Upendra Vastu Resolve

Upendra Vastu Resolve Vastu,Astro,Numero for home/office/shop/industry/land selection....for helth wealth & injoy full life

 #मुख्यद्वार प्रभाव,चारों दिशाओं में किस स्थान पर द्वार होने से क्या प्रभाव होता है  #वास्तुविद्या अनुसार।विशेष विश्लेषण...
05/09/2026

#मुख्यद्वार प्रभाव,चारों दिशाओं में किस स्थान पर द्वार होने से क्या प्रभाव होता है #वास्तुविद्या अनुसार।
विशेष विश्लेषण सहित जानकारी हेतु Upendra Kumar आई डी पर पढ़ें।
आपका मित्र वास्तु विद्यार्थी उपेंद्र कुमार पटना (बिहार)

मित्रों नमस्कार, आज  #दक्षिण दिशा में  #मुख्यद्वार संबंधित फलाफल की कुछ चर्चा करते हैं।पिछले पोस्टों में उत्तर एवं पूर्व...
03/09/2026

मित्रों नमस्कार, आज #दक्षिण दिशा में #मुख्यद्वार संबंधित फलाफल की कुछ चर्चा करते हैं।
पिछले पोस्टों में उत्तर एवं पूर्व दिशा में मुख्यद्वार संबंधित फलाफल बताया गया है।
#ग्रन्थों में बताया गया है कि द्वार निर्णय हेतु पूर्व दिशा की गणना ईशान कोण से, दक्षिण दिशा की गणना अग्नि कोण से, पश्चिम दिशा की गणना नैरित्य कोण से और उत्तर दिशा की गणना वायव्य कोण से करनी चाहिए।

पुर्वाणयैशान्यां याम्याग्नेय्यां दक्षिणानि जानीयात्।
द्वाराणि नैर्रित्त्यादीनि पश्चिमान्युत्तराणि वायोश्च।।
( #वास्तुसार, बृ. दै. रं., #बृहद् वा. माला )

वास्तुविद्या में दक्षिण दिशा संबंधित द्वार प्रभाव चित्र में लिखा है।
जिसमें पहला पद पावक(अग्नि) का है जिसे कहीं कहीं पर अनल,अनिल,अग्नि भी बताया गया है।
पहले पद(अग्नि) पर मुख्यद्वार होने से गृह स्वामी को मृत्यु तुल्य कष्ट बताया गया है।
विमर्श :- पहले भी बताया है कि शास्त्रों में सिर्फ शरीर से प्राण निकलना ही मृत्यु नहीं है,इसके आठ प्रकार बताए गए हैं।

व्यथा दुःखं भयं लज्जा रोगः शोकस्तथैव च।
मरणश्च अवमानश्च मृत्युरष्टविधः स्मृतः।।
(बृहद दै. रं.)
अर्थात व्यथा, दुःख,भय, लज्जा,रोग,शोक,कलंक आदि मृत्यु के ही स्वरूप हैं।

यह अग्नि (साहस,सामर्थ्य, शक्ति)का प्रमुख स्थान है, जो द्वार स्थिति के कारण कटा हुआ जैसा प्रभावी हो जाता है।
(इससे शिरा,वंश, मर्म पीड़ित होने की संभावना रहती है)
शास्त्रों में निर्देश मिलता है कि भवन का कोई भी कोण कटा हुआ नहीं होना चाहिए।

दूसरा पद है पूषा का इसका प्रभाव भी नाश(हानि) एवं दारुण कष्ट बताया गया है।
तीसरा पद है वितथ का यहां पर मुख्यद्वार का प्रभाव कष्टकारी बताया गया है।
विमर्श:-हालांकि अन्य ग्रंथ,पुराणों में अन्य प्रभाव भी बताया गया है जिसके बारे में भी चर्चा करेंगे।
Upendra Vastu Resolve
चौथा पद है गृहक्षत का जो सभी प्रकार से संपत्ति देने वाला बताया गया है।
पांचवां पद है यम का जिसका प्रभाव सर्वनाश बताया गया है।
छठा पद है गंधर्व का जिसका प्रभाव कर्मों में वृद्धि करता है बताया गया है।
सातवां पद है भृंगराज का जिसका प्रभाव पशुधन नाश बताया गया है।
और आठवां पद है मृगा का जिसका प्रभाव मरण एवं संतान हानि बताया गया है।

अन्य ग्रन्थों में दक्षिण दिशा में मुख्यद्वार संबंधित फलाफल को देखने का प्रयास करते हैं।

अल्पसुतत्वं प्रैष्यं नीचत्वं भक्ष्यपान सुतवृद्धिः।
रौद्रं कृतघ्नमधनं सुतवीर्यघ्नं च याम्येन।।
( यह समरांगन सूत्रधार,वास्तु रत्नाकर,वास्तु रत्नावली, वास्तुसार, बृहद संहिता आदि ग्रन्थों में)

अग्निस्थाने वह्निभयं पूष्णि च

मित्रों नमस्कार,आज पूर्व दिशा में  #मुख्यद्वार संबंधित फलाफल की कुछ चर्चा का प्रयास करते हैं। #वास्तुविद्या में पूर्व दि...
01/09/2026

मित्रों नमस्कार,आज पूर्व दिशा में #मुख्यद्वार संबंधित फलाफल की कुछ चर्चा का प्रयास करते हैं।
#वास्तुविद्या में पूर्व दिशा में मुख्यद्वार संबंधित सूत्रों को चित्र में लिखा गया है।
पूर्व दिशा में ईशान कोण में पूर्वी भाग में पहला पद है #शिखि ,
जिसे रुद्र/अग्नि भी बताया गया है,
यहां पर मुख्यद्वार होने से अग्निभय बताया गया है।
तो क्या घर में सदैव आग लगते रहेगा???
ऐसा नहीं है।
तो क्या समझें!!
अर्थात घर में क्रोध,कुकर फटना, शॉर्ट सर्किट आदि भी अग्निभय का पर्याय माना जाता है।
दूसरा पद #पर्जन्य है, यहां पर मुख्यद्वार का प्रभाव धन नाश (अन्य ग्रंथ में कन्या संतति अधिक/स्त्रिवियोग)बताया गया है।
अर्थात खर्च की अधिकता होती है।
तीसरे पद #जयंत है, यहां पर मुख्यद्वार होने से विजय प्राप्ति (इच्छापूर्ति)होती है।
(अन्य स्थानों पर बहुत धनदायक भी बताया गया है)।
चौथे पद महेंद्र है, यहां पर मुख्यद्वार सर्वश्रेष्ठ बताया गया है,
यह महत्व (सम्मान,प्रसिद्धि) बढ़ाने वाला होता है।
पांचवां पद सूर्य है, यहां पर मुख्यद्वार होने से संतति कष्ट बताया गया है।UVR...
(अन्य स्थानों पर अति क्रोध,तेज वृद्धि भी बताया गया है)
निरीक्षण के दौरान भी देखा गया है कि यह द्वार सामाजिक/सरकारी संबंध/लाभ भी देता है।
परन्तु साथ ही क्रोध भी, क्यों??
क्योंकि सूर्य ग्रहों के राजा एवं अग्नि का प्रतीक हैं।
मेरा बात(ऑर्डर)क्यों नहीं मानते हैं,इस कारण क्रोध/झगड़े की संभावना रहती है।
छठा पद सत्य है, यहां पर मुख्यद्वार होने से मित्र भंग(दोस्ती/रिश्तों में दरार) बताया गया है।
(अन्य स्थानों पर अनृतत्व/झूठ का बोलबाला) अर्थात सत्यता /भरोसे की कमी रहती है।
सातवां पद भृश है, यहां पर मुख्यद्वार होने से अलगाव बताया गया है।
(अन्य स्थानों पर क्रूरता बताया गया है)जो बिना मतलब का मीन मेख निकालने की आदत के कारण अलगाव की स्थिति बनती है।
और आठवां पद है अंतरिक्ष का, यहां पर मुख्यद्वार होने से "विनाशमपि गच्छती" अर्थात सदैव नुकसान की स्थिति रहती है। Upendra Vastu Resolve
(अन्य स्थानों पर चोरी की संभावना भी बताया गया है जो नुक्सान की स्थिति बनाती है)।
विमर्श:- ध्यान रखें द्वार निर्धारण सदैव डिग्री के आधार पर करें। क्योंकि प्लॉट/घर के आकार,घुमाव के कारण यह थोड़ा आगे पीछे भी हो सकता है।
और एक ध्यान देने योग्य बात है:-
*पदद्वयं कृतं यच्च यद्वा मिश्रफलप्रदम।*
अर्थात दो या अधिक पदों पर द्वार हो या दो या अधिक द्वार हो तो वह मिश्रित(मिलेजुले )प्रभाव देता है।
आपका द्वार किस पद पर है और आप क्या प्रभाव अनुभव कर रहे हैं लिखें।
3,4 पद पर मुख्यद्व

वास्तु उपाय।"यथा साध्यं तथा कुरू"  जितना सम्हाल सकें/जैसा सामर्थ्य हो उसी अनुरूप कर्म करना लाभदायक होता है।आपका मित्र वा...
31/08/2026

वास्तु उपाय।
"यथा साध्यं तथा कुरू" जितना सम्हाल सकें/जैसा सामर्थ्य हो उसी अनुरूप कर्म करना लाभदायक होता है।
आपका मित्र वास्तु विद्यार्थी उपेंद्र कुमार पटना बिहार

मित्रों नमस्कार,आज चर्चा करते हैं उत्तर दिशा में मुख्यद्वार संबंधित। #वास्तुविद्या में उत्तर दिशा में मुख्यद्वार संबंधित...
31/08/2026

मित्रों नमस्कार,
आज चर्चा करते हैं उत्तर दिशा में मुख्यद्वार संबंधित।
#वास्तुविद्या में उत्तर दिशा में मुख्यद्वार संबंधित फलाफल बताया गया है जो निम्न चित्र में लिखा गया है।
उसका कुछ/थोड़ा विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं।
उत्तर दिशा में वायव्य कोण के तरफ से पहला पद रोग(वायु/मारूत )का प्रभाव वात रोग बताया गया है,
अर्थात वायु जनित(शारीरिक/मानसिक)कष्ट बताया गया है
(यानी की घर में अस्थिरता,मानसिक उद्वेग,गैस/दर्द की समस्या आदि)
दूसरा पद है नाग का, जिसका प्रभाव नागभय बताया गया है,
अब सोचिए 10/15मंजिल पर कौन सा सांप होगा!!
तो यहां तात्पर्य है कि शत्रुता(क्रोध/झगड़े),विष(इन्फेक्शन/reaction ,food poisoning आदि) की संभावना रहती है।
तीसरा पद मुख्य पर मुख्यद्वार उत्तम ज्ञान (विप्रज्ञ), किसी क्षेत्र में विशेषज्ञ (specialist) बनाता है।
चौथे पद भल्लाट पर मुख्यद्वार विशिष्ट (हर प्रकार से उन्नति)लाभ देता है ।
पांचवां सोम पद पर मुख्यद्वार यज्ञशील(धार्मिक भावना,संतोषी स्वभाव)बनाता है।
छठा अर्गल(भुजग) पद पर मुख्यद्वार का प्रभाव जल में डूबने(अर्थात भावना में गलत कदम)की संभावना रहती है।
यह सर्प (भुजग)से भी संबंधित है अर्थात अपने परिवार या अन्य लोगों के साथ बातचीत का तरीका क्रोधयुक्त(फुंफकार)हो सकता है जो शत्रुता का कारण बनता है उपेंद्र।
सातवां अदिति पद पर मुख्यद्वार होने से पेट/कुक्षी(गर्भाशय) रोग की संभावना रहती है।
और आठवां पद दिती पर मुख्यद्वार होने से "वनिता कुलनाशनम" अर्थात स्त्री के कारण कष्ट,अर्थात विलासिता/दिखावे में अधिक खर्च की संभावना उत्पन्न करता है।
Upendra Vastu Resolve
हालांकि इसे और भी विस्तृत रूप से समझा जा सकता है,
परन्तु मीडिया प्लेटफार्म का एक स्तर है अतः इतना चर्चा उचित है।(अन्य ग्रन्थों में और भी वर्णन मिलता है)
अब अगर आप अपने भवन में स्थित/स्थापित उपरोक्त मुख्यद्वार का संबंधित प्रभाव अनुभव कर रहे हैं तो इनके (3,4,5 पद को छोड़कर)उपाय की आवश्यकता होती है।
कुछ स्थानों पर तो अन्य द्वार भी बनाए जा सकते हैं लेकिन कुछ स्थानों पर (फ्लैट्स)द्वार परिवर्तन संभव नहीं होता है, तो उपाय करना ही मजबूरी होती है।
आप अगर उपरोक्त प्रभाव अनुभव कर रहे हैं तो लिखें,
आपका कौन सा पद में मुख्य द्वार है।
आपका मित्र वास्तु विद्यार्थी उपेंद्र कुमार पटना ( बिहार)

31/08/2026
16/07/2026

Address

Upendra Vastu Resolve (vardhya Construction P. Ltd)sona Center F-503 Saguna More Patna
Shahpur

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm

Telephone

+917044367045

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Upendra Vastu Resolve posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Upendra Vastu Resolve:

Shortcuts

Share