13/11/2025
एक दस साल की बच्ची बीमार थी। डॉक्टर ने जवाब दे दिया था कि अब इसका बचना मुश्किल है बच्ची घर के आंगन में खटिया पर पड़ी अपने अंतिम दिन गिन रही थी। वह देख रही थी आंगन में लगा पेड़ भी अपने पत्ते गिरा रहा है। एक दिन बच्ची ने अपनी बड़ी बहन से पूछा " दीदी ये पेड़ अपने सारे पत्ते कब तक गिरा देगा? " बहन बोली " मगर तू ये सब क्यों पूछ रही है? " तब बच्ची ने बताया " दीदी मुझे लगता है जिस दिन पेड़ अपना अंतिम पता गिरा देगा। उस दिन मेरी साँसे पूरी हो जायेगी। मै ये दुनिया छोड़ कर चली जाऊंगी।" बड़ी बहन बोली " ये तेरा भ्रम है। तुझे कुछ नही होगा। एक दिन तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगी।" फिर दिन गुजरने लगे। पेड़ ने सारे पत्ते गिरा दिये मगर एक डाली पर पांच पत्ते रह गए। जो बिल्कुल हरे थे। पीले भी नही हुए। धीरे धीरे पेड़ पर नये पत्ते आने लगे। बच्ची उन पांच पत्तो को देखते देखते आश्चर्यजनक रूप से ठीक होने लगी। एक दिन वह बिल्कुल ठीक हो गई। तब उसने उन पांचों पत्तो को छुकर देखा। वो नकली पत्ते थे। जिन्हे उसकी बड़ी बहन ने लगाया था। कहानी का मोरल:-किसी की उम्मीद बनिये। क्योंकि जब तक उम्मीद जिंदा है इंसान मे जीने की ललक बनी रहती है। उम्मीदों के सहारे ही तो जिंदगी चल रही है। (विचार सागर)