27/02/2023
खुदा बख्श ओरिएण्टल पब्लिक लाइब्रेरी ( बिहार की विरासत )
पटना में, गंगा के घाट के निकट अवस्थित है। यद्यपि इसकी स्थापना पहले की गई थी, किंतु इसे अक्तूबर, 1891 में बिहार के प्रसिद्ध सपूत खान बहादुर खुदा बख्श द्वारा जनता के लिए खोला गया। इसमें 4000 पांडुलिपियां थीं जिनमें से 1400 उन्होंने अपने पिता से विरासत में प्राप्त किए। खुदा बख्श ने अपना समस्त निजी संग्रह एक न्यास विलेख के माध्यम से पटना जनता को सौंप दिया था। यह पुस्तकालय पूर्व विरासत का एक अद्वितीय कोष है, जिसे कागज़, ताड़-पत्र, मृग चर्म,कपड़े और विविध सामग्रियों पर लिखित पांडुलिपियों के रूप में परिरक्षित किया गया है। साथ ही इसका स्वरूप आधुनिक है जिसमें कुछेक जर्मन, फ्रेंच, पंजाबी, जापानी व रूसी पुस्तकों के अलावा अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी और हिंदी में मुद्रित पुस्तकें भी रखी गई हैं। यह पुस्तकालय प्राच्य अध्ययनों में एक अनुसंधान केन्द्र के रूप में तथा छात्रों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कए सार्वजनिक पुस्तकालय के रूप में कार्य करते हुए दोहरी भूमिका निभाता है। अब यह डिजिटल पुस्तकालय के रूप में विकसित हो रहा है, जिसमें पुस्तकालय के भीतर डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध 2000 से अधिक पांडुलिपियां मौजूद हैं। पुस्तकालय लैन तथा इंटरनेट कनेक्शन सहित ई-मेल सुविधाओं से लैस है। पुस्तकालय के पास दो पठन कक्ष हैं, एक कक्ष अनुसंधानकर्त्ताओं और स्कॉलरों के लिए है जबकि दूसरे कक्ष अनियमित पाठकों के लिए हैं। पुस्तकालय में विश्व के सभी स्कॉलरों,अनुसंधानकर्ताओं तथा पाठकों को स्वागत है और उनकी आवश्यकताओं पर ध्यान दियाजाता है। स्कॉलरों को सन्दर्भ सेवाएं भी फैक्स,फोन तथा ई-मेल के जरिए भी उपलब्ध करायी जाती है। भारत में तथा विदेश में स्कॉलरों को माइक्रोफिल्म,जेरोक्स, फोटोग्राफ आदि की सप्लाई के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जाती हैं जो इस पुस्तकालय की मुख्य विशेषताहै।