24/08/2026
#क्या_आपको_पता_है_झारखण्ड_की_इन_कलाकृतियों_के_बारे_में_?
जानिए इन पारम्परिक कलाओं के बारे में :
🎨 सोहराय कला: प्रकृति और समृद्धि की कहानी
सोहराय झारखंड की प्रसिद्ध पारंपरिक चित्रकला है, जिसका प्रमुख केंद्र हजारीबाग क्षेत्र माना जाता है। इसे विशेष रूप से सोहराय पर्व के दौरान घरों की दीवारों पर बनाया जाता है। इसमें पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और प्रकृति के विभिन्न रूप दिखाई देते हैं।
सोहराय कला हमारी प्रकृति के साथ जुड़ाव और ग्रामीण जीवन की सुंदरता को दर्शाती है। सोहराय कला को 2020 में GI Tag मिला।
🎨 पैतकर कला: लोककथाओं की चित्रित कहानी
पैतकर झारखंड की प्राचीन लोक चित्रकला परंपरा है, जिसका प्रमुख संबंध पूर्वी सिंहभूम के अमाडुबी गांव से है। पारंपरिक रूप से कलाकार लंबे चित्रों के माध्यम से पौराणिक कथाएँ, लोककथाएँ, देवी-देवताओं और प्रकृति से जुड़ी कहानियाँ प्रस्तुत करते हैं।
प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीकों से बनाई जाने वाली यह कला झारखंड की लोक संस्कृति और कहानी कहने की अनोखी परंपरा को जीवित रखती है।
🎨 खोवर या कोहवर कला: प्रेम और नए जीवन की शुरुआत
खोवर झारखंड के हजारीबाग क्षेत्र की पारंपरिक कला है, जिसे विशेष रूप से विवाह के अवसरों पर बनाया जाता है। इसमें फूल, बेल-पत्तियाँ, पक्षी, पशु और प्रकृति के प्रतीक दिखाई देते हैं।
कोहवर कला विवाह, प्रेम, उर्वरता और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। कोहवर कला को 2020 में GI Tag मिला।
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