2017) को भी याद किया जाना चाहिए। बावजूद इनके आम्बेडकर पर एक बेहद गंभीर और मुकम्मल पुस्तक की कमी लगातार बनी रही। वर्ष 2023 में प्रख्यात जनबुद्धिजीवी एवं पत्रकार श्री अशोक गोपाल की पुस्तक का प्रकाशन हुआ। A Part Apart : Life And Thoughts of B.R.Ambedkar नाम से प्रकाशित इस पुस्तक के प्रकाशन के साथ ही भारतीय बौद्धिक जगत में आम्बेडकर फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए। पुस्तक में व्यापत शोध की गंभीरता और तथ्यात्मक क्षमता ने अध्यताओं को शीघ्र ही पुस्तक के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। श्री अशोक की इस पुस्तक के महत्व को देखते हुए साथ ही विशेषकर हिंदी प्रदेश के जन-सामान्य, हिंदी बौद्धिकों एवं शोधकर्ताओं के लिए इसके मूल्य को समझ कर सेतु प्रकाशन प्रा.लि. ने इस पुस्तक का बेहद सधा हुआ और गंभीर अनुवाद प्रकाशित कराया। वर्ष 2026 में ही सुप्रसिद्ध विचारक एवं अध्येता श्री अनिल माहेश्वरी ने इस पुस्तक का अनुवाद प्रस्तुत किया।

बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर : जीवन और विचार नाम से प्रकाशित इस वृहदकाय पुस्तक का प्रकाशन बहुत सुंदर रूप-रंग और आकार में किया गया। पुस्तक का महत्व खुद इस बात से लक्षित होता है कि आम्बेडकर पर इससे पहले लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तकों के लेखकों ने भी इस पुस्तक की पूर्णता और शोध वृत्ति को खुल शब्दों में स्वीकार किया है। शुरुआत में विस्तृत जीवन परिचय के पश्चात औपचारिक आभार, अंग्रेजी संस्करण की भूमिका और अंत में महत्वपूर्ण परिशिष्ट के साथ अन्य संदर्भों को प्रस्तुत किया गया है। यह 21 अध्याय में लगभग 800 पृष्ठों की भारी भरकम पुस्तक है। जीवनी लिखे जाने के तीन ढंग सामान्यतः भारत में देखे गए हैं। एक - कथित राजनीतिक एजेंडे में किसी बड़े व्यक्तित्व को फिट करने के उद्देश्य से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जाता है और अपने राजनीतिक या वैचारिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से उस महापुरुष की जीवनी लिखी जाती है। दूसरा - भक्ति एवं स्तुतिपरक ढंग से किसी महापुरुष की जीवनी लिखी जाती । तीसरा – Revenge Writing के उद्देश्य से किसी की निंदात्मक जीवनी लिखी जाती है। यह देखना संतोषप्रद है कि बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर की अनिल गोपाल द्वारा लिखी गई जीवनी प्रचलित उक्त तीनों दोषों से मुक्त है और अपने 21 अध्याय में आम्बेडकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के उन महत्वपूर्ण और कई बार अनदेखे-अनछुए आयामों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करती है। संपूर्ण पुस्तक अशोक गोपाल की सघन मेहनत और कठिन अध्यावसाय का मौलिक उदाहरण है। निश्चित यह पुस्तक न केवल गंभीर पाठ की मांग करती है बल्कि संग्रहणीय भी है। अनुवाद बेहद सधा और सहज है तथा पुस्तक का रूप आकर्षक एवं सुरुचिपूर्ण- जिसके लिए अनुवादक एवं प्रकाशक बधाई और धन्यवाद के पात्र हैं।

पुस्तक लिंक: (35% की विशेष छूट)
https://www.setuprakashan.com/.../baba-saheb-dr-ambedkar.../

 #पुण्य_स्मरण   #सैयद_हैदर_रज़ाआधुनिक मूर्धन्य चित्रकार सैयद हैदर रज़ा को उनकी दसवीं पुण्यतिथि पर सेतु प्रकाशन परिवार की ओ...
23/07/2026

#पुण्य_स्मरण #सैयद_हैदर_रज़ा

आधुनिक मूर्धन्य चित्रकार सैयद हैदर रज़ा को उनकी दसवीं पुण्यतिथि पर सेतु प्रकाशन परिवार की ओर से सादर नमन!

 #साभार_परिकथा  #दूब  #हरियश_राय  #डॉ_गाजुला_राजूसेतु प्रकाशन समूह से प्रकाशित हरियश राय की चर्चित पुस्तक 'दूब' की विस्त...
22/07/2026

#साभार_परिकथा #दूब #हरियश_राय #डॉ_गाजुला_राजू

सेतु प्रकाशन समूह से प्रकाशित हरियश राय की चर्चित पुस्तक 'दूब' की विस्तृत समीक्षा साहित्यिक पत्रिका 'परिकथा' के जुलाई-सितम्‍बर, 2026 के अंक में। पत्रिका के सम्पादक शंकर व समीक्षक डॉ. गाजुला राजू का हार्दिक आभार।

पुस्तक लिंक: (20% की विशेष छूट)
https://www.setuprakashan.com/.../doob-novel-by-hariyash.../

अमेजन:
https://amzn.in/d/gaWFS6V

 #साभार_रामनगीना_मौर्य_के_फेसबुक_वॉल_से  #भोजपुरी_सिनेमा  #अंजनी_श्रीवास्तव"भोजपुरी सिनेमा, तब अब सब", (1961- 2025) पुस्...
22/07/2026

#साभार_रामनगीना_मौर्य_के_फेसबुक_वॉल_से #भोजपुरी_सिनेमा #अंजनी_श्रीवास्तव

"भोजपुरी सिनेमा, तब अब सब", (1961- 2025) पुस्तक के माध्यम से भोजपुरी दुनिया को विस्तार से पढ़ने-जानने और समझने का अवसर मिलता है।।
भोजपुरी सिनेमा के इस बृहद सन्दर्भ ग्रन्थ में भोजपुरी भाषा-संस्कृति, भोजपुरी भाषा की व्यापकता, भोजपुरी सिनेमा के इतिहास, ऐतिहासिक भोजपुरी फिल्में, सुप्रसिद्ध भोजपुरी सितारों, गीतकार, संगीतकार, कलमकारों सहित भोजपुरी फ़िल्मों के स्वर्णकाल और बाद की स्थितियों सहित समय- समय पर भोजपुरी फ़िल्मों की दुनिया में क्या-कुछ बदलाव आए, क्रोनालॉजी सहित उनके कारण, परिणामों पर विस्तृत जानकारी मिलती है। साथ ही सिनेमा के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनैतिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है। लेखक द्वारा भोजपुरी साहित्य, संस्कृति, सिनेमा पर तैयार किए गए इस व्यापक शोधपरक, वैविध्यपूर्ण और सुरुचिपूर्ण सामग्री सम्पन्न पुस्तक को देखने- पढ़ने से स्पष्ट है कि लेखक ने इसे सर्वोपयोगी बनाने के लिए कितना परिश्रम किया होगा। वे स्वीकारते भी हैं कि इस पुस्तक को लिखने में विभिन्न माध्यमों से जानकारियां जुटाते, किताब पूरा करने में करीब बारह साल से भी ज्यादा समय लगा।
इस पुस्तक की महत्ता और विशिष्टता के मद्देनजर सुप्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी जी लिखते भी हैं... "भोजपुरी संस्कृति वो बल खाती नदी है, जो पूर्वांचल से नेपाल होते हुए फिजी, मॉरीशस, त्रिनिदाद और क़रीब- क़रीब पूरी दुनिया की पैमाइश करती है। भोजपुरी भाषियों की ललकार में भी लालित्य है और हर प्रयास में एक सार्थक व प्रभावी परिणाम देने का प्रबल आत्मबल भी।"
आश्चर्य नहीं कि यह पुस्तक भोजपुरी सिनेमा के चाहने वालों को नॉस्टैल्जिया में भी ले जाती है। उन्हें अपनी प्रिय भोजपुरी फ़िल्मों, उनके गीत-संगीत की बड़ी शिद्दत से याद दिलाते हैं।

एक सर्वे के अनुसार पूरी दुनिया में आज भोजपुरी बोलने वालों की संख्या पच्चीस करोड़ से भी ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसे में भोजपुरी भाषा की व्यापकता को देखते हुए एवं दुर्लभ जानकारियों से परिपूर्ण पुस्तक की विषय सामग्री देखने से स्पष्ट है कि यह पुस्तक भोजपुरी दुनिया, भोजपुरी सिनेमा के लिए निश्चय ही विशिष्ट सन्दर्भ ग्रन्थ साबित होगी। परिशिष्ट में उल्लिखित 'सामग्री-स्रोत' भी अत्यन्त उपयोगी है।
यह किताब सामान्य पाठकों के लिए ज्ञानवर्धक, संग्रहणीय तो है ही, भोजपुरी सिनेमा जगत पर शोधार्थियों के लिए भी अति महत्त्वपूर्ण है।

ऐसी विशिष्ट पुस्तक सुधी पाठकों तक उपलब्ध कराने के लिए लेखक, प्रकाशक को बहुत बहुत बधाई। हार्दिक शुभकामनाएं।

पुस्तक लिंक: (20% की विशेष छूट)
https://www.setuprakashan.com/.../bhojpuri-cinema-by.../

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 #साभार_कैलाश_वानखेड़े_के_फेसबुक_वॉल_से   #फकीरा  #अण्णा_भाऊ_साठे  #उषा_वैरागकर_आठलेमाझी मैना गांवा कडे राहिली,अण्णा भाऊ ...
22/07/2026

#साभार_कैलाश_वानखेड़े_के_फेसबुक_वॉल_से #फकीरा #अण्णा_भाऊ_साठे #उषा_वैरागकर_आठले

माझी मैना गांवा कडे राहिली,अण्णा भाऊ साठे का लोकगीत बहुचर्चित है।एक शाहीर का यह गीत ,मन और भाषा के दर्द, पीडा, सपने,विस्थापन की एक महागाथा है। रोजगार की तलाश में शहर मुम्बई में आने वाला युवा,उम्मीद के साथ उदासी में डूबकर पत्नी के मन भाव को बताता है। प्रेम मन को छोड़कर जाने वाला युवा आर्थिक तंगहाली में विवश है लेकिन उसके भीतर प्रेम ही प्रेम है जो उदासी के साथ बैचेन करता है।

शाहिर भाषा और प्रदेश की तमाम खासियत के साथ बात करते हुए इतिहास बताने बोलने लगते है। उम्मीदों के बीच मुम्बई आकर पता चलता है कि बेरोजगारों की भीड़ में वह शामिल हो गया हैं।

जिसे रहना खाना नही मिल पाता वह संयुक्त महाराष्ट्र के आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। अन्ना भाऊ इतिहास की परत के भीतर जाकर बोलने लगते है।

माझी मैना से जाना था, उन्हें सुना था विट्ठल उपम की आवाज में। कल भोपाल से मिले संदेश से याद आया कि अन्ना भाऊ साठे 18 जुलाई 1969 को नही रहे थे।उनका ढेर सारा लेखन है। हिंदी में फकीरा अनुदित होकर आया है। सालभर से ज्यादा हो गया, पढ़ नही पाया। जैसे पता नही चलता कि जीवन जीना स्थगित है वैसे ही स्थगित है उपन्यास पढ़ना। इस गीत को तीन गायकों ने अपने अपने अंदाज में गाया।सबको सुना। दो दो बार सुना। फिर सुनूँगा।

कभी फकीरा पढ़कर लिखूंगा, अपने आपसे वादा है।

पुस्तक लिंक-
वेबसाइट : (15% की विशेष छूट )
https://www.setuprakashan.com/.../fakira-by-anna-bhau-sathe/

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 #साभार_ककसाड़  #मंटो_साब_दोस्तों_की_नज़र_में  #हिन्दी_अनुवाद_और_सम्पादन_ज़ाहिद_खान  #जयराम_सूर्यवंशीसेतु प्रकाशन समूह स...
22/07/2026

#साभार_ककसाड़ #मंटो_साब_दोस्तों_की_नज़र_में #हिन्दी_अनुवाद_और_सम्पादन_ज़ाहिद_खान #जयराम_सूर्यवंशी

सेतु प्रकाशन समूह से प्रकाशित ज़ाहिद खान द्वारा उर्दू से हिन्दी में अनुदित और सम्पादित पुस्तक 'मंटो साब : दोस्तों की नज़र में' की सारगर्भित समीक्षा साहित्यिक पत्रिका 'ककसाड़' के जुलाई अंक में। सम्पादक डॉ. राजाराम त्रिपाठी और समीक्षक जयराम सूर्यवंशी का हार्दिक आभार।

पुस्तक लिंक: (20% की विशेष छुट)
https://www.setuprakashan.com/.../manto-saab-doston-ki.../

अमेजन:
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