RanjanKumar social hindi novel writter

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08/09/2024

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एहि तन कर फल बिषय न भाई।स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई॥नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं।पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं॥अर्थ : हे भाई! इस ...
21/06/2023

एहि तन कर फल बिषय न भाई।
स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई॥
नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं।
पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं॥

अर्थ : हे भाई! इस शरीर के प्राप्त होने का फल विषयभोग नहीं है (इस जगत् के भोगों की तो बात ही क्या) स्वर्ग का भोग भी बहुत थोड़ा है और अंत में दुःख देने वाला है। अतः जो लोग मनुष्य शरीर पाकर विषयों में मन लगा देते हैं, वे मूर्ख अमृत को बदलकर विष पी लेते हैं। (अतः इस शरीर को सत्कर्म में लगाना चाहिए।)

03/05/2022

एक ऐसी प्रेम कथा, जो हमे वास्तविक तथा मर्यादित प्रेम रूबरू कराती है...!!

जय विर हनुमान मित्रो..
08/03/2022

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18/02/2022

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जब तुलसीदास के सामने प्रकट हुए हनुमान, पढ़ें पौराणिक कथाश्रीरामचरित मानस लिखने के दौरान तुलसीदासजी ने लिखा- सिय राम मय स...
28/12/2021

जब तुलसीदास के सामने प्रकट हुए हनुमान, पढ़ें पौराणिक कथा

श्रीरामचरित मानस लिखने के दौरान तुलसीदासजी ने लिखा-



सिय राम मय सब जग जानी;

करहु प्रणाम जोरी जुग पानी!



अर्थात 'सब में राम हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए।'



यह लिखने के उपरांत तुलसीदासजी जब अपने गांव की तरफ जा रहे थे तो किसी बच्चे ने आवाज दी- 'महात्माजी, उधर से मत जाओ। बैल गुस्से में है और आपने लाल वस्त्र भी पहन रखा है।'तुलसीदासजी ने विचार किया कि हूं, कल का बच्चा हमें उपदेश दे रहा है। अभी तो लिखा था कि सब में राम हैं। मैं उस बैल को प्रणाम करूंगा और चला जाऊंगापर जैसे ही वे आगे बढ़े, बैल ने उन्हें मारा और वे गिर पड़े। किसी तरह से वे वापस वहां जा पहुंचे, जहां श्रीरामचरित मानस लिख रहे थे। सीधे चौपाई पकड़ी और जैसे ही उसे फाड़ने जा रहे थे कि श्री हनुमानजी ने प्रकट होकर कहा- तुलसीदासजी, ये क्या कर रहे हो?



तुलसीदासजी ने क्रोधपूर्वक कहा, यह चौपाई गलत है और उन्होंने सारा वृत्तांत कह सुनाया।



हनुमानजी ने मुस्कराकर कहा- चौपाई तो एकदम सही है। आपने बैल में तो भगवान को देखा, पर बच्चे में क्यों नहीं? आखिर उसमें भी तो भगवान थे। वे तो आपको रोक रहे थे, पर आप ही नहीं माने.

Top novel by munshi prem chand
26/12/2021

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