28/03/2026
कोकिलाक्ष,तालमखाना🌹
प्राचीन काल से तालमखाना का प्रयोग कई तरह के बीमारियों के लिए औषधि के रुप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। क्योंकि तालमखाना या कोकिलाक्ष के बीज के औषधीय गुण अनगिनत होते हैं और इसका सही मात्रा में चिकित्सक के सलाह से प्रयोग किया गया तो कई बीमारियों से राहत पाया जा सकता है।
प्राचीन काल से इसका प्रयोग वाजीकरण चिकित्सा या यौन संबंधी समस्याओं के उपचार में किया जा रहा है। आयुर्वेदीय निघण्टु एवं संहिताओं में कोकिलाक्ष का वर्णन प्राप्त मिलता है। चरक-संहिता के शुक्रशोधन महाकषाय में भी इसका उल्लेख प्राप्त होता है।
कोकिलाक्ष मूल रूप से यौन संबंधी बीमा1रियों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है, विशेष रूप से पुरूषों के काम शक्ति बढ़ाने और स्पर्म काउन्ट या शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में बहुत असरदार रूप से काम करता है। तालमखाना मीठा, अम्लिय गुण वाला, कड़वा, ठंडे प्रकृति का, पित्त को कम करने वाला, बलकारक, खाने में रुचि बढ़ाने वाला, फिसलने वाला, वात और कफ करने में सहायक होता है। यह सूजन, पाइल्स, प्यास, पित्त संबंधी समस्या, शोफ , विष, दर्द, पाण्डु या पीलिया, पेट संबंधी रोग, पेट का फूलना , मूत्र का रुकना , जलन, आमवात या गठिया, प्रमेह या मधुमेह, आँखों के बीमारियाँ तथा रक्तदोष को कम करने में मदद करता है। इसके बीज कड़वे, मधुर, ठंडे तासीर के, भारी, कमजोरी दूर करने वाले तथा गर्भ को पोषण देने वाले होते हैं।
प्रमेह या मधुमेह में फायदेमंद कोकिलाक्ष
आजकल की भाग-दौड़ और तनाव भरी जिंदगी ऐसी हो गई है कि न खाने का नियम और न ही सोने का। फल ये होता है कि लोग को मधुमेह या डायबिटीज की शिकार होते जा रहे हैं।तालमखाना के बीजों का काढ़ा बनाकर 15-30 मिली काढ़ा में मिश्री मिलाकर पिलाने से प्रमेह में फायदा मिलता है। इसके अलावा तालमखाना बीज चूर्ण में समान मात्रा में बला, गंगेरन व गोखरू चूर्ण मिलाकर रख लें। 2-4 ग्राम चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री मिलाकर खाने से प्रमेह में लाभ होता है।
पीलिया में फायदेमंद तालमखाना
अगर आपको पीलिया हुआ है और आप इसके लक्षणों से परेशान हैं तो तालमखाना का सेवन इस तरह से कर सकते हैं। तालमखाना के पत्तों का काढ़ा बनाकर, 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से कामला या पीलिया, पांडु या एनीमिया, जलोदर तथा मूत्रदाह का शमन होता है।
अतिसार या दस्त रोके तालमखाना
अगर ज्यादा मसालेदार खाना, पैकेज़्ड फूड या बाहर का खाना खा लेने के कारण दस्त है कि रूकने का नाम ही नहीं ले रहा तो तालमखाना का इस तरह से सेवन करें। 2-4 ग्राम तालमखाना बीज चूर्ण को दही के साथ खिलाने से अतिसार या दस्त को रोकने में मदद मिलती है।
सांस संबंधी बीमारी में लाभकारी तालमखाना
अगर किसी कारणवश सांस लेने में समस्या हो रही है तो तुरन्त आराम पाने के लिए कोकिलाक्ष का सेवन ऐसे करने से लाभ मिलता है। 2-4 ग्राम तालमखाना बीज चूर्ण में शहद तथा घी मिलाकर खिलाने से सांस लेने की तकलीफ में लाभ होता है।
तालमखाना जलोदर में फायदेमंद
पेट में जल या प्रोटीन द्रव्य के ज्यादा हो जाने के कारण पेट फूल जाता है और दर्द होने लगता है। ऐसी परेशानी में तालमखाना बहुत फायदेमंद होता है। तालमखाना की जड़ का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से जलोदर में लाभ होता है। इस काढ़ा को पीने से सूजन, मूत्रकृच्छ्र या मूत्र संबंधी समस्या, अश्मरी या पथरी, पूयमेह (गोनोरिया), मूत्राशय तथा लीवर संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
स्वस्थ किडनी के लिए तालमखाना का उपयोग
किडनी से सम्बंधित परेशानियों को दूर करने में भी तालमखाना फायदेमंद पाया गया है क्योंकि इसमें मूत्रल गुण होने के कारण यह मूत्र की मात्रा को बढ़ा कर किडनी को स्वस्थ रूप से कार्य करने में मदद करता है।
खांसी में फायदेमंद कोकिलाक्ष
अगर मौसम के बदलाव के कारण खांसी से परेशान है और कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है तो इसके घरेलू इलाज से आराम मिल सकता है। कोकिलाक्ष के पत्तों का चूर्ण बनाकर, 1-2 ग्राम चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से खाँसी में लाभ होता है।
कुष्ठ रोग में तालमखाना के फ़ायदे
कुष्ठ रोग अधिकतर पित्त दोष के अधिक प्रकुपित होने के कारण होते है। ऐसे में तालमखाना का प्रयोग लाभदायक होता है क्योंकि इसमें पित्त शामक गुण पाए जाते है जो कि इस रोग के लक्षणों को काम करने में सहयोग देता है।
रक्त विकार या रोगों में फायदेमंद कोकिलाक्ष
अगर रक्त संबंधी बीमारियों से आप परेशान हैं तो कोकिलाक्ष का सेवन इस तरह से कर सकते हैं। इसके लिए 1-2 ग्राम कोकिलाक्ष बीज चूर्ण का सेवन करने से रक्तज विकारों में लाभ होता है।
मूत्र संबंधी समस्या से दिलाये छुटकारा तालमखाना
मूत्र संबंधी बीमारी में बहुत तरह की समस्याएं आती हैं, जैसे- मूत्र करते वक्त दर्द या जलन होना, मूत्र रुक-रुक कर आना, मूत्र कम होना आदि। तालमखाना का सेवन इस बीमारी में बहुत ही लाभकारी साबित होता है।
गोखरू, तालमखाना तथा एरण्ड की जड़ को दूध में घिसकर पीने से यूरिन करते समय दर्द या जलन तथा पथरी में लाभ होता है। इसके अलावा 1 ग्राम तालमखाना मूल में समभाग गोखरू तथा एरण्ड की जड़ मिलाकर, दूध में पीसकर छानकर पिलाने से मूत्र करते समय दर्द, यूरिन का रुकना और पथरी आदि में लाभ होता है।
पथरी एवं मूत्रविकारों में तालमखाना का प्रयोग
पथरी एवं अन्य मूत्र विकारों में तालमखाना उपयोगी माना गया है क्योंकि इसमें मूत्रल गुण होता है। इस गुण के कारण यह मूत्र की मात्रा को बढ़ा कर मूत्रमार्ग द्वारा शरीर से पथरी आदि गन्दगी को बाहर निकालने में मदद करता है और मूत्र विकारों को दूर करता है।
कब्ज के रोगी के लिए तालमखाने के फायदे
कब्ज के रोगियों में भी तालमखाना अपने स्निग्ध गुण के कारण लाभदायक हो सकता है। इस गुण के कारण यह आँतों की रुक्षता को कम कर में जमे हुए मल को आसानी से शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है ।
स्पर्म काउन्ट बढ़ाने में गुणकारी कोकिलाक्ष
आजकल की जीवनशैली और आहार का बुरा असर हमारी लाइफ पर पड़ रहा है जिसके कारण यौन संबंधी समस्याएं होने लगी हैं। तालमखाने का इस तरह से सेवन करने पर स्पर्म काउन्ट को बढ़ाया जा सकता है।
तालमखाना बीज चूर्ण में समान मात्रा में सफेद मूसली चूर्ण तथा गोखरू चूर्ण मिलाकर, 2-4 ग्राम चूर्ण को धारोष्ण दूध के साथ पीने से शुक्राणु कम होने की समस्या ठीक होती है। इसके अलावा 5 ग्राम तालमखाना बीज चूर्ण में 5 ग्राम क्रौंच बीज चूर्ण तथा 10 ग्राम शर्करा मिला लें। 2-4 ग्राम चूर्ण को धारोष्ण दूध के साथ सेवन करें।
गठिया का दर्द करे कम तालमखाना
अक्सर उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द होने की परेशानी शुरू हो जाती है लेकिन तालमखाने का सेवन करने से इससे आराम मिलता है।
तालमखाना तथा गुडूची को समान मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाकर, 10-20 मिली काढ़े में 500 मिग्रा पिप्पली चूर्ण मिश्रित कर सेवन करने तथा पथ्य भोजन करने से गठिया में शीघ्र लाभ होता है। इसके अलावा 5-10 मिली तालमखाना का रस तथा तालमखाना शाक का सेवन करने से वातरक्त या गाउट में लाभ होता है।
रुमेटाइड अर्थराइटिस या आमवात में फायदेमंद तालमखाना
आजकल अर्थराइटिस की समस्या उम्र देखकर नहीं होती है। दिन भर एसी में रहने के कारण या बैठकर ज्यादा काम करने के कारण किसी भी उम्र में इस बीमारी का शिकार होने लगे हैं। इससे राहत पाने के लिए तालमखाने का इस्तेमाल ऐसे कर सकते हैं। तालमखाना पञ्चाङ्ग को पीसकर लेप करने से दर्द वाले जगह पर लगाने से दर्द कम होता है।
कमर दर्द से आराम दिलाये तालमखाना
अगर दिनभर बैठकर काम करते हैं और आपके बैठने या खड़े होने का पॉश्चर सही नहीं है या दूसरे किसी बीमारी के कारण कमर में दर्द से परेशान हैं तो तालमखाने का प्रयोग ऐसे करने से जल्दी आराम मिलता है। तालमखाना के पत्तों को पीसकर लेप करने से कमर का दर्द तथा जोड़ो के दर्द में असरदार रुप से आराम मिलता है।
सूजन कम करने में असरदार कोकिलाक्ष
शरीर के किसी अंग में सूजन और दर्द होने पर कोकिलाक्ष असरदार रुप से काम करती है। गोमूत्र या जल के साथ 65-125 मिग्रा तालमखाना भस्म का सेवन करने से शोथ (सूजन) कम होता है।
अनिद्रा में फायदेमंद कोकिलाक्ष
आजकल के तनाव भरी व्यस्त जीवनशैली की देन है अनिद्रा की बीमारी, कोकिलाक्ष का सेवन बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है, काकजंघा, अपामार्ग, तालमखाना तथा सुपर्णिका का काढ़ा बनाकर, 10-20 मिली की मात्रा में पीने से अनिद्रा दूर होती है।
केवाँच तथा तालमखाने के 2-4 ग्राम फलचूर्ण में शर्करा मिलाकर गर्म दूध के साथ पीने से वाजीकरण गुणों की वृद्धि होती है।आयुर्वेद में कोकिलाक्ष के जड़, पत्ता, बीज तथा पञ्चाङ्ग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।
ये पोस्ट सिर्फ जानकारी के लिए है तालमखाना का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।🙏
अनु🥰