03/02/2026
सावधान ,अगर आप सस्ता सोचकर ले रहे है तो आप वही पे लूटे जा रहे है , fraud of big sale counters
आभूषण बाजार में "2% या 3% मेकिंग चार्ज" का विज्ञापन सुनकर अक्सर ऐसा लगता है कि यह एक बहुत बड़ी डील है, लेकिन ज्वेलरी बिजनेस के गणित में चीजें उतनी सीधी नहीं होतीं जितनी दिखती हैं।
बाजार में इस "कम मेकिंग चार्ज" के पीछे कई छिपे हुए पहलू होते हैं जिन्हें समझना आपके लिए जरूरी है:
1. मेकिंग चार्ज बनाम वेस्टेज (Wastage)
अक्सर दुकानदार मेकिंग चार्ज तो 2% बताते हैं, लेकिन वेस्टेज (Wastage) के नाम पर 8% से 12% तक जोड़ देते हैं।
सच्चाई: सोने के गहने बनाते समय कुछ सोना बर्बाद होता है, जिसे 'वेस्टेज' कहते हैं। अगर दुकानदार मेकिंग चार्ज कम कर रहा है, तो वह अक्सर इसकी भरपाई भारी-भरकम वेस्टेज लगाकर कर लेता है।
2. सोने की दर में अंतर (Gold Rate Markup)
जब आप कम मेकिंग चार्ज वाले विज्ञापन देखते हैं, तो एक बार उस दिन के इंटरनेशनल या नेशनल मार्केट रेट (जैसे IBJA रेट) से तुलना जरूर करें।
सच्चाई: कई बार दुकानदार प्रति ग्राम सोने की कीमत ही बाजार भाव से ₹200-₹500 ज्यादा लगा देते हैं। ऐसे में 2% मेकिंग चार्ज सिर्फ एक दिखावा रह जाता है क्योंकि आपने पहले ही सोने की कीमत में ज्यादा पैसे दे दिए हैं।
3. पत्थर और मोतियों का वजन (Stone Weight Fraud)
अगर आप जड़ाऊ गहने (जिसमें नग या पत्थर हों) खरीद रहे हैं, तो यह सबसे पुराना खेल है।
सच्चाई: दुकानदार पूरे गहने का वजन करता है और पत्थर के वजन पर भी सोने का भाव लगा देता है। वापसी के समय वही पत्थर "जीरो वैल्यू" के हो जाते हैं। कम मेकिंग चार्ज का लालच देकर ग्राहक को ऐसे भारी पत्थरों वाले गहने बेचे जाते हैं जिनमें मुनाफा ज्यादा हो।
4. शुद्धता में हेरफेर (Purity Issues)
हालांकि अब Hallmarking (HUID) अनिवार्य है, लेकिन फिर भी कुछ छोटे स्तर पर पुराने स्टॉक या गैर-हॉलमार्क गहनों में शुद्धता कम हो सकती है।
सच्चाई: अगर आप 22 कैरेट के पैसे दे रहे हैं और सोना असल में 18 या 20 कैरेट का है, तो दुकानदार को मेकिंग चार्ज लेने की जरूरत ही नहीं है—उसने शुद्धता में ही अपना मोटा मुनाफा कमा लिया है।
ज्वेलरी बिजनेस में कोई भी घाटे में काम नहीं करता। अगर कोई 2% पर गहने दे रहा है, तो वह कहीं न कहीं उसे Hidden Cost में एडजस्ट कर रहा है। हमेशा 'Final Bill Amount' की तुलना दूसरे भरोसेमंद शोरूम से जरूर करें।