21/09/2025
Fir se muskura raha hu............बचपन में उसकी मुस्कराहट ही मेरी दुनिया थी...
तब प्यार का मतलब नहीं जानता था… बस उसे खोना नहीं चाहता था।
जैसे-जैसे बड़े हुए, ख्वाब गहरे होते गए। साथ जीने मरने की कसमें खाते थे।
फिर मैं पुणे चला गया – एक नई शुरुआत, एक बेहतर कल के लिए।
सबकुछ ठीक चल रहा था... लेकिन तभी पापा को कैंसर हो गया।
दो साल तक सिर्फ सेवा और सब्र...
और फिर... एक दिन, पापा चले गए।
कुछ दिन बाद... वो भी... किसी और से शादी कर गई।
मैं टूट गया था... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
एक पुरानी दोस्त ने मेरा हाथ थामा... दर्द के बीच एक नई रौशनी बनकर आई।
उसने मेरा साथ दिया... मेरा बिज़नेस संभाला... और फिर... दिल भी।
अब मैं फिर से जी रहा हूँ...
**फिर से मुस्कुरा रहा हूँ।**
RS shaikh